लखनऊ में CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, बारिश के बीच कई कार्यकर्ता हिरासत में
अंशुमान द्विवेदी प्रतापगढ़
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
लखनऊ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस पहले से ही सवाल उठाती रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। लखनऊ में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर मार्च करने के लिए निकले।

प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ समेत कई वरिष्ठ नेता भी आंदोलन में मौजूद रहे। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लखनऊ पहुंचने की बात सामने आई।
भारी बारिश के बीच सड़क पर प्रदर्शन
लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान मौसम भी चुनौती बना रहा। बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़क पर मौजूद रहे और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई गई। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोरी’ जैसे नारे भी लगाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उनका संतोषजनक जवाब मिलना जरूरी है। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका
मार्च के दौरान पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन और बाद में ईको गार्डन ले जाने की जानकारी सामने आई है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का घेराव करने से पहले ही रोक लिया गया और बाद में शाम को उन्हें रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और कांग्रेस की ओर से साझा किए गए दृश्यों में पुलिस द्वारा कुछ कार्यकर्ताओं को मौके से हटाकर वाहनों में बैठाते हुए देखा गया। कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने की कोशिश बताया। हालांकि, पुलिस कार्रवाई के संबंध में अलग-अलग पक्षों के दावे और वीडियो की व्याख्या अलग हो सकती है, इसलिए घटनाक्रम का आकलन उपलब्ध आधिकारिक विवरण के साथ करना जरूरी है।
डॉ. नीरज त्रिपाठी को हिरासत में लेने का दावा
प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रतापगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी भी पुलिस कार्रवाई की जद में आए। कांग्रेस की ओर से जारी वीडियो में उन्हें पुलिसकर्मियों द्वारा जमीन से उठाकर वाहन की ओर ले जाते हुए दिखाया गया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्हें हाथ-पैर पकड़कर घसीटते हुए बस तक ले जाया गया।
कांग्रेस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दूसरी ओर, उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोके जाने और हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की गई है।

आराधना मिश्रा ने सरकार पर उठाए सवाल
हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता और रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर चर्चा हो चुकी है और आरोपों के संबंध में बातें सामने आ चुकी हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।
आराधना मिश्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए 2023 के बाद हुए चुनावों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चुनावों की समीक्षा और संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनके ये बयान कांग्रेस के राजनीतिक रुख और प्रदर्शन के दौरान उठाई गई मांगों का हिस्सा रहे।
नीरज त्रिपाठी बोले—संघर्ष जारी रहेगा
हिरासत में लिए जाने के बाद डॉ. नीरज त्रिपाठी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के संघर्ष को जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि केवल हिरासत में लेने या पुलिस कार्रवाई से आंदोलन को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। उनके बयान में सरकार और चुनाव व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक विरोध का स्वर स्पष्ट दिखाई दिया।
SIR को लेकर पहले से जारी है विवाद
लखनऊ का प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक विवाद चल रहा है। कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के कामकाज पर कई सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से संबंधित निर्णयों को लेकर सामने आई कथित आंतरिक असहमति की खबरों पर अपना पक्ष रखा है। आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में प्रशासनिक सुझाव और परिचालन संबंधी चर्चा सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इस तरह SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़ा विषय बता रही है, जबकि चुनाव आयोग अपने स्तर पर उठाए गए सवालों के संबंध में स्पष्टीकरण दे रहा है।
देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस ने कई राज्यों में प्रदर्शन किया। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, चंडीगढ़ और अन्य स्थानों पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी और कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।
लखनऊ में हुए प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वह इन मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी। वहीं, पूरे मामले में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR की प्रक्रिया और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर राजनीतिक एवं संस्थागत बहस आगे जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बाद में रिहा किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। राजधानी में प्रदर्शन के दौरान बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने आंदोलन की राजनीतिक अहमियत को रेखांकित किया।