लिकुड प्राइमरी से पहले नेतन्याहू का संदेश, आइसेनकोट और यायर गोलान को लेकर सियासी मुकाबला तेज

इजरायल की राजनीति में आगामी चुनावों से पहले सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के भीतर होने वाली प्राथमिक चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लिकुड सदस्यों से अपनी पसंद और राजनीतिक समझ के आधार पर ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करने की अपील की है, जो भविष्य में पार्टी और सरकार की दिशा को मजबूत कर सकें। नेतन्याहू के संदेश में मुख्य रूप से इस आशंका को सामने रखा गया है कि विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट और यायर गोलान अरब दलों के समर्थन से एक सीमित गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि वह अगले दिन लिकुड की प्राथमिक चुनाव प्रक्रिया में मतदान करेंगे और ऐसी सूची के समर्थन में मतदान करना चाहते हैं, जो उनके अनुसार आइसेनकोट और गोलान को अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने से रोकने में सक्षम हो। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पार्टी की राष्ट्रीय सूची में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं और अंतिम निर्णय लिकुड सदस्यों की अपनी समझ तथा विवेक पर छोड़ते हैं।
लिकुड के भीतर महत्वपूर्ण चरण
लिकुड इजरायल की प्रमुख दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टियों में से एक है और नेतन्याहू लंबे समय से इसके केंद्रीय नेता रहे हैं। ऐसे में पार्टी की आंतरिक प्राथमिक चुनाव प्रक्रिया केवल उम्मीदवारों के चयन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे भविष्य की राजनीतिक रणनीति और चुनावी अभियान की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।
नेतन्याहू का ताजा संदेश इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और सदस्यों को किसी विशेष दबाव के बजाय अपने विवेक से प्रतिनिधियों को चुनने का आह्वान किया है। उनके बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने खुद को राष्ट्रीय सूची के चयन से अलग रखने की बात कही है।
इस संदेश के जरिए नेतन्याहू ने एक ओर पार्टी सदस्यों को स्वतंत्र निर्णय का संकेत दिया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने आगामी चुनाव में संभावित गठबंधन समीकरणों को लेकर अपनी चिंता भी सामने रखी।
आइसेनकोट की बढ़ती राजनीतिक भूमिका
पूर्व इजरायली सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने 2025 में अपनी नई पार्टी ‘याशर!’ की स्थापना की और आगामी चुनावी मुकाबले में प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए प्रमुख राजनीतिक चुनौती के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है।
हाल के विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों में आइसेनकोट की पार्टी को मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दिया है। एक सर्वेक्षण में उनकी पार्टी लिकुड के लगभग बराबर या उससे आगे दिखाई दी, जबकि दूसरे सर्वेक्षणों में भी उन्होंने विपक्षी राजनीति में महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की।
इस राजनीतिक स्थिति ने नेतन्याहू खेमे की चिंता बढ़ाई है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि इजरायल की चुनावी व्यवस्था में सरकार बनाने के लिए केवल सबसे बड़ी पार्टी बनना पर्याप्त नहीं होता। सरकार गठन के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना आवश्यक होता है, जिससे गठबंधन राजनीति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
यायर गोलान भी बने अहम खिलाड़ी
यायर गोलान भी इजरायली विपक्ष की राजनीति में प्रभावशाली नाम हैं। उनका राजनीतिक रुख कई मुद्दों पर नेतन्याहू सरकार से अलग माना जाता है। इसलिए नेतन्याहू द्वारा आइसेनकोट और गोलान का एक साथ उल्लेख करना मौजूदा राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाता है।
