ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: जालौन में तीन गंभीर मामलों में दोषियों को सजा, दो को उम्रकैद

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन, 24 सितंबर। गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत जालौन पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल, संबंधित थानों के कोर्ट पैरोकारों और अभियोजन अधिकारियों की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप उरई स्थित विभिन्न न्यायालयों ने तीन अलग-अलग मामलों में अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए कठोर दंड सुनाया है। इन तीन मामलों में दो दोषियों को आजीवन कारावास और एक दोषी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई है।

पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में मुकदमों की लगातार निगरानी, न्यायालय में आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत कराने में समन्वय तथा अभियोजन पक्ष की पैरवी को प्रभावी बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। न्यायालय के फैसलों के बाद पुलिस ने इसे गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने की दिशा में अहम उपलब्धि बताया है।

रामपुरा के पॉक्सो मामले में आरोपी को उम्रकैद

पहला मामला थाना रामपुरा क्षेत्र से संबंधित है। मुकदमा अपराध संख्या 53/2022 में अभियुक्त अनुज पुत्र इच्छाशंकर चन्सौलिया, निवासी ग्राम पचोखरा के खिलाफ नाबालिग से संबंधित गंभीर अपराध का मामला दर्ज किया गया था।

अभियोजन के अनुसार, मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376, पॉक्सो अधिनियम की धारा 5j/6 तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)5 के तहत कार्रवाई की गई थी।

मामले की सुनवाई उरई स्थित एडीजे/पॉक्सो न्यायालय में हुई। उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी माना। अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा के साथ 48 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।

यह फैसला बच्चों के विरुद्ध गंभीर अपराधों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषसिद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उरई में हत्या के मामले में भी उम्रकैद

दूसरा मामला कोतवाली उरई से जुड़ा है। मुकदमा अपराध संख्या 353/2020 में अभियुक्त नरेन्द्र यादव पुत्र वीरसिंह, निवासी नया रामनगर, अजनारी रोड, उरई को हत्या सहित कई गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा।

मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 324, 504, 506 और 34 के साथ एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले की सुनवाई एडीजे/एससी-एसटी कोर्ट, उरई में हुई। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की सुनवाई के बाद नरेन्द्र यादव को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 53 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

हत्या और जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े इस मामले में आया फैसला ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस की न्यायालयीन पैरवी के महत्व को रेखांकित करता है।

दहेज हत्या के मामले में 10 साल का सश्रम कारावास

तीसरा मामला थाना आटा क्षेत्र से संबंधित है। मुकदमा अपराध संख्या 189/2023 में अभियुक्त राजेन्द्र प्रसाद उर्फ लल्ला पुत्र कालका प्रसाद, निवासी ग्राम भदरेखी के खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 498ए, 304बी और 316 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत कार्रवाई हुई थी।

मामले की सुनवाई एडीजे/एफटीसी/सीडब्ल्यू कोर्ट, उरई में हुई। न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

दहेज से जुड़े अपराधों में दोषसिद्धि का यह फैसला भी पुलिस और अभियोजन की संयुक्त पैरवी के परिणाम के रूप में सामने आया है।

मॉनिटरिंग सेल की भूमिका रही अहम

जालौन पुलिस के अनुसार, इन सभी मामलों में केवल मुकदमा दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि न्यायालय में मामले की प्रगति पर लगातार नजर रखी गई। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल ने संबंधित मामलों की पैरवी की स्थिति की निगरानी की और थानों के कोर्ट पैरोकारों तथा अभियोजन अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखा।

मॉनिटरिंग सेल प्रभारी प्र0नि0 परमहंस तिवारी तथा संबंधित न्यायालयों में तैनात कोर्ट पैरोकारों की ओर से की गई पैरवी को पुलिस ने इन फैसलों में महत्वपूर्ण बताया है। अभियोजन पक्ष की ओर से भी न्यायालय के समक्ष मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

पुलिस का कहना है कि गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के बाद न्यायालयीन प्रक्रिया भी मजबूत तरीके से आगे बढ़े और दोष सिद्ध होने पर अदालत से विधि के अनुसार दंड मिले।

तीन मामलों में तीन दोषी, दो को मिली उम्रकैद

इन तीन मामलों के न्यायालयीन परिणामों पर नजर डालें तो कुल तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया। इनमें रामपुरा के पॉक्सो-एससी/एसटी मामले में अनुज को उम्रकैद और 48 हजार रुपये अर्थदंड, उरई के हत्या मामले में नरेन्द्र यादव को उम्रकैद और 53 हजार रुपये अर्थदंड तथा आटा के दहेज हत्या मामले में राजेन्द्र प्रसाद उर्फ लल्ला को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 13 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

इस प्रकार तीनों मामलों में न्यायालय द्वारा अलग-अलग परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर दंड निर्धारित किया गया।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पैरवी पर जोर

पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन का एक प्रमुख उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों में जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में प्रभावी पैरवी और केस की लगातार निगरानी करना है। इसके तहत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को मुकदमों की प्रगति पर नजर रखने, अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय करने और न्यायालयीन प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है।

जालौन में सामने आए इन तीन फैसलों से यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध की जांच और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि न्यायालय में मुकदमे के परिणाम तक उसकी निगरानी महत्वपूर्ण हो सकती है।

पॉक्सो, हत्या और दहेज हत्या जैसे गंभीर मामलों में आए इन फैसलों के बाद जालौन पुलिस ने न्यायालयों में प्रभावी पैरवी को आगे भी जारी रखने की बात कही है। पुलिस के अनुसार, गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर मजबूत पैरवी करते हुए दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

इन फैसलों में अंतिम दंड न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, कानूनी प्रावधानों और सुनवाई के आधार पर निर्धारित किया गया है। पुलिस की ओर से इसे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत न्यायालयीन पैरवी और मॉनिटरिंग की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है।

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