डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: चेन्नई और मुंबई में चीनी पटाखों की तस्करी का भंडाफोड़

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने देश के दो प्रमुख बंदरगाह शहरों—चेन्नई और मुंबई—में चीनी मूल के अवैध पटाखों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में करीब 35 करोड़ रुपये मूल्य की आतिशबाज़ी सामग्री जब्त की गई है और 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह ऑपरेशन अवैध आयात और खतरनाक सामानों की तस्करी के खिलाफ अब तक की अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
चेन्नई पोर्ट पर छापेमारी: छिपाकर लाई गई बड़ी खेप
चेन्नई बंदरगाह पर की गई जांच के दौरान दो 40-फुट लंबे कंटेनरों को रोका गया, जिन्हें कागजों में “ट्रॉली बैग” और “स्प्रेयर” जैसे सामान्य सामान के रूप में दर्ज कराया गया था। लेकिन गहन जांच में इन कंटेनरों के भीतर भारी मात्रा में अवैध पटाखे छिपे पाए गए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन कंटेनरों से लगभग 46,000 से अधिक पटाखे बरामद किए गए, जिन्हें बेहद चालाकी से अन्य सामान के पीछे छिपाया गया था ताकि सीमा शुल्क जांच से बचा जा सके।
मुंबई में लगातार ऑपरेशन: 100 मीट्रिक टन से ज्यादा जब्ती
मुंबई में मई 2026 से जारी अभियान के दौरान अब तक 100 मीट्रिक टन से अधिक चीनी पटाखों की अवैध खेप पकड़ी जा चुकी है। यह दिखाता है कि तस्करों ने एक संगठित नेटवर्क के तहत लंबे समय से इस अवैध व्यापार को संचालित किया हुआ था।
DRI की टीमों ने अलग-अलग गोदामों और कंटेनर फ्रेट स्टेशनों पर निगरानी बढ़ाकर इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया।
गिरफ्तारी और अंदरूनी मिलीभगत
इस पूरे मामले में कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) का कर्मचारी भी शामिल है, जिस पर आरोप है कि उसने अवैध माल की आवाजाही में मदद की।
अधिकारियों का मानना है कि बिना अंदरूनी सहयोग के इतनी बड़ी मात्रा में अवैध सामान को सिस्टम से बाहर निकालना संभव नहीं था।
आयात नियम और कानूनी स्थिति
भारत में पटाखों का आयात “Restricted Category” में आता है। इसके लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
बिना अनुमति पटाखों का आयात न केवल अवैध है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।
तस्करी का तरीका: कैसे छिपाया गया अवैध माल
इस नेटवर्क ने तस्करी के लिए कई चालाक तरीके अपनाए—
- कंटेनरों में पटाखों को वैध सामान के पीछे छिपाया गया
- झूठे कागजातों में माल को सामान्य वस्तुओं के रूप में घोषित किया गया
- कुछ मामलों में कंटेनरों को CFS से अनधिकृत रूप से बाहर निकालकर माल को बदला गया
- बाद में उन्हीं कंटेनरों में दूसरा सामान भरकर उन्हें फिर से भेज दिया गया
यह पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित और संगठित तरीके से चलाया जा रहा था।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
इस तरह की तस्करी से कई स्तरों पर नुकसान होता है—
1. घरेलू उद्योग पर असर
भारतीय पटाखा उद्योग को सस्ते और अवैध आयात से भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे स्थानीय निर्माताओं को नुकसान होता है।
2. सरकारी राजस्व में कमी
बिना शुल्क और टैक्स के आयात होने से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।
3. सुरक्षा खतरा
अवैध पटाखों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिससे भंडारण और उपयोग के दौरान बड़े हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष
DRI की यह कार्रवाई अवैध व्यापार नेटवर्क के खिलाफ एक मजबूत संदेश है कि देश में नियमों को तोड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। यह अभियान न केवल तस्करी पर लगाम लगाने में सफल रहा है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, उद्योग संरक्षण और नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
