भारत-यूके CETA: भारतीय कृषि को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल, किसानों को मिलेगा जीरो-ड्यूटी निर्यात का लाभ

भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। इस समझौते के तहत भारतीय कृषि उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, पैकहाउस और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को आगे बढ़ाती है, जिसका उद्देश्य भारतीय उत्पादकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है।
किसानों के लिए नए अवसर
भारत-यूके CETA के लागू होने के बाद भारतीय कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय फलों, सब्जियों, मसालों, चाय, कॉफी, चावल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और अन्य कृषि उत्पादों की ब्रिटेन में मांग बढ़ने की संभावना है। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ निर्यात के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
इस समझौते का लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होने से ग्रामीण क्षेत्रों में कई सहायक क्षेत्रों का भी विस्तार होगा, जिनमें शामिल हैं—
- किसान उत्पादक संगठन (FPOs)
- पैकहाउस और कोल्ड चेन नेटवर्क
- खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ
- परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सेवाएँ
- निर्यात आधारित कृषि आपूर्ति श्रृंखला
इन क्षेत्रों में गतिविधियाँ बढ़ने से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कृषि मूल्य श्रृंखला होगी अधिक सशक्त
कृषि मूल्य श्रृंखला (Agricultural Value Chain) में उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात तक कई चरण शामिल होते हैं। CETA के माध्यम से इन सभी चरणों में निवेश और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क मुक्त बाजार उपलब्ध होने से भारतीय कृषि निर्यात में वृद्धि होगी। इससे किसानों को घरेलू बाजार पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। निर्यात बढ़ने से कृषि उत्पादों का मूल्य बेहतर मिलने की संभावना है, जिससे किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।
भारत-यूके व्यापार संबंध होंगे मजबूत
भारत और ब्रिटेन के बीच CETA केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम है। कृषि के अलावा विनिर्माण, सेवा, खाद्य प्रसंस्करण और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है। इससे भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी।
निष्कर्ष
भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है। जीरो-ड्यूटी निर्यात सुविधा से भारतीय किसानों, FPOs, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और ग्रामीण रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह समझौता कृषि मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और भारत को वैश्विक कृषि निर्यात के प्रमुख देशों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।