फिरोजाबाद के नारखी सबस्टेशन में किसानों का धरना, जेई को भी बैठाया; XEN के आने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

फिरोजाबाद। जिले के नारखी क्षेत्र स्थित विद्युत सबस्टेशन पर बुधवार को किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर धरना शुरू कर दिया। किसान कार्यकर्ताओं के सबस्टेशन परिसर में बैठने से बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित एक्सईएन (XEN) मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं पर बातचीत नहीं करते, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

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किसानों के इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और चर्चा में आ गई, जब आंदोलनकारी किसानों ने विभाग के जेई (Junior Engineer) को भी अपने साथ बैठा लिया। किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है और बार-बार अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के चलते उन्होंने सबस्टेशन परिसर में धरना देने का निर्णय लिया।

नारखी सबस्टेशन पर जुटे किसान

बुधवार सुबह नारखी सबस्टेशन पर किसान कार्यकर्ता पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां किसानों की मौजूदगी बढ़ गई और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर धरना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का सीधा असर खेती और ग्रामीण जीवन पर पड़ता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतों का समय पर समाधान होना जरूरी है।

किसानों ने सबस्टेशन परिसर में बैठकर विभागीय अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने की कोशिश की। उनका कहना था कि जब तक उच्च अधिकारी मौके पर आकर उनकी समस्याएं नहीं सुनते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरने के दौरान किसानों ने विभाग के जेई को भी अपने साथ बैठा लिया। इससे मौके पर स्थिति और संवेदनशील हो गई। किसानों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचें और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर स्पष्ट आश्वासन दें।

XEN के आने का इंतजार

आंदोलन कर रहे किसानों ने साफ तौर पर कहा कि वे XEN के आने तक धरना समाप्त नहीं करेंगे। किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर के अधिकारियों के साथ बातचीत के बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो उच्च अधिकारी को मौके पर आकर स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।

किसानों के मुताबिक, विद्युत विभाग से संबंधित शिकायतों को लेकर वे काफी समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका मानना है कि समस्या का स्थायी समाधान अधिकारियों की मौजूदगी और संबंधित विभागीय स्तर पर कार्रवाई से ही संभव है।

धरना स्थल पर किसानों की ओर से यह भी कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान कराना है। वे चाहते हैं कि विभाग उनकी बात गंभीरता से सुने और जिन बिंदुओं को लेकर किसान परेशान हैं, उन पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बिजली व्यवस्था को लेकर किसानों की चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की व्यवस्था खेती के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसानों को सिंचाई सहित कई कार्यों के लिए विद्युत आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में बिजली से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर किसानों की दिनचर्या और कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

नारखी सबस्टेशन पर हुए इस धरने के पीछे भी किसानों की ओर से बिजली विभाग से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। हालांकि किसानों की ओर से रखी गई सभी मांगों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन आंदोलनकारियों का रुख फिलहाल स्पष्ट है कि वे उच्च अधिकारी से बातचीत के बाद ही आगे का निर्णय लेंगे।

किसानों का कहना है कि वे अपनी शिकायतों और मांगों को अधिकारियों के सामने रखने के लिए तैयार हैं। उनका प्रयास है कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकले और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों को राहत मिले।

जेई को साथ बैठाने से बढ़ा दबाव

धरने के दौरान जेई को भी किसानों के साथ बैठाए जाने की घटना ने विभाग पर दबाव बढ़ा दिया। किसानों का कहना था कि जब अधिकारी मौके पर मौजूद हैं तो उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए और उन्हें उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

किसानों के इस कदम से विभागीय स्तर पर स्थिति को संभालने की जरूरत महसूस हुई। वहीं आंदोलनकारी किसान अपनी मांगों पर कायम रहे। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि संबंधित अधिकारी को मौके पर पहुंचकर स्थिति समझनी होगी।

किसानों ने यह भी संकेत दिया कि यदि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि आगे की स्थिति XEN के मौके पर पहुंचने और किसानों के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।

ग्रामीणों की निगाहें अधिकारियों की बातचीत पर

नारखी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के बीच किसानों के धरने ने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी किसानों के साथ किस तरह की बातचीत करते हैं और उनकी मांगों पर क्या कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है।

किसानों का कहना है कि वे विभाग के साथ संवाद के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनकर संबंधित मामलों में कार्रवाई शुरू कर दें तो विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

वहीं, किसानों के आंदोलन से यह भी स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और उससे जुड़ी शिकायतें किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। किसान चाहते हैं कि उनकी शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी स्तर पर न हो, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उसका असर दिखाई दे।

समाधान के लिए वार्ता पर जोर

फिलहाल नारखी सबस्टेशन पर किसानों का धरना जारी है और आंदोलनकारी XEN के आने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को वरिष्ठ अधिकारी के सामने रखेंगे और बातचीत के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे।

ऐसे में अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है और किसानों की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा मिलता है, तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। दूसरी ओर, यदि किसानों को अपेक्षित जवाब नहीं मिलता है, तो धरना आगे भी जारी रहने की स्थिति बन सकती है।

फिलहाल नारखी सबस्टेशन पर किसानों का विरोध प्रदर्शन स्थानीय बिजली व्यवस्था और किसानों की शिकायतों से जुड़े मुद्दों को सामने ला रहा है। किसानों ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि XEN के आने और उनकी समस्याओं पर बातचीत होने तक वे धरने से नहीं उठेंगे। अब सबकी नजर वरिष्ठ अधिकारी के मौके पर पहुंचने और किसानों के साथ होने वाली वार्ता पर टिकी है।

