शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, Sensex 315 अंक चढ़ा; Nifty 23,140 के पार
मुंबई, 25 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को कुछ राहत की सांस ली। कारोबार के दौरान निवेशकों की ओर से चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते बीएसई सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 50 भी हरे निशान में रहा और 23,100 के स्तर को पार करते हुए 23,140.50 पर पहुंच गया। हालांकि, दिन की तेजी के बावजूद बाजार की व्यापक तस्वीर पूरी तरह मजबूत नहीं हुई, क्योंकि सप्ताह के स्तर पर दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए।

सेंसेक्स में 315 अंकों की बढ़त
शुक्रवार के कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत बढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। ऐसे में शुक्रवार की तेजी को बाजार में आंशिक सुधार के रूप में देखा गया।
निफ्टी 50 भी 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निवेशकों ने कुछ प्रमुख ऑटो, रियल्टी, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में दिलचस्पी दिखाई।
पिछले सत्र की गिरावट के बाद आया सुधार
गुरुवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद शुक्रवार को शुरुआती कारोबार से ही बाजार में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे। हालांकि सुबह के शुरुआती चरण में तेजी सीमित रही और कुछ समय के लिए प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव भी देखा गया।
बाजार के लिए गुरुवार की गिरावट का असर महत्वपूर्ण था। ऊंचे कच्चे तेल के दाम, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया था। शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से सूचकांकों को सहारा मिला।
इन शेयरों में दिखी मजबूती
शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स के कई प्रमुख शेयरों में तेजी रही। रिपोर्टों के अनुसार Axis Bank, Mahindra & Mahindra, Asian Paints, Bajaj Finance और HCLTech जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर Adani Ports, NTPC, Bajaj Finserv, Bharti Airtel और Eternal जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे।
इससे संकेत मिला कि बाजार में खरीदारी सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं थी। निवेशकों ने कुछ खास कंपनियों और क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि दूसरी ओर कुछ शेयरों में मुनाफावसूली या बिकवाली जारी रही।
ऑटो और रियल्टी शेयरों को मिला सहारा
शुक्रवार को ऑटो और रियल्टी से जुड़े शेयरों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कुछ वित्तीय शेयरों में भी खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया।
हालांकि आईटी और फार्मा से जुड़े शेयरों में अपेक्षाकृत कमजोरी ने बाजार की तेजी को सीमित रखा। इस तरह शुक्रवार का कारोबार पूरी तरह व्यापक तेजी वाला नहीं रहा, बल्कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चिंता
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें इस समय महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
25 सितंबर को बाजार की चाल पर भी कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव दिखाई दिया। रिपोर्टों के अनुसार तेल की ऊंची कीमतों को लेकर निवेशकों की चिंता बनी रही। इससे बाजार में तेजी आने के बावजूद सतर्कता का माहौल कायम रहा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी नजर
भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती से वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित परिसंपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इसका असर उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।
25 सितंबर के कारोबार से जुड़े विश्लेषणों में भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल को बाजार के लिए प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया गया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव
भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। 24 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की थी। इस भारी बिकवाली का असर बाजार पर दिखाई दिया था।
शुक्रवार को बाजार में सुधार जरूर आया, लेकिन विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए निवेशकों की सावधानी बनी रही।
लगातार सातवें सप्ताह गिरावट
शुक्रवार की तेजी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इससे साप्ताहिक स्तर पर बाजार की गिरावट का सिलसिला नहीं टूट पाया। निफ्टी 50 लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के अनुसार यह छह वर्षों में निफ्टी की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला रही। सप्ताह के दौरान निफ्टी में करीब 0.9 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
इससे स्पष्ट होता है कि शुक्रवार की तेजी को तत्काल सुधार के तौर पर देखा गया, जबकि व्यापक बाजार धारणा पर अभी भी कई बाहरी और घरेलू कारकों का प्रभाव बना हुआ है।
बाजार के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक बाजारों के रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इसके साथ ही कंपनियों के प्रदर्शन और घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
निफ्टी के लिए 23,100 के आसपास का स्तर शुक्रवार के कारोबार में महत्वपूर्ण रहा। हालांकि केवल एक कारोबारी दिन की तेजी से बाजार की दीर्घकालिक दिशा तय नहीं की जा सकती। निवेशकों के लिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार के संकेतों को साथ देखकर स्थिति समझना महत्वपूर्ण रहेगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
25 सितंबर का कारोबार यह दिखाता है कि बड़ी गिरावट के बाद बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी की संभावना बनी हुई है। लेकिन दूसरी ओर, लगातार सात सप्ताह की साप्ताहिक गिरावट और ऊंचे तेल दाम जैसी चुनौतियां बताती हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव अभी बना रह सकता है।
सेंसेक्स का 315 अंक चढ़कर 73,895.74 पर बंद होना और निफ्टी का 23,140.50 पर पहुंचना निश्चित रूप से शुक्रवार के सत्र की प्रमुख खबर रही। फिर भी बाजार की आगे की दिशा कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, 25 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की भारी बिकवाली के बाद सुधार देखने को मिला। सेंसेक्स ने 300 अंकों से अधिक की बढ़त दर्ज की और निफ्टी ने भी मजबूती दिखाई। हालांकि साप्ताहिक आधार पर गिरावट का सिलसिला जारी रहा। इसलिए शुक्रवार की तेजी को बाजार में तत्काल राहत के रूप में देखा जा सकता है, जबकि आगे के कारोबार में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल और विदेशी पूंजी के प्रवाह की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।