राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से अपील, कहा- स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक उत्पादों का प्रचार न करें
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
एकता नगर, गुजरात, 24 सितंबर 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकप्रिय फिल्म कलाकारों और सितारों से अपील की है कि वे ऐसे उत्पादों के प्रचार से बचें, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने कलाकारों के सामाजिक प्रभाव और उनकी जिम्मेदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय कलाकारों की बातों और उनके व्यवहार का बच्चों तथा युवाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब सेलिब्रिटी विज्ञापनों में कलाकारों की भूमिका और उनके सामाजिक प्रभाव को लेकर चर्चा होती रहती है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में किसी विशेष कलाकार या ब्रांड का नाम नहीं लिया। उनका जोर इस बात पर था कि जिन लोगों को बड़ी संख्या में दर्शक और प्रशंसक फॉलो करते हैं, उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल समाज के हित में करने के प्रति सजग रहना चाहिए।
युवाओं पर सितारों के प्रभाव का किया उल्लेख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि लोकप्रिय फिल्म कलाकारों के पास समाज, खासकर बच्चों और युवाओं को प्रभावित करने की बड़ी क्षमता होती है। जब कोई सफल कलाकार अनुशासित जीवनशैली, सकारात्मक सोच या स्वस्थ आदतों के बारे में बात करता है तो उसके प्रशंसक उससे प्रेरणा ले सकते हैं। इसी कारण विज्ञापन और ब्रांड प्रचार के दौरान भी कलाकारों को अपने संदेश के संभावित प्रभाव पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने कलाकारों से अनुरोध किया कि वे ऐसे उत्पादों का प्रचार न करें, जिनसे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अपने संदेश को प्रभावशाली तरीके से रखते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सच्चा सितारा वही है जो समाज में रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं। यही बात अब उनके राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के संबोधन की प्रमुख पंक्तियों में शामिल हो गई है।
विज्ञापन में जिम्मेदारी का सवाल
आज फिल्मी कलाकार केवल फिल्मों तक सीमित नहीं हैं। उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल अलग-अलग कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार के लिए करती हैं। किसी प्रसिद्ध चेहरे के विज्ञापन में दिखाई देने से उत्पाद को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। खासकर युवा दर्शक अपने पसंदीदा कलाकारों की जीवनशैली, पहनावे और सार्वजनिक व्यवहार से प्रभावित होते हैं।
इसी संदर्भ में राष्ट्रपति की अपील को सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। किसी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसके स्वरूप, उपयोग और संभावित प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है। राष्ट्रपति ने कलाकारों से इसी व्यापक जिम्मेदारी को ध्यान में रखने का आग्रह किया।
हालांकि राष्ट्रपति के संबोधन में किसी खास कंपनी या अभिनेता को निशाना नहीं बनाया गया। इसलिए उनके वक्तव्य को किसी एक विज्ञापन या व्यक्ति से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। उनका संदेश लोकप्रिय कलाकारों की भूमिका और उनके सार्वजनिक प्रभाव को लेकर व्यापक अपील के रूप में सामने आया।
सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति ने भारतीय सिनेमा की भूमिका पर भी चर्चा की। उनके संबोधन में यह विचार सामने आया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी है।
भारत में अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में फिल्मों का निर्माण होता है। क्षेत्रीय सिनेमा स्थानीय कहानियों, परंपराओं और सामाजिक अनुभवों को दर्शकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार इसी विविधता को एक मंच प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति ने फिल्म उद्योग से जुड़े उन लोगों के योगदान का भी उल्लेख किया, जो पर्दे पर दिखाई नहीं देते लेकिन किसी फिल्म के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें तकनीकी कर्मचारी, छोटे कलाकार, सहायक कर्मचारी और अन्य कामगार शामिल हैं। फिल्म निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया है और किसी सफल फिल्म के पीछे बड़ी संख्या में लोगों का योगदान रहता है।
महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए गठित निर्णायक मंडलों में महिलाओं की अधिक भागीदारी की आवश्यकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं के दृष्टिकोण को शामिल करने से विषयों को व्यापक मानवीय नजरिए से देखने में मदद मिल सकती है।
यह विषय फिल्म उद्योग में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। फिल्म निर्माण में अभिनय के अलावा निर्देशन, लेखन, तकनीकी कार्य, निर्माण, संपादन और अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। राष्ट्रपति ने पुरस्कार समारोह के मंच से इस भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता पर बात रखी।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में कई कलाकार सम्मानित
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर में किया गया। समारोह में भारतीय सिनेमा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों और फिल्मकर्मियों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने कई पुरस्कार विजेताओं को सम्मान प्रदान किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभिनेत्री यामी गौतम को फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। अभिनेता कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ और अभिनेता ममूटी को ‘भ्रमयुगम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान प्रदान किया गया।
दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मानों में शामिल दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में अलग-अलग भाषाओं और विधाओं की फिल्मों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
राष्ट्रपति के संदेश का व्यापक संदर्भ
राष्ट्रपति की अपील का मूल केंद्र कलाकारों की लोकप्रियता और उससे जुड़ी जिम्मेदारी रहा। किसी प्रसिद्ध अभिनेता या कलाकार की बात बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच सकती है। ऐसे में उनके सार्वजनिक संदेश का प्रभाव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता।
राष्ट्रपति ने इसी प्रभाव को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने की बात कही। उनका संदेश यह था कि प्रसिद्धि के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। यदि कलाकार स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली से जुड़े संदेशों को बढ़ावा देते हैं, तो इससे समाज के युवा वर्ग तक उपयोगी संदेश पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के विज्ञापन को लेकर अंतिम निर्णय उपभोक्ताओं, कंपनियों और कलाकारों की अपनी जिम्मेदारियों से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में राष्ट्रपति का बयान सार्वजनिक जीवन में प्रसिद्ध व्यक्तियों की भूमिका पर एक व्यापक सामाजिक संदेश के रूप में सामने आया है।
निष्कर्ष
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी कलाकारों से की गई अपील ने सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और सामाजिक जिम्मेदारी के विषय को फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कलाकारों से किसी व्यक्ति या ब्रांड विशेष का नाम लिए बिना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक उत्पादों के प्रचार से बचने का आग्रह किया।
उनका संदेश मुख्य रूप से इस विचार पर केंद्रित रहा कि लोकप्रियता केवल पहचान नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी लेकर आती है। बच्चों और युवाओं पर कलाकारों के प्रभाव को देखते हुए विज्ञापनों और सार्वजनिक संदेशों में सावधानी बरतने की जरूरत पर राष्ट्रपति ने जोर दिया। उनका यह कथन कि “स्टार वही है, जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं” समारोह के संदेश का प्रमुख हिस्सा रहा।