गांधी इंटर कॉलेज में विधिक जागरूकता शिविर, छात्र-छात्राओं को बताए कानूनी अधिकार

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई। विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और कानून की बुनियादी जानकारी से परिचित कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को तहसील उरई स्थित गांधी इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। शिविर में छात्र-छात्राओं को बाल संरक्षण, महिला अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और निःशुल्क कानूनी सहायता सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि कानून की जानकारी केवल विवाद या मुकदमे की स्थिति में ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में भी सहायता करती है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी उन्हें शोषण तथा अपराध से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पॉक्सो कानून के बारे में दी जानकारी

शिविर में पॉक्सो एक्ट-2012 को प्रमुख विषय के रूप में विद्यार्थियों के सामने रखा गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को इसके मूल प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ होने वाले विभिन्न प्रकार के लैंगिक अपराधों के मामलों में यह कानून सुरक्षा और कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी अनुचित व्यवहार, शोषण या अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक या संबंधित कानूनी व्यवस्था की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जागरूकता बच्चों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है और विद्यार्थियों को अपने साथ-साथ अपने आसपास के बच्चों के अधिकारों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल अधिकारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि संविधान और विभिन्न कानूनों के माध्यम से महिलाओं तथा बच्चों को कई प्रकार के अधिकार एवं संरक्षण प्राप्त हैं। किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होने पर उपलब्ध कानूनी सहायता के माध्यम से उचित कार्रवाई की जा सकती है।

श्रमिक और सामाजिक अधिकारों पर भी चर्चा

विधिक जागरूकता शिविर में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन तथा श्रमिक अधिकारों से संबंधित विषय भी शामिल रहे। विद्यार्थियों को बताया गया कि श्रमिकों को कानून के तहत कई अधिकार प्राप्त हैं और किसी व्यक्ति को जबरन मजदूरी के लिए बाध्य करना कानून के विरुद्ध है।

इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के अधिकारों तथा अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान और समानता का संरक्षण कानून की महत्वपूर्ण भावना है। किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।

शिविर में विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं और कानूनी सेवाओं की जानकारी पहुंचाना विधिक जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी आवश्यकता पड़ने पर कानून की सहायता प्राप्त कर सकें।

25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेंगे जागरूकता कार्यक्रम

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने बताया कि जिले में 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक व्यापक स्तर पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवधि में विभिन्न तहसीलों, विकासखंडों, विद्यालयों और विधि महाविद्यालयों में अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कानून को आम नागरिक तक सरल भाषा में पहुंचाना है, ताकि लोग अपने अधिकारों को समझ सकें और आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी माध्यम का इस्तेमाल कर सकें। विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं को कानून के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के अवसर पर भी जिले में जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग और अन्य रचनात्मक गतिविधियां शामिल रहेंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कानून, अहिंसा, अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

विद्यार्थियों को दिलाई जागरूकता की शपथ

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को अपने विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के प्रति सजग रहने की शपथ भी दिलाई गई। विद्यार्थियों ने कानून की जानकारी प्राप्त करने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के महत्व को समझा।

अधिकारियों ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि किसी भी प्रकार की समस्या को छिपाने के बजाय समय रहते भरोसेमंद व्यक्ति अथवा सक्षम प्राधिकरण को इसकी जानकारी देना आवश्यक है। जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं को सुरक्षित रखने में सक्षम होते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज में भी कानूनी जागरूकता फैलाने में योगदान दे सकते हैं।

लोक अदालत और सुलह-समझौते की जानकारी

शिविर का संचालन कर रहे पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) महेश सिंह परिहार ने लोक अदालत और सुलह-समझौता केंद्र के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई प्रकार के विवादों का समाधान आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से भी किया जा सकता है। लोक अदालत जैसी व्यवस्थाएं लोगों को विवादों के समाधान के लिए वैकल्पिक कानूनी मंच उपलब्ध कराती हैं।

उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न कानूनी सुविधाओं की भी जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि पात्र लोगों को आवश्यकतानुसार निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस जानकारी का उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को न्याय की प्रक्रिया से जोड़ना है।

प्रधानाचार्य ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश चन्द्र राठौर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों और सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक नागरिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान करते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से शिविर में मिली जानकारी को गंभीरता से समझने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी आवश्यक कानूनी जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सुधीर कुमार गुप्ता, उदय सिंह यादव, हेमन्त कुमार सिंह, विकास उदैनिया, बलवन्त सिंह, सतेन्द्र कुमार त्रिपाठी, सुरेन्द्र विक्रम सिंह, मनोज कुमार राजपूत, जितेन्द्र कुमार वर्मा, डीईओ दीपक नारायण, पीएलवी महेन्द्र कुमार मिश्रा, योगेन्द्र सिंह तखेले सहित विद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कानून की जानकारी से मजबूत होगा जागरूक समाज

गांधी इंटर कॉलेज में आयोजित यह शिविर विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम में बाल संरक्षण से लेकर महिला अधिकार, श्रमिक हित, सामाजिक सुरक्षा और निःशुल्क विधिक सहायता तक विभिन्न विषयों को सरल तरीके से समझाया गया। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में कानून के प्रति समझ विकसित होने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है।

