शिक्षा के क्षेत्र में इटली की बड़ी सफलता: स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में आई ऐतिहासिक कमी

इटली ने शिक्षा सुधारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी INVALSI 2026 की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों (ड्रॉपआउट) की संख्या पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से घटी है। यह सफलता सरकार द्वारा लागू की गई शिक्षा नीतियों, छात्रों को व्यक्तिगत सहयोग और आधुनिक शिक्षण प्रणाली का परिणाम मानी जा रही है।
ड्रॉपआउट दर में रिकॉर्ड गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में इटली की स्कूल ड्रॉपआउट दर 11.5 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 7.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि अधिक छात्र अब अपनी पढ़ाई पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार देश की शिक्षा व्यवस्था में किए गए व्यापक बदलावों का सकारात्मक प्रभाव है।
यूरोपीय संघ का लक्ष्य समय से पहले पूरा
यूरोपीय संघ ने वर्ष 2030 तक सदस्य देशों में स्कूल ड्रॉपआउट दर को 9 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इटली ने इस लक्ष्य को तय समय से पहले हासिल कर एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सही नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में बड़े परिवर्तन संभव हैं।
अन्य यूरोपीय देशों से बेहतर प्रदर्शन
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इटली अब कई प्रमुख यूरोपीय देशों से बेहतर स्थिति में है। जहां स्पेन में ड्रॉपआउट दर लगभग 12.8 प्रतिशत और जर्मनी में 13.1 प्रतिशत दर्ज की गई, वहीं इटली ने 7.3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचकर उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। यह उपलब्धि यूरोप में इटली की शिक्षा प्रणाली को नई पहचान दिला रही है।
शिक्षा सुधारों ने बदली तस्वीर
ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए इटली सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
- ट्यूटर शिक्षक व्यवस्था के माध्यम से छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई गई।
- एजेंडा सुद और पियानो एस्टेट जैसी योजनाओं के जरिए दक्षिणी इटली के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दिया गया।
- डिक्री कैइवानो के तहत शिक्षा को सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों से जोड़कर कमजोर वर्गों के बच्चों को स्कूल में बनाए रखने का प्रयास किया गया।
- डिजिटल शिक्षा और STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में निवेश बढ़ाकर विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ने की दिशा में काम किया गया।
अभी भी मौजूद हैं कुछ चुनौतियाँ
हालांकि माध्यमिक और उच्च शिक्षा स्तर पर सुधार स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, लेकिन प्राथमिक शिक्षा में अभी भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। विशेष रूप से पढ़ने की क्षमता, भाषा कौशल, व्याकरण, गणित और लेखन में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी उद्देश्य से नई राष्ट्रीय शिक्षा दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं ताकि शुरुआती कक्षाओं से ही मजबूत शैक्षणिक आधार बनाया जा सके।
भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान शिक्षा नीतियों को इसी तरह प्रभावी ढंग से लागू किया जाता रहा, तो आने वाले वर्षों में इटली की शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। इससे न केवल ड्रॉपआउट दर में और कमी आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, रोजगार क्षमता और सामाजिक विकास में भी सुधार होगा।
निष्कर्ष
इटली की यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय सफलता नहीं है, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य का प्रतीक है जिन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखने का निर्णय लिया। ड्रॉपआउट दर में आई ऐतिहासिक गिरावट यह साबित करती है कि दूरदर्शी नीतियां, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों को समय पर सहयोग मिलने से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है। इटली का यह मॉडल दुनिया के अन्य देशों, विशेष रूप से शिक्षा सुधार की दिशा में काम कर रहे देशों, के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।