मार्च 30, 2026

डिजिटल सहमति प्रबंधन की दिशा में ट्राई की ऐतिहासिक पहल: बैंकों और आरबीआई के साथ साझेदारी

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Anoop singh

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने उपभोक्ताओं को स्पैम कॉल और अनचाहे व्यावसायिक संदेशों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 16 जून 2025 को ट्राई ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और देश के कुछ प्रमुख बैंकों के सहयोग से डिजिटल सहमति प्रबंधन के लिए एक प्रायोगिक परियोजना की शुरुआत की। इस परियोजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं की सहमति को सुरक्षित, पारदर्शी और डिजिटल रूप से मान्य बनाना है ताकि अनधिकृत वाणिज्यिक संचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

समस्या की जड़: सहमति का दुरुपयोग

ट्राई ने यह पाया कि उपभोक्ताओं द्वारा की जाने वाली अधिकांश स्पैम शिकायतें उन्हीं व्यावसायिक संस्थाओं के खिलाफ होती हैं, जिनसे उन्होंने पहले कोई सेवा या उत्पाद खरीदा होता है। ये संस्थाएं अक्सर यह दावा करती हैं कि उपभोक्ता ने स्वेच्छा से वाणिज्यिक कॉल और संदेशों के लिए सहमति दी है। लेकिन जांच में यह सामने आया कि अधिकांश सहमतियां ऑफलाइन ली जाती हैं और उनकी वैधता की पुष्टि कर पाना कठिन होता है। कई बार उपभोक्ताओं का डेटा अनधिकृत तरीकों से साझा किया जाता है या धोखे से उनकी सहमति प्राप्त की जाती है।

डिजिटल सहमति रजिस्ट्री की अवधारणा

ट्राई ने उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए एक डिजिटल सहमति रजिस्ट्री का प्रस्ताव रखा है। इस प्रणाली के तहत उपभोक्ता की सहमति को एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत किया जाएगा। दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) और अन्य संस्थाएं इसी डिजिटल सहमति के आधार पर उपभोक्ताओं से संपर्क कर सकेंगी। इस व्यवस्था से सहमति की वैधता की जांच करना आसान होगा और किसी भी अनधिकृत संचार की संभावना घटेगी।

बैंकिंग क्षेत्र में प्रायोगिक परियोजना

इस नए ढांचे का पहला प्रयोग बैंकिंग क्षेत्र में किया जा रहा है। बैंकिंग लेनदेन की संवेदनशीलता और वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए बैंकिंग क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। 13 जून 2025 को ट्राई ने सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को निर्देश जारी कर इस प्रायोगिक परियोजना में भाग लेने को कहा है। इस परियोजना को नियामक सैंडबॉक्स ढांचे के अंतर्गत चलाया जा रहा है ताकि तकनीकी, परिचालन और नियामक पहलुओं का गहन परीक्षण किया जा सके।

उपभोक्ताओं के लिए लाभ

इस पहल से उपभोक्ताओं को कई फायदे होंगे:

  • स्पैम और धोखाधड़ी से सुरक्षा: अनधिकृत कॉल और संदेशों पर रोक लगेगी।
  • पारदर्शिता: उपभोक्ता यह देख सकेंगे कि किसने और कब उनकी सहमति ली है।
  • आसान शिकायत निवारण: किसी अनधिकृत संचार की स्थिति में उपभोक्ता आसानी से शिकायत कर सकेंगे।

ट्राई की प्रतिबद्धता

ट्राई का उद्देश्य एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है जो उपभोक्ता केंद्रित, पारदर्शी और सुरक्षित हो। इस दिशा में ट्राई विभिन्न हितधारकों और क्षेत्रीय नियामकों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है ताकि डिजिटल सहमति प्रणाली को देशभर में लागू किया जा सके।

निष्कर्ष

डिजिटल युग में उपभोक्ताओं की गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ट्राई की यह पहल न केवल स्पैम और अनधिकृत संचार को रोकने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह उपभोक्ताओं में डिजिटल संचार को लेकर विश्वास भी पैदा करेगी। आने वाले समय में इस प्रायोगिक परियोजना के सफल होने पर अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल को लागू करने की योजना है।


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