यूरोप में भीषण जंगल की आग का खतरा बढ़ा, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जताई चिंता; सैटेलाइट निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मदद तेज

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नई दिल्ली/ब्रसेल्स। यूरोप इस समय जंगलों में लगने वाली भीषण आग के बढ़ते खतरे से जूझ रहा है। गर्मी, लंबे समय से जारी सूखे और शुष्क मौसम ने कई इलाकों में आग के जोखिम को गंभीर बना दिया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 15 अगस्त को सोशल मीडिया पर यूरोप में बढ़ते वाइल्डफायर अलर्ट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि यूरोप का Copernicus सैटेलाइट सिस्टम प्रभावित इलाकों की मैपिंग में सहायता कर रहा है, जबकि यूरोप का Emergency Response Coordination Centre (ERCC) महाद्वीप के अलग-अलग हिस्सों में आग की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।

वॉन डेर लेयेन के संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब किसी देश की अपनी आपदा-प्रबंधन क्षमता पर दबाव बढ़ता है, तब EU Civil Protection Mechanism के माध्यम से यूरोपीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। यह व्यवस्था आग से निपटने के लिए दमकलकर्मियों, विमानों, हेलीकॉप्टरों और विशेषज्ञ सहायता को प्रभावित देश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गर्मी और सूखे ने बढ़ाई जंगल की आग की आशंका

यूरोप में जंगल की आग का खतरा नया नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके स्वरूप और तीव्रता को लेकर चिंता बढ़ी है। यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र के अनुसार, 2026 में यूरोप के बड़े हिस्से में वसंत से ही सूखे की स्थिति बनी हुई है। अगस्त के मध्य तक कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्म और शुष्क परिस्थितियां बनी रहीं तथा आने वाले समय में भी गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम का जोखिम बताया गया है।

ऐसे मौसम में जंगलों और घास वाले इलाकों में नमी कम हो जाती है। तेज हवाओं के साथ आग तेजी से फैल सकती है और कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है। यूरोपीय आयोग भी लंबे समय तक सूखे और प्रतिकूल मौसम को जंगलों में आग के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में गिनाता है।

Copernicus बन रहा है महत्वपूर्ण निगरानी तंत्र

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने संदेश में विशेष रूप से Copernicus की भूमिका का उल्लेख किया। यह यूरोपीय संघ का पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम है, जिसके जरिए उपग्रहों और अन्य स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल पर्यावरण और आपदा संबंधी स्थितियों को समझने में किया जाता है।

जंगल की आग के मामलों में Copernicus Emergency Management Service प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग में मदद करता है। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों को यह समझने में सहायता मिलती है कि आग कहां तक पहुंच चुकी है, किन इलाकों पर अधिक खतरा है और राहत एवं बचाव कार्यों की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए। यूरोपीय संघ के दस्तावेजों के मुताबिक, यह सेवा जंगल की आग, बाढ़ और सूखे जैसे खतरों की निगरानी तथा प्रतिक्रिया के लिए भौगोलिक जानकारी उपलब्ध कराती है।

इस तरह आधुनिक सैटेलाइट तकनीक अब केवल मौसम की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

Emergency Centre की 24 घंटे निगरानी

यूरोपीय संघ की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था में Emergency Response Coordination Centre यानी ERCC केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह केंद्र विभिन्न आपात स्थितियों की निगरानी करता है और जरूरत पड़ने पर सदस्य देशों तथा संबंधित संस्थाओं के बीच सहायता के समन्वय में मदद करता है।

जंगल की आग जैसी तेजी से बदलने वाली आपदा में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। आग की दिशा, हवा की गति, प्रभावित आबादी और उपलब्ध दमकल संसाधनों की जानकारी के आधार पर तेजी से निर्णय लेने की जरूरत होती है। ERCC इसी तरह की सूचनाओं को समन्वित करने और जरूरत पड़ने पर यूरोपीय सहायता जुटाने में मदद करता है।

कई देशों में बढ़ा दबाव

वॉन डेर लेयेन के सोशल मीडिया संदेश में कई यूरोपीय देशों का उल्लेख किया गया है, जहां जंगल की आग की स्थिति पर निगरानी और मैपिंग सहायता जारी है। यह संकेत देता है कि आग का खतरा किसी एक देश या सीमित क्षेत्र तक नहीं है, बल्कि यूरोप के कई हिस्सों में एक साथ चुनौती पैदा कर रहा है।

इस साल यूरोपीय संघ पहले ही जंगल की आग से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे चुका है। जून 2026 में यूरोपीय आयोग ने कहा था कि बढ़ते जोखिम को देखते हुए 2026 की गर्मियों के लिए रिकॉर्ड संख्या में दमकलकर्मियों, विमानों और आपात विशेषज्ञों की तैनाती तथा समन्वय की तैयारी की जा रही है।