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फिरोजाबाद के नारखी सबस्टेशन में किसानों का धरना, जेई को भी बैठाया; XEN के आने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 30, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

फिरोजाबाद। जिले के नारखी क्षेत्र स्थित विद्युत सबस्टेशन पर बुधवार को किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर धरना शुरू कर दिया। किसान कार्यकर्ताओं के सबस्टेशन परिसर में बैठने से बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित एक्सईएन (XEN) मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं पर बातचीत नहीं करते, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

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किसानों के इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और चर्चा में आ गई, जब आंदोलनकारी किसानों ने विभाग के जेई (Junior Engineer) को भी अपने साथ बैठा लिया। किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है और बार-बार अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के चलते उन्होंने सबस्टेशन परिसर में धरना देने का निर्णय लिया।

नारखी सबस्टेशन पर जुटे किसान

बुधवार सुबह नारखी सबस्टेशन पर किसान कार्यकर्ता पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां किसानों की मौजूदगी बढ़ गई और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर धरना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का सीधा असर खेती और ग्रामीण जीवन पर पड़ता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतों का समय पर समाधान होना जरूरी है।

किसानों ने सबस्टेशन परिसर में बैठकर विभागीय अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने की कोशिश की। उनका कहना था कि जब तक उच्च अधिकारी मौके पर आकर उनकी समस्याएं नहीं सुनते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरने के दौरान किसानों ने विभाग के जेई को भी अपने साथ बैठा लिया। इससे मौके पर स्थिति और संवेदनशील हो गई। किसानों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचें और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर स्पष्ट आश्वासन दें।

XEN के आने का इंतजार

आंदोलन कर रहे किसानों ने साफ तौर पर कहा कि वे XEN के आने तक धरना समाप्त नहीं करेंगे। किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर के अधिकारियों के साथ बातचीत के बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो उच्च अधिकारी को मौके पर आकर स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।

किसानों के मुताबिक, विद्युत विभाग से संबंधित शिकायतों को लेकर वे काफी समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका मानना है कि समस्या का स्थायी समाधान अधिकारियों की मौजूदगी और संबंधित विभागीय स्तर पर कार्रवाई से ही संभव है।

धरना स्थल पर किसानों की ओर से यह भी कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान कराना है। वे चाहते हैं कि विभाग उनकी बात गंभीरता से सुने और जिन बिंदुओं को लेकर किसान परेशान हैं, उन पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बिजली व्यवस्था को लेकर किसानों की चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की व्यवस्था खेती के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसानों को सिंचाई सहित कई कार्यों के लिए विद्युत आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में बिजली से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर किसानों की दिनचर्या और कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

नारखी सबस्टेशन पर हुए इस धरने के पीछे भी किसानों की ओर से बिजली विभाग से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। हालांकि किसानों की ओर से रखी गई सभी मांगों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन आंदोलनकारियों का रुख फिलहाल स्पष्ट है कि वे उच्च अधिकारी से बातचीत के बाद ही आगे का निर्णय लेंगे।

किसानों का कहना है कि वे अपनी शिकायतों और मांगों को अधिकारियों के सामने रखने के लिए तैयार हैं। उनका प्रयास है कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकले और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों को राहत मिले।

जेई को साथ बैठाने से बढ़ा दबाव

धरने के दौरान जेई को भी किसानों के साथ बैठाए जाने की घटना ने विभाग पर दबाव बढ़ा दिया। किसानों का कहना था कि जब अधिकारी मौके पर मौजूद हैं तो उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए और उन्हें उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

किसानों के इस कदम से विभागीय स्तर पर स्थिति को संभालने की जरूरत महसूस हुई। वहीं आंदोलनकारी किसान अपनी मांगों पर कायम रहे। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि संबंधित अधिकारी को मौके पर पहुंचकर स्थिति समझनी होगी।

किसानों ने यह भी संकेत दिया कि यदि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि आगे की स्थिति XEN के मौके पर पहुंचने और किसानों के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।

ग्रामीणों की निगाहें अधिकारियों की बातचीत पर

नारखी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के बीच किसानों के धरने ने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी किसानों के साथ किस तरह की बातचीत करते हैं और उनकी मांगों पर क्या कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है।

किसानों का कहना है कि वे विभाग के साथ संवाद के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनकर संबंधित मामलों में कार्रवाई शुरू कर दें तो विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

वहीं, किसानों के आंदोलन से यह भी स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और उससे जुड़ी शिकायतें किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। किसान चाहते हैं कि उनकी शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी स्तर पर न हो, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उसका असर दिखाई दे।

समाधान के लिए वार्ता पर जोर

फिलहाल नारखी सबस्टेशन पर किसानों का धरना जारी है और आंदोलनकारी XEN के आने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को वरिष्ठ अधिकारी के सामने रखेंगे और बातचीत के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे।

ऐसे में अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है और किसानों की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा मिलता है, तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। दूसरी ओर, यदि किसानों को अपेक्षित जवाब नहीं मिलता है, तो धरना आगे भी जारी रहने की स्थिति बन सकती है।

फिलहाल नारखी सबस्टेशन पर किसानों का विरोध प्रदर्शन स्थानीय बिजली व्यवस्था और किसानों की शिकायतों से जुड़े मुद्दों को सामने ला रहा है। किसानों ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि XEN के आने और उनकी समस्याओं पर बातचीत होने तक वे धरने से नहीं उठेंगे। अब सबकी नजर वरिष्ठ अधिकारी के मौके पर पहुंचने और किसानों के साथ होने वाली वार्ता पर टिकी है।