अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: 74 हजार पन्नों की चार्जशीट में 105 घटनाओं का उल्लेख

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अयोध्या, 26 सितंबर 2026: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले की जांच अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने 23 सितंबर 2026 को आठ आरोपियों के खिलाफ विस्तृत आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। रिपोर्टों के अनुसार, चार्जशीट और उससे जुड़े दस्तावेजों का आकार करीब 74 हजार पन्नों तक बताया गया है। इसमें जांच के दौरान जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्तियों से संबंधित जानकारी और फॉरेंसिक ऑडिट के निष्कर्ष शामिल हैं।

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जांच में सामने आईं 105 कथित घटनाएं

SIT की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम की गिनती से संबंधित बताया गया है। आरोपपत्र के मुताबिक, CCTV फुटेज की जांच में नकदी को कथित रूप से निकालने या छिपाने से जुड़ी 105 घटनाओं की पहचान की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, रकम की कथित हेराफेरी का केंद्र बैंक तक पैसे पहुंचाने की प्रक्रिया के बजाय मंदिर परिसर का काउंटिंग रूम रहा।

जांच में मंदिर के काउंटिंग रूम से लेकर बैंक में जमा होने तक नकदी के प्रवाह को समझने की कोशिश की गई। SIT के अनुसार, बैंक तक रकम पहुंचाने के चरण में चोरी या हेराफेरी का प्रमाण नहीं मिला, जबकि गिनती के दौरान नकदी के कथित तौर पर अलग किए जाने के संकेत मिले। यह निष्कर्ष आरोपपत्र में दर्ज जांच के आधार पर सामने आया है।

CCTV से लेकर मोबाइल चैट तक जुटाए गए साक्ष्य

पूरे मामले की जांच केवल CCTV कैमरों तक सीमित नहीं रही। अधिकारियों ने कथित तौर पर मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों, जमा-निकासी के विवरण, संपत्ति के दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की। इन माध्यमों के जरिए जांचकर्ताओं ने आरोपित व्यक्तियों और कथित रूप से गायब हुई रकम के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की।

चार्जशीट में CCTV फुटेज को विशेष महत्व दिए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में आरोपित व्यक्तियों द्वारा नकदी हटाने या दूसरे लोगों की मदद करने से जुड़े कई दृश्य जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में CCTV से जुड़े मामलों की संख्या 105 बताई गई है, जबकि विस्तृत कवरेज में 200 से अधिक CCTV घटनाओं का उल्लेख भी मिलता है। संभवतः यह अंतर अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज फुटेज या घटनाओं की गिनती से जुड़ा हो सकता है।

करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद करने की जानकारी दी है। रिपोर्टों के अनुसार बरामदगी में भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी मुद्रा और आभूषण भी शामिल बताए गए हैं। कुछ स्थानों पर नकदी छिपाए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने आरोपियों के बैंक खातों और उनकी संपत्तियों की भी पड़ताल की। जमीन, मकान, वाहन, आभूषण और निर्माण पर हुए खर्च जैसी जानकारियों को वित्तीय जांच का हिस्सा बनाया गया। इसका उद्देश्य कथित तौर पर रकम के प्रवाह और आरोपियों की संपत्तियों के बीच संभावित संबंधों की जांच करना था।

काउंटिंग रूम के बाथरूम से रकम मिलने का दावा

जांच से जुड़ी जानकारी में मंदिर के काउंटिंग रूम के बाथरूम में नकदी छिपाए जाने की घटना का भी उल्लेख है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 4 जून 2026 को वहां से करीब 2.25 लाख रुपये बरामद किए गए। जांच एजेंसी ने इसे कथित तौर पर रकम को छिपाने के प्रयास के रूप में देखा। यह बरामदगी मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल बताई गई है।

इस प्रकरण ने मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उसके सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित किया है। बड़ी मात्रा में नकदी की गिनती के दौरान CCTV निगरानी, रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और रकम के मिलान जैसी व्यवस्थाओं की भूमिका जांच के केंद्र में रही।

आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र

SIT ने कुल आठ आरोपियों को मामले में नामजद किया है। रिपोर्टों में उनके नाम अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव बताए गए हैं। इन सभी के खिलाफ कथित आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण कानून से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

जांच में प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर देखने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में अविनाश शुक्ला के संबंध में CCTV रिकॉर्ड के आधार पर कई बार नकदी हटाने का आरोप दर्ज होने का उल्लेख है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।

चंपत राय और अन्य लोगों की भूमिका

इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के नाम भी चर्चा में आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है, बल्कि उनके बयान गवाह के रूप में दर्ज किए गए हैं।

इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति का बयान गवाह के तौर पर दर्ज होना और उसे आरोपी बनाया जाना कानूनी रूप से अलग-अलग स्थितियां हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इन लोगों को इस मामले में आरोपी के रूप में नामजद किए जाने की जानकारी नहीं है।