नेतन्याहू के बयान का केंद्रीय संदेश यही है कि आगामी चुनाव केवल अलग-अलग पार्टियों के बीच मुकाबला नहीं होगा, बल्कि चुनाव के बाद बनने वाले संभावित गठबंधन भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे। इसी कारण लिकुड की आंतरिक सूची में उम्मीदवारों का चयन भी पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गया है।
अरब पार्टियों के समर्थन का मुद्दा
इजरायल की राजनीति में अरब दलों की भूमिका लंबे समय से एक संवेदनशील राजनीतिक विषय रही है। 2021-22 में नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड के नेतृत्व वाली सरकार को अरब पार्टी राम के समर्थन से बहुमत हासिल हुआ था। आगामी चुनावों को लेकर भी संभावित गठबंधन समीकरणों में अरब दलों की भूमिका पर चर्चा जारी है। हालिया राजनीतिक विश्लेषणों में यह संभावना उठाई गई है कि यदि किसी विपक्षी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो अरब पार्टियां सरकार गठन के समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यही मुद्दा नेतन्याहू के संदेश का राजनीतिक केंद्र बन गया है। उन्होंने लिकुड समर्थकों के सामने संभावित गठबंधन को एक ऐसे राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया है जिसे रोकना उनकी प्राथमिकता है।
हालांकि किसी भी चुनाव से पहले गठबंधन की संभावनाओं को अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता। चुनाव परिणाम, सीटों का वितरण और विभिन्न दलों के फैसले ही यह निर्धारित करेंगे कि अगली सरकार किस स्वरूप में बनेगी।
चुनावी समीकरण में बदलती तस्वीर
2026 के इजरायली चुनाव को लेकर सामने आए सर्वेक्षणों ने राजनीतिक तस्वीर को पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। कुछ सर्वेक्षणों में आइसेनकोट की याशर पार्टी को लिकुड के करीब या आगे दिखाया गया है। एक सर्वेक्षण में लिकुड को 22 और याशर को 21 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, जबकि अन्य दलों के प्रदर्शन के आधार पर किसी भी खेमे को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल होता नहीं दिखा।
इस तरह की स्थिति में छोटी पार्टियों और संभावित गठबंधन सहयोगियों की भूमिका बढ़ जाती है। यही कारण है कि नेतन्याहू का लिकुड के भीतर उम्मीदवारों के चयन पर दिया गया संदेश व्यापक चुनावी रणनीति से जुड़ा माना जा सकता है।
नेतन्याहू ने सदस्यों पर छोड़ा फैसला
नेतन्याहू के बयान की एक खास बात यह भी है कि उन्होंने लिकुड सदस्यों से अपने विवेक के अनुसार मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय सूची में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं और सभी सदस्यों को सफलता की शुभकामनाएं देते हैं।
यह संदेश पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण है। लिकुड जैसी बड़ी राजनीतिक पार्टी में उम्मीदवारों का चयन केवल शीर्ष नेतृत्व का फैसला नहीं होता। पार्टी सदस्यों की पसंद भविष्य में संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाती है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर लिकुड की प्राथमिक चुनाव प्रक्रिया और उसके बाद बनने वाली उम्मीदवार सूची पर रहेगी। इसके बाद राष्ट्रीय चुनाव अभियान और तेज होने की संभावना है। आइसेनकोट की बढ़ती लोकप्रियता, नेतन्याहू के नेतृत्व में लिकुड की स्थिति, यायर गोलान की विपक्षी भूमिका और अरब दलों की संभावित राजनीतिक उपयोगिता—ये सभी मुद्दे आने वाले चुनावी विमर्श में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।
राजनीतिक समीकरणों को लेकर अभी कई संभावनाएं खुली हुई हैं। किसी भी दल या गठबंधन को निश्चित विजेता मानना जल्दबाजी होगी। चुनावी राजनीति में अंतिम फैसला मतदाताओं के वोट और उसके बाद बनने वाले संसदीय गठबंधन ही करेंगे।
कुल मिलाकर, नेतन्याहू का ताजा संदेश लिकुड की आंतरिक राजनीति से आगे बढ़कर इजरायल के आगामी चुनावी संघर्ष की व्यापक तस्वीर को सामने रखता है। एक तरफ नेतन्याहू अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आइसेनकोट और अन्य विपक्षी नेताओं के सामने सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन जुटाने की चुनौती है। ऐसे में लिकुड प्राइमरी का परिणाम आने वाले चुनावी अभियान की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक साबित हो सकता है।