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गांधी इंटर कॉलेज में विधिक जागरूकता शिविर, छात्र-छात्राओं को बताए कानूनी अधिकार

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 25, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई। विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और कानून की बुनियादी जानकारी से परिचित कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को तहसील उरई स्थित गांधी इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। शिविर में छात्र-छात्राओं को बाल संरक्षण, महिला अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और निःशुल्क कानूनी सहायता सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि कानून की जानकारी केवल विवाद या मुकदमे की स्थिति में ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में भी सहायता करती है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी उन्हें शोषण तथा अपराध से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पॉक्सो कानून के बारे में दी जानकारी

शिविर में पॉक्सो एक्ट-2012 को प्रमुख विषय के रूप में विद्यार्थियों के सामने रखा गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को इसके मूल प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ होने वाले विभिन्न प्रकार के लैंगिक अपराधों के मामलों में यह कानून सुरक्षा और कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी अनुचित व्यवहार, शोषण या अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक या संबंधित कानूनी व्यवस्था की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जागरूकता बच्चों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है और विद्यार्थियों को अपने साथ-साथ अपने आसपास के बच्चों के अधिकारों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल अधिकारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि संविधान और विभिन्न कानूनों के माध्यम से महिलाओं तथा बच्चों को कई प्रकार के अधिकार एवं संरक्षण प्राप्त हैं। किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होने पर उपलब्ध कानूनी सहायता के माध्यम से उचित कार्रवाई की जा सकती है।

श्रमिक और सामाजिक अधिकारों पर भी चर्चा

विधिक जागरूकता शिविर में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन तथा श्रमिक अधिकारों से संबंधित विषय भी शामिल रहे। विद्यार्थियों को बताया गया कि श्रमिकों को कानून के तहत कई अधिकार प्राप्त हैं और किसी व्यक्ति को जबरन मजदूरी के लिए बाध्य करना कानून के विरुद्ध है।

इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के अधिकारों तथा अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान और समानता का संरक्षण कानून की महत्वपूर्ण भावना है। किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।

शिविर में विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं और कानूनी सेवाओं की जानकारी पहुंचाना विधिक जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी आवश्यकता पड़ने पर कानून की सहायता प्राप्त कर सकें।

25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेंगे जागरूकता कार्यक्रम

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने बताया कि जिले में 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक व्यापक स्तर पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवधि में विभिन्न तहसीलों, विकासखंडों, विद्यालयों और विधि महाविद्यालयों में अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कानून को आम नागरिक तक सरल भाषा में पहुंचाना है, ताकि लोग अपने अधिकारों को समझ सकें और आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी माध्यम का इस्तेमाल कर सकें। विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं को कानून के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के अवसर पर भी जिले में जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग और अन्य रचनात्मक गतिविधियां शामिल रहेंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कानून, अहिंसा, अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

विद्यार्थियों को दिलाई जागरूकता की शपथ

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को अपने विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के प्रति सजग रहने की शपथ भी दिलाई गई। विद्यार्थियों ने कानून की जानकारी प्राप्त करने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के महत्व को समझा।

अधिकारियों ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि किसी भी प्रकार की समस्या को छिपाने के बजाय समय रहते भरोसेमंद व्यक्ति अथवा सक्षम प्राधिकरण को इसकी जानकारी देना आवश्यक है। जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं को सुरक्षित रखने में सक्षम होते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज में भी कानूनी जागरूकता फैलाने में योगदान दे सकते हैं।

लोक अदालत और सुलह-समझौते की जानकारी

शिविर का संचालन कर रहे पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) महेश सिंह परिहार ने लोक अदालत और सुलह-समझौता केंद्र के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई प्रकार के विवादों का समाधान आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से भी किया जा सकता है। लोक अदालत जैसी व्यवस्थाएं लोगों को विवादों के समाधान के लिए वैकल्पिक कानूनी मंच उपलब्ध कराती हैं।

उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न कानूनी सुविधाओं की भी जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि पात्र लोगों को आवश्यकतानुसार निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस जानकारी का उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को न्याय की प्रक्रिया से जोड़ना है।

प्रधानाचार्य ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश चन्द्र राठौर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों और सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक नागरिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान करते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से शिविर में मिली जानकारी को गंभीरता से समझने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी आवश्यक कानूनी जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सुधीर कुमार गुप्ता, उदय सिंह यादव, हेमन्त कुमार सिंह, विकास उदैनिया, बलवन्त सिंह, सतेन्द्र कुमार त्रिपाठी, सुरेन्द्र विक्रम सिंह, मनोज कुमार राजपूत, जितेन्द्र कुमार वर्मा, डीईओ दीपक नारायण, पीएलवी महेन्द्र कुमार मिश्रा, योगेन्द्र सिंह तखेले सहित विद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कानून की जानकारी से मजबूत होगा जागरूक समाज

गांधी इंटर कॉलेज में आयोजित यह शिविर विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम में बाल संरक्षण से लेकर महिला अधिकार, श्रमिक हित, सामाजिक सुरक्षा और निःशुल्क विधिक सहायता तक विभिन्न विषयों को सरल तरीके से समझाया गया। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में कानून के प्रति समझ विकसित होने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है।