कीमती चढ़ावे की भी हुई जांच

SIT की जांच केवल नकदी तक सीमित नहीं रही। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज कीमती वस्तुओं का भी सत्यापन किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर में दर्ज 803 कीमती दान वस्तुओं का सत्यापन किया गया और इनमें कोई विसंगति नहीं मिली। इसके अलावा बिना रसीद वाली 86 कीमती वस्तुओं का भी भौतिक सत्यापन किया गया।

चांदी से जुड़े दान की भी जांच की गई। रिपोर्टों में चांदी की ईंटों, आभूषणों और अन्य वस्तुओं के साथ बड़ी मात्रा में चांदी को पिघलाने के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया का सत्यापन किए जाने की जानकारी है। इससे जांच का दायरा केवल कथित नकदी हेराफेरी तक सीमित न रहकर मंदिर को मिले अन्य मूल्यवान दान तक भी पहुंचा।

फॉरेंसिक ऑडिट से वित्तीय कड़ियों की पड़ताल

मामले में फॉरेंसिक ऑडिट को भी जांच का अहम हिस्सा बताया गया है। बैंक खातों, जमा और निकासी, जमीन-जायदाद, वाहन, आभूषण तथा निर्माण संबंधी खर्चों का विश्लेषण किया गया। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की कि आरोपितों की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन का उनकी ज्ञात आय से क्या संबंध है।

इतने बड़े आरोपपत्र का दाखिल होना जांच की व्यापकता को दर्शाता है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना अभी बाकी है। आरोपितों के खिलाफ अंतिम कानूनी निष्कर्ष न्यायिक सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही तय होंगे।

आगे क्या होगा?

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में आगे बढ़ेगा। अदालत आरोपपत्र और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करेगी तथा कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही होगी। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

राम मंदिर से जुड़े इस मामले में जांच के दौरान CCTV, डिजिटल संचार, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और गवाहों के बयान जैसे अनेक स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है। 23 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र ने जांच की दिशा और उसमें सामने आए तथ्यों को औपचारिक कानूनी रिकॉर्ड का हिस्सा बना दिया है। अब इन आरोपों की वास्तविकता और प्रत्येक आरोपी की जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत में होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

यह मामला मंदिर में प्राप्त दान की गिनती, रिकॉर्डिंग और सुरक्षित बैंक जमा की व्यवस्था में पारदर्शिता के महत्व को भी सामने लाता है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में ऐसी व्यवस्थाओं में निगरानी और जवाबदेही से जुड़े कदमों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: 74 हजार पन्नों की चार्जशीट में 105 घटनाओं का उल्लेख

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 26, 2026

अयोध्या, 26 सितंबर 2026: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले की जांच अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने 23 सितंबर 2026 को आठ आरोपियों के खिलाफ विस्तृत आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। रिपोर्टों के अनुसार, चार्जशीट और उससे जुड़े दस्तावेजों का आकार करीब 74 हजार पन्नों तक बताया गया है। इसमें जांच के दौरान जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्तियों से संबंधित जानकारी और फॉरेंसिक ऑडिट के निष्कर्ष शामिल हैं।

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जांच में सामने आईं 105 कथित घटनाएं

SIT की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम की गिनती से संबंधित बताया गया है। आरोपपत्र के मुताबिक, CCTV फुटेज की जांच में नकदी को कथित रूप से निकालने या छिपाने से जुड़ी 105 घटनाओं की पहचान की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, रकम की कथित हेराफेरी का केंद्र बैंक तक पैसे पहुंचाने की प्रक्रिया के बजाय मंदिर परिसर का काउंटिंग रूम रहा।

जांच में मंदिर के काउंटिंग रूम से लेकर बैंक में जमा होने तक नकदी के प्रवाह को समझने की कोशिश की गई। SIT के अनुसार, बैंक तक रकम पहुंचाने के चरण में चोरी या हेराफेरी का प्रमाण नहीं मिला, जबकि गिनती के दौरान नकदी के कथित तौर पर अलग किए जाने के संकेत मिले। यह निष्कर्ष आरोपपत्र में दर्ज जांच के आधार पर सामने आया है।

CCTV से लेकर मोबाइल चैट तक जुटाए गए साक्ष्य

पूरे मामले की जांच केवल CCTV कैमरों तक सीमित नहीं रही। अधिकारियों ने कथित तौर पर मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों, जमा-निकासी के विवरण, संपत्ति के दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की। इन माध्यमों के जरिए जांचकर्ताओं ने आरोपित व्यक्तियों और कथित रूप से गायब हुई रकम के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की।

चार्जशीट में CCTV फुटेज को विशेष महत्व दिए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में आरोपित व्यक्तियों द्वारा नकदी हटाने या दूसरे लोगों की मदद करने से जुड़े कई दृश्य जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में CCTV से जुड़े मामलों की संख्या 105 बताई गई है, जबकि विस्तृत कवरेज में 200 से अधिक CCTV घटनाओं का उल्लेख भी मिलता है। संभवतः यह अंतर अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज फुटेज या घटनाओं की गिनती से जुड़ा हो सकता है।

करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद करने की जानकारी दी है। रिपोर्टों के अनुसार बरामदगी में भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी मुद्रा और आभूषण भी शामिल बताए गए हैं। कुछ स्थानों पर नकदी छिपाए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने आरोपियों के बैंक खातों और उनकी संपत्तियों की भी पड़ताल की। जमीन, मकान, वाहन, आभूषण और निर्माण पर हुए खर्च जैसी जानकारियों को वित्तीय जांच का हिस्सा बनाया गया। इसका उद्देश्य कथित तौर पर रकम के प्रवाह और आरोपियों की संपत्तियों के बीच संभावित संबंधों की जांच करना था।

काउंटिंग रूम के बाथरूम से रकम मिलने का दावा

जांच से जुड़ी जानकारी में मंदिर के काउंटिंग रूम के बाथरूम में नकदी छिपाए जाने की घटना का भी उल्लेख है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 4 जून 2026 को वहां से करीब 2.25 लाख रुपये बरामद किए गए। जांच एजेंसी ने इसे कथित तौर पर रकम को छिपाने के प्रयास के रूप में देखा। यह बरामदगी मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल बताई गई है।

इस प्रकरण ने मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उसके सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित किया है। बड़ी मात्रा में नकदी की गिनती के दौरान CCTV निगरानी, रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और रकम के मिलान जैसी व्यवस्थाओं की भूमिका जांच के केंद्र में रही।

आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र

SIT ने कुल आठ आरोपियों को मामले में नामजद किया है। रिपोर्टों में उनके नाम अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव बताए गए हैं। इन सभी के खिलाफ कथित आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण कानून से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

जांच में प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर देखने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में अविनाश शुक्ला के संबंध में CCTV रिकॉर्ड के आधार पर कई बार नकदी हटाने का आरोप दर्ज होने का उल्लेख है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।

चंपत राय और अन्य लोगों की भूमिका

इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के नाम भी चर्चा में आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है, बल्कि उनके बयान गवाह के रूप में दर्ज किए गए हैं।

इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति का बयान गवाह के तौर पर दर्ज होना और उसे आरोपी बनाया जाना कानूनी रूप से अलग-अलग स्थितियां हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इन लोगों को इस मामले में आरोपी के रूप में नामजद किए जाने की जानकारी नहीं है।

कीमती चढ़ावे की भी हुई जांच

SIT की जांच केवल नकदी तक सीमित नहीं रही। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज कीमती वस्तुओं का भी सत्यापन किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर में दर्ज 803 कीमती दान वस्तुओं का सत्यापन किया गया और इनमें कोई विसंगति नहीं मिली। इसके अलावा बिना रसीद वाली 86 कीमती वस्तुओं का भी भौतिक सत्यापन किया गया।

चांदी से जुड़े दान की भी जांच की गई। रिपोर्टों में चांदी की ईंटों, आभूषणों और अन्य वस्तुओं के साथ बड़ी मात्रा में चांदी को पिघलाने के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया का सत्यापन किए जाने की जानकारी है। इससे जांच का दायरा केवल कथित नकदी हेराफेरी तक सीमित न रहकर मंदिर को मिले अन्य मूल्यवान दान तक भी पहुंचा।

फॉरेंसिक ऑडिट से वित्तीय कड़ियों की पड़ताल

मामले में फॉरेंसिक ऑडिट को भी जांच का अहम हिस्सा बताया गया है। बैंक खातों, जमा और निकासी, जमीन-जायदाद, वाहन, आभूषण तथा निर्माण संबंधी खर्चों का विश्लेषण किया गया। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की कि आरोपितों की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन का उनकी ज्ञात आय से क्या संबंध है।

इतने बड़े आरोपपत्र का दाखिल होना जांच की व्यापकता को दर्शाता है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना अभी बाकी है। आरोपितों के खिलाफ अंतिम कानूनी निष्कर्ष न्यायिक सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही तय होंगे।

आगे क्या होगा?

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में आगे बढ़ेगा। अदालत आरोपपत्र और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करेगी तथा कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही होगी। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

राम मंदिर से जुड़े इस मामले में जांच के दौरान CCTV, डिजिटल संचार, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और गवाहों के बयान जैसे अनेक स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है। 23 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र ने जांच की दिशा और उसमें सामने आए तथ्यों को औपचारिक कानूनी रिकॉर्ड का हिस्सा बना दिया है। अब इन आरोपों की वास्तविकता और प्रत्येक आरोपी की जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत में होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

यह मामला मंदिर में प्राप्त दान की गिनती, रिकॉर्डिंग और सुरक्षित बैंक जमा की व्यवस्था में पारदर्शिता के महत्व को भी सामने लाता है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में ऐसी व्यवस्थाओं में निगरानी और जवाबदेही से जुड़े कदमों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।