विधायक निधि में 35 प्रतिशत कमीशन के आरोपों की विजिलेंस जांच शुरू, दो विधायकों की भूमिका जांच के घेरे में

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधायक निधि से विकास कार्यों की अनुशंसा को लेकर लगाए गए कथित कमीशन के आरोपों ने अब जांच का रूप ले लिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत में एक मीडिया स्टिंग के आधार पर दो मौजूदा विधायकों पर विकास कार्यों के लिए अनुशंसा-पत्र जारी करने के बदले कथित तौर पर 35 प्रतिशत तक कमीशन मांगने के आरोप लगाए गए हैं।

जिन दो विधायकों की भूमिका शिकायत में उठाई गई है, उनमें महराजगंज सदर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया और आजमगढ़ जिले की मेंहनगर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा सरोज का नाम शामिल है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी जांच का विषय है और विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपलब्ध ऑडियो-वीडियो तथा अन्य सामग्री से आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।

स्टिंग रिपोर्ट के बाद सामने आया मामला

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत एक मीडिया संस्थान की स्टिंग रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पत्रकारों ने विकास कार्यों के लिए विधायक निधि से धन स्वीकृत कराने के उद्देश्य से दोनों विधायकों अथवा उनके प्रतिनिधियों से संपर्क किया। बातचीत के दौरान कथित कमीशन की मांग और अनुशंसा-पत्र से जुड़े लेन-देन का उल्लेख सामने आया।

अमिताभ ठाकुर ने इसी मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत में कथित स्टिंग से संबंधित ऑडियो-वीडियो और अन्य सत्यापन योग्य सामग्री की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई। साथ ही कहा गया कि यदि जांच में अपराध के प्रथमदृष्टया पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं तो नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाए।

महराजगंज विधायक से जुड़े क्या आरोप हैं?

स्टिंग रिपोर्ट के मुताबिक महराजगंज सदर के भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया के मामले में सोलर लाइट से संबंधित एक विकास परियोजना का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि लगभग 10.50 लाख रुपये के प्रस्तावित कार्य के लिए 35 प्रतिशत कमीशन पर कथित बातचीत हुई।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दौर की बातचीत के बाद कथित रूप से कमीशन की राशि को लेकर सहमति बनी और बाद में अनुशंसा-पत्र से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ी। मीडिया रिपोर्ट में नकद राशि दिए जाने का भी दावा किया गया है। एक अन्य व्यक्ति द्वारा कथित रूप से अलग रकम लिए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

इन दावों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यों में विधायक की अनुशंसा प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इसलिए इस प्रक्रिया में किसी तरह के अवैध आर्थिक लेन-देन का आरोप सामने आने पर उसके दस्तावेजी और वित्तीय पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, स्टिंग में सामने आए किसी भी कथित लेन-देन को स्वतः अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। उसकी प्रामाणिकता, संदर्भ और परिस्थितियों का परीक्षण संबंधित जांच एजेंसी को करना होगा।

पूजा सरोज के मामले में भी कथित कमीशन की चर्चा

आजमगढ़ की मेंहनगर विधानसभा सीट से सपा विधायक पूजा सरोज से जुड़े मामले में भी स्टिंग रिपोर्ट में कथित कमीशन की मांग का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान विकास कार्यों के लिए अनुशंसा-पत्र हासिल करने की प्रक्रिया में कमीशन की शर्त से संबंधित बातें सामने आईं।

मीडिया रिपोर्टों में सोलर लाइट और अन्य विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि 35 प्रतिशत कमीशन की बात सामने आई थी। एक रिपोर्ट में लगभग 81 लाख रुपये के विकास कार्यों से संबंधित कई अनुशंसा-पत्रों का भी जिक्र है। विधायक के प्रतिनिधि द्वारा कुछ रकम लिए जाने का आरोप भी रिपोर्ट में लगाया गया है।

यहां भी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बातें स्टिंग रिपोर्ट और उसके आधार पर की गई शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

विजिलेंस ने जांच की प्रक्रिया शुरू की

अमिताभ ठाकुर के अनुसार, उनकी शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान की गोरखपुर इकाई के एक निरीक्षक ने उनसे संपर्क किया और मामले से संबंधित उपलब्ध सामग्री तथा शिकायत के विवरण की जानकारी ली। उन्हें यह भी बताया गया कि प्रकरण में जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगे आवश्यक कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।

अब जांच के दौरान स्टिंग में उपलब्ध रिकॉर्डिंग, बातचीत के संदर्भ, कथित भुगतान, अनुशंसा-पत्रों, संबंधित विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन जैसे पहलुओं का परीक्षण किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड सहित अन्य संबंधित साक्ष्यों का भी सत्यापन किया जा सकता है।

विधायक निधि की प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?

विधायक निधि का उद्देश्य विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों के लिए इस निधि का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे कार्यों में विधायक की अनुशंसा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चरण होती है। इसके बाद संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी प्रस्ताव की जांच तथा स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं। इसलिए यदि किसी अनुशंसा के बदले व्यक्तिगत आर्थिक लाभ लेने का आरोप सामने आता है तो मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी जांच का विषय भी बन सकता है।

इसी वजह से इस मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच से यह पता चल सकता है कि स्टिंग में रिकॉर्ड की गई बातचीत किस संदर्भ में हुई, कथित रकम का वास्तविक लेन-देन हुआ या नहीं और संबंधित अनुशंसा-पत्रों तथा विकास कार्यों के बीच क्या संबंध था।

शिकायत में क्या मांग की गई?

अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में उपलब्ध सामग्री की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है और अपराध के पर्याप्त प्रारंभिक प्रमाण सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायत की एक प्रति उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को भेजे जाने की भी रिपोर्ट है।

इस मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपों की जांच शुरू हो चुकी है। जांच एजेंसी के सामने उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की वास्तविकता तथा विश्वसनीयता की जांच करना अगला चरण होगा।

जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें

विधायक निधि से जुड़े कथित कमीशन प्रकरण ने सरकारी विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को केवल आरोप या स्टिंग रिपोर्ट के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्ष और यदि आवश्यक हुआ तो न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल विजिलेंस जांच शुरू होने के बाद इस मामले में राजनीतिक दलों और संबंधित जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी। यदि जांच के दौरान आरोपों से संबंधित ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के तहत आगे की कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के निष्कर्ष उसी के अनुरूप स्थिति स्पष्ट करेंगे।

इस पूरे मामले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव जांच में सामने आने वाले तथ्य होंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि 35 प्रतिशत कथित कमीशन से जुड़े आरोप अब शिकायत और मीडिया रिपोर्ट की सीमा से आगे बढ़कर विजिलेंस जांच के दायरे में आ चुके हैं।

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