फ्रांस और स्पेन में पहले ही सक्रिय हुई यूरोपीय मदद

जुलाई 2026 में फ्रांस और स्पेन में जंगल की आग ने बड़े पैमाने पर संकट पैदा किया था। यूरोपीय संघ ने दोनों देशों के लिए Civil Protection Mechanism के तहत सहायता उपलब्ध कराई। यूरोपीय आयोग के अनुसार, इन घटनाओं के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा और यूरोपीय स्तर पर अतिरिक्त संसाधन जुटाए गए।

फ्रांस के प्रभावित क्षेत्रों में यूरोपीय अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन दलों के साथ मिलकर स्थिति का जायजा भी लिया। इससे यह स्पष्ट है कि मौजूदा आग का संकट केवल स्थानीय प्रशासन की चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि सीमा पार सहयोग की आवश्यकता भी बढ़ रही है।

2025 का रिकॉर्ड भी चिंता बढ़ाता है

यूरोप के सामने मौजूदा संकट की गंभीरता समझने के लिए पिछले वर्ष के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र के अनुसार, 2025 का जंगल की आग का मौसम यूरोपीय संघ के लिए रिकॉर्ड स्तर पर सबसे विनाशकारी रहा। उपग्रह आधारित विश्लेषण के मुताबिक, यूरोपीय संघ में करीब 10.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ था।

इस रिकॉर्ड ने यूरोपीय देशों को आग की रोकथाम, शुरुआती चेतावनी और संयुक्त आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में और अधिक सक्रिय किया है।

सिर्फ आग बुझाना नहीं, रोकथाम भी जरूरी

विशेषज्ञों के लिए जंगल की आग से निपटने का मतलब केवल आग बुझाना नहीं है। जंगलों की निगरानी, सूखे इलाकों की पहचान, शुरुआती चेतावनी, स्थानीय प्रशासन की तैयारी और नागरिकों को समय पर सूचना देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जलवायु परिस्थितियों में बदलाव के कारण लंबे समय तक गर्मी और सूखे की घटनाएं कई क्षेत्रों में जंगलों को अधिक संवेदनशील बना सकती हैं। ऐसे में जंगलों के प्रबंधन, पानी की उपलब्धता, आग की शुरुआती पहचान और जोखिम वाले क्षेत्रों में पूर्व तैयारी पर लगातार निवेश जरूरी होगा।

यूरोप के लिए सीमा पार सहयोग बना बड़ी जरूरत

जंगल की आग राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानती। एक देश में शुरू हुई आग तेज हवाओं के कारण दूसरे क्षेत्र तक फैल सकती है। यही वजह है कि यूरोपीय संघ ने Civil Protection Mechanism जैसी व्यवस्था विकसित की है। इसके तहत जरूरत पड़ने पर सदस्य देशों और भागीदार देशों से संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

इस व्यवस्था में अग्निशमन विमान, हेलीकॉप्टर, जमीन पर काम करने वाली टीमें, उपकरण और विशेषज्ञता जैसी क्षमताओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसी एक देश की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता पर अत्यधिक दबाव पड़ने की स्थिति में अतिरिक्त सहायता मिल सकती है।

आगे की चुनौती क्या?

अगस्त के मध्य में यूरोप के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गर्म और शुष्क मौसम के बीच आग की घटनाओं को तेजी से पहचानकर नियंत्रित किया जाए। यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र ने भी सूखे और गर्म परिस्थितियों के कारण आने वाले समय में आग के जोखिम को लेकर चेतावनी दी है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन का संदेश इसी व्यापक चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करता है। उनका जोर इस बात पर है कि यूरोप आधुनिक सैटेलाइट निगरानी, आपातकालीन समन्वय और आपसी सहयोग के जरिए प्रभावित देशों को सहायता देता रहेगा।

निष्कर्ष

यूरोप में जंगल की आग का बढ़ता खतरा अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है। यह जनसुरक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यटन, कृषि और आपदा प्रबंधन से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुका है। Copernicus जैसी सैटेलाइट तकनीक आग की निगरानी और मैपिंग में मदद कर रही है, जबकि ERCC और EU Civil Protection Mechanism जरूरत पड़ने पर यूरोपीय देशों के बीच सहायता का समन्वय कर रहे हैं।

2025 के रिकॉर्ड नुकसान और 2026 में लगातार बने सूखे-गर्मी के दबाव ने यह संकेत दिया है कि यूरोप को जंगल की आग से निपटने के लिए केवल आपात प्रतिक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय रोकथाम, शुरुआती चेतावनी, वैज्ञानिक निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना होगा। आने वाले वर्षों में यही रणनीति यूरोप को बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के सामने अधिक सुरक्षित और तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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