कीव-पेचेर्स्क लावरा की 975वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति जेलेंस्की ने किया सम्मान, संस्कृति और विरासत बचाने वालों को राज्य पुरस्कार

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कीव। यूक्रेन की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक स्थल कीव-पेचेर्स्क लावरा की 975वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने उन लोगों को राज्य पुरस्कार प्रदान किए, जो देश की ऐतिहासिक धरोहर, संस्कृति और धार्मिक स्थलों के संरक्षण में लगातार योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने 15 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से इस कार्यक्रम की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, सम्मान पाने वालों में कीव-पेचेर्स्क लावरा के राष्ट्रीय संरक्षण संस्थान के कर्मचारी, सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि तथा संरक्षण और धर्मार्थ गतिविधियों में योगदान देने वाले लोग शामिल रहे।

जेलेंस्की ने अपने संदेश में उन सभी लोगों के प्रति आभार जताया, जो यूक्रेनी विरासत को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी देश की पहचान केवल उसकी वर्तमान उपलब्धियों से नहीं बनती, बल्कि उसके इतिहास, संस्कृति, स्मारकों और परंपराओं से भी जुड़ी होती है। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

975 साल पुरानी विरासत का प्रतीक है कीव-पेचेर्स्क लावरा

कीव-पेचेर्स्क लावरा यूक्रेन के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक परिसरों में से एक है। यह कीव शहर में स्थित है और सदियों से धार्मिक जीवन, कला, वास्तुकला तथा सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसकी पहचान यहां मौजूद प्राचीन गुफाओं, धार्मिक इमारतों, मठ परिसर और ऐतिहासिक वास्तुकला से होती है।

लावरा का इतिहास 11वीं सदी तक जाता है। इसी वजह से इसकी 975वीं वर्षगांठ यूक्रेन के लिए केवल एक सामान्य स्मृति दिवस नहीं, बल्कि लंबे ऐतिहासिक सफर को याद करने का अवसर भी है। सदियों के दौरान इस परिसर ने अनेक राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक बदलाव देखे हैं। इसके बावजूद यह यूक्रेन की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बना हुआ है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की द्वारा वर्षगांठ के अवसर पर संरक्षण कार्यों में लगे लोगों को सम्मानित करना इसी व्यापक ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है।

संरक्षण कर्मचारियों को मिला सम्मान

राष्ट्रपति के सोशल मीडिया संदेश के मुताबिक, कार्यक्रम में नेशनल प्रिजर्व “कीव-पेचेर्स्क लावरा” के कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। किसी ऐतिहासिक परिसर को सुरक्षित रखना आसान काम नहीं होता। पुरानी इमारतों की देखभाल, कलात्मक संरचनाओं का संरक्षण, ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा और परिसर की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण में विशेषज्ञों, वास्तुकारों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। छोटी-सी लापरवाही भी सदियों पुरानी विरासत को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सार्वजनिक सम्मान देना उनके योगदान को सामने लाने का एक माध्यम माना जा सकता है।

सांस्कृतिक क्षेत्र के लोगों की भी भागीदारी

इस कार्यक्रम में केवल लावरा से जुड़े कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों को भी सम्मान दिया गया। यह इस बात का संकेत है कि ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा को व्यापक सांस्कृतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

किसी देश की संस्कृति में उसके स्मारक, साहित्य, संगीत, कला, धार्मिक परंपराएं और ऐतिहासिक स्थान एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण होता है, तो नई पीढ़ी को अपने अतीत को समझने का अवसर भी मिलता है।

यूक्रेन पिछले कुछ वर्षों से गंभीर राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों से गुजर रहा है। ऐसे समय में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। संघर्ष की परिस्थितियों में कई ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जाती रही है।

जेलेंस्की ने जताया आभार

अपने संदेश में जेलेंस्की ने उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जो यूक्रेनी विरासत को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यूक्रेन के इतिहास और संस्कृति को केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि दुनिया के सामने भी सम्मान के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति का संदेश मूल रूप से इस विचार पर केंद्रित रहा कि सांस्कृतिक विरासत किसी देश की पहचान का हिस्सा होती है। जब कोई समाज अपने इतिहास और परंपराओं को संरक्षित करता है, तो वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी अपनी पहचान सुरक्षित रखता है।

युद्ध के दौर में विरासत संरक्षण की चुनौती

यूक्रेन के लिए सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण ऐसे समय में हो रहा है, जब देश लंबे समय से युद्ध की परिस्थितियों का सामना कर रहा है। युद्ध के दौरान ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक स्थलों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके लिए दस्तावेजीकरण, विशेषज्ञ निगरानी, आपातकालीन संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

कीव-पेचेर्स्क लावरा जैसे स्थलों का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं है। ये स्थान इतिहास, वास्तुकला, कला और पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा का प्रभाव व्यापक सांस्कृतिक क्षेत्र पर पड़ता है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत बचाने का संदेश

975वीं वर्षगांठ का आयोजन एक ऐतिहासिक स्थल के लंबे सफर को याद करने के साथ-साथ भविष्य की जिम्मेदारियों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। लगभग एक हजार वर्षों के इतिहास से जुड़े किसी स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यही होती है कि वह कई पीढ़ियों की स्मृतियों को अपने भीतर समेटे रहता है।

आज के दौर में डिजिटल तकनीक के कारण ऐतिहासिक दस्तावेजों और कलाकृतियों को रिकॉर्ड करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। लेकिन किसी प्राचीन इमारत की वास्तविक संरचना, वास्तुशिल्प और उससे जुड़ी परंपराओं को बचाने के लिए जमीन पर लगातार संरक्षण कार्य आवश्यक है।

यूक्रेन की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा अवसर

कीव-पेचेर्स्क लावरा की 975वीं वर्षगांठ यूक्रेन के लिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने का अवसर भी है। राष्ट्रपति जेलेंस्की का संदेश इसी दिशा में दिखाई देता है, जिसमें उन्होंने यूक्रेन के इतिहास और संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने वाले लोगों की सराहना की।

इस अवसर पर दिए गए राज्य पुरस्कार उन कर्मचारियों और संगठनों के योगदान को सार्वजनिक पहचान देते हैं, जो अक्सर पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं। ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा में ऐसे लोगों की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम की।

निष्कर्ष

कीव-पेचेर्स्क लावरा की 975वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की द्वारा संरक्षण और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मानित करना यूक्रेन की ऐतिहासिक विरासत के महत्व को रेखांकित करता है। इस अवसर ने यह संदेश दिया कि किसी भी राष्ट्र के लिए उसका अतीत केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसके स्मारकों, परंपराओं और सांस्कृतिक संस्थानों में भी जीवित रहता है।

लावरा की लगभग एक हजार वर्ष पुरानी यात्रा यूक्रेन के इतिहास के कई अध्यायों की गवाह रही है। ऐसे में इसकी देखभाल करने वाले लोगों को सम्मान देना आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत बचाने की प्रतिबद्धता को सामने लाता है। युद्ध और बदलती परिस्थितियों के बीच यूक्रेन के लिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसी चुनौती के बीच संरक्षण से जुड़े लोगों का योगदान और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

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