ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: निवेश और औद्योगिक विकास का नया मंच
ग्रेटर नोएडा, 26 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश संभावनाओं और निर्यात क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण आयोजित किया गया। इस आयोजन में दुनिया के 85 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और कारोबारियों की भागीदारी ने उत्तर प्रदेश के बढ़ते औद्योगिक महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ।

ट्रेड शो केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों, औद्योगिक नीतियों और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे को समझने के एक बड़े मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया। आयोजन के जरिए राज्य सरकार ने विदेशी और घरेलू निवेशकों को उत्तर प्रदेश में कारोबार स्थापित करने के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने पर विशेष जोर दिया।
Invest UP के जरिए निवेश को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश आकर्षित करने की रणनीति में Invest UP को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। यह पहल संभावित निवेशकों को राज्य में उद्योग लगाने, परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थान तलाशने और विभिन्न सरकारी सुविधाओं तथा नीतिगत प्रोत्साहनों की जानकारी उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की सुविधा मिले और परियोजनाओं को स्थापित करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सके। ट्रेड शो में इसी निवेश तंत्र को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के उदाहरणों के साथ प्रदर्शित किया गया।
फार्मास्यूटिकल और केमिकल उद्योग में बड़ा आधार
उत्तर प्रदेश में फार्मास्यूटिकल और केमिकल क्षेत्र को भी निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया। प्रस्तुति के अनुसार राज्य में इस क्षेत्र से जुड़ी 600 से अधिक विनिर्माण इकाइयां मौजूद हैं। इनमें Mankind, Torrent और Zydus जैसी प्रमुख कंपनियों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया।
फार्मा और केमिकल उद्योग के विस्तार से उत्पादन क्षमता के साथ-साथ सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना रहती है। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक निवेश के लिए तैयार की गई नीतियों में ऐसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की दिशा में विभिन्न प्रावधानों को भी रेखांकित किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास की प्रमुख तस्वीरों में से एक है। ट्रेड शो में प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक भारत में बनने वाले मोबाइल कंपोनेंट्स में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत बताई गई। राज्य में Samsung, Oppo और Vivo जैसी कंपनियों की मौजूदगी ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूती देने में योगदान दिया है।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के साथ कंपोनेंट सप्लाई, असेंबली, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी सहायक गतिविधियां भी औद्योगिक नेटवर्क का हिस्सा बनती हैं। इससे राज्य में बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
कालीन और टेक्सटाइल उद्योग की पहचान
उत्तर प्रदेश का टेक्सटाइल और कालीन उद्योग भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में राज्य की पहचान से जुड़ा हुआ है। ट्रेड शो में प्रस्तुत विवरण के अनुसार देश के कालीन उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 90 प्रतिशत तक बताया गया।
इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से पूंजीगत निवेश और ब्याज से संबंधित प्रोत्साहनों का उल्लेख किया गया। प्रस्तुति के अनुसार कुछ पात्र परियोजनाओं को 35 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी और 60 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन उपलब्ध हो सकते हैं।
कालीन और टेक्सटाइल क्षेत्र की खासियत यह है कि इसमें बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ बड़ी संख्या में कारीगर, छोटे कारोबारी और निर्यातक भी जुड़े होते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में निवेश और बाजार विस्तार का असर स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र पर जोर
उत्तर प्रदेश में ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को भी तेजी से विकसित करने की कोशिश की जा रही है। ट्रेड शो में Tata, Ashok Leyland और Hero जैसे प्रमुख निवेशकों की रुचि और उपस्थिति का उल्लेख किया गया।
इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार के साथ बैटरी, चार्जिंग नेटवर्क, वाहन निर्माण, कंपोनेंट और तकनीकी सेवाओं से जुड़े नए कारोबारी अवसर विकसित हो रहे हैं। राज्य में ईवी से जुड़े निवेश को आकर्षित करने की कोशिशों को औद्योगिक विकास और स्वच्छ परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
निवेशकों के लिए नीतिगत प्रोत्साहन
ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। प्रस्तुति के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों और पात्र परियोजनाओं के लिए 20 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रावधान उपलब्ध हो सकते हैं।
इसके अलावा विकास प्राधिकरणों द्वारा आवंटित भूमि पर स्थापित होने वाली पात्र औद्योगिक इकाइयों के लिए 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी का भी उल्लेख किया गया। वास्तविक लाभ परियोजना, क्षेत्र, निवेश की प्रकृति और संबंधित नीति की पात्रता शर्तों पर निर्भर करता है।
इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य उद्योगों के लिए शुरुआती निवेश लागत को कम करना और राज्य में नई परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करना है।
ग्रीन हाइड्रोजन से सेमीकंडक्टर तक नए क्षेत्र
चौथे इंटरनेशनल ट्रेड शो की एक खास विशेषता इसका डिजिटल निवेश प्रस्तुतीकरण भी रहा। यहां निवेशकों को केवल पारंपरिक उद्योगों की जानकारी देने के बजाय भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का डिजिटल स्वरूप में प्रदर्शन किया गया।
ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC जैसे क्षेत्रों को निवेश के नए संभावित केंद्रों के रूप में प्रदर्शित किया गया। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से निवेशकों को अलग-अलग क्षेत्रों के औद्योगिक परिदृश्य, संभावित परियोजनाओं और कारोबारी अवसरों को समझने की सुविधा देने की कोशिश की गई।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र विशेष रूप से रणनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल उपकरणों, ऑटोमोबाइल और कई डिजिटल तकनीकों के लिए चिप निर्माण और संबंधित सप्लाई चेन महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह GCC के जरिए वैश्विक कंपनियों के तकनीकी, वित्तीय, अनुसंधान और अन्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश को संभावित केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से बढ़ा दायरा
85 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने ट्रेड शो को घरेलू निवेश से आगे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कारोबारी साझेदारी के मंच के रूप में स्थापित किया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों और निर्यातकों को विदेशी खरीदारों तथा निवेशकों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है।
उत्तर प्रदेश के लिए यह मंच कृषि आधारित उद्योगों, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों की क्षमता को एक साथ प्रदर्शित करने का माध्यम बना। इससे राज्य के अलग-अलग औद्योगिक क्लस्टरों और निवेश क्षेत्रों को एक साझा अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने की तस्वीर सामने आई।
औद्योगिक विकास की व्यापक रणनीति
चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो की प्रस्तुतियों से स्पष्ट होता है कि राज्य की निवेश रणनीति पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई तकनीकों और भविष्य के उद्योगों को भी शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे स्थापित क्षेत्रों के साथ सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और GCC जैसे नए क्षेत्रों पर जोर दिया जा रहा है।
Invest UP के माध्यम से निवेशकों को नीतियों, औद्योगिक क्षेत्रों और उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश इस रणनीति का अहम हिस्सा है। ट्रेड शो ने उत्तर प्रदेश को एक ऐसे औद्योगिक गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां विनिर्माण, निर्यात, तकनीक और निवेश के विभिन्न अवसरों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को देश और विदेश के कारोबारी समुदाय के सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच बना। इसकी प्रस्तुतियों में राज्य के मौजूदा औद्योगिक आधार के साथ भविष्य के निवेश क्षेत्रों की संभावनाओं को भी प्रमुखता दी गई।