बिकरू कांड: रामू बाजपेई और सुरेश वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 10 साल की सजा पर लगी रोक
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के चर्चित बिकरू कांड से जुड़े गैंगस्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रामू बाजपेई और सुरेश वर्मा को राहत दी है। शीर्ष अदालत ने दोनों को मिली 10 वर्ष की सजा को हाईकोर्ट में उनकी अपील के अंतिम निर्णय तक स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही दोनों को जमानत भी मंजूर कर ली गई है। अदालत के आदेश के बाद उनकी जेल से बाहर आने की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

यह मामला वर्ष 2020 में कानपुर देहात के बिकरू गांव में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था। घटना के बाद पुलिस ने विकास दुबे गिरोह से जुड़े कई लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे। बाद में कई आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। गैंगस्टर मामले में लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद कई अभियुक्तों को अदालत ने सजा सुनाई थी।
करीब छह साल से जेल में थे दोनों
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रामू बाजपेई और सुरेश वर्मा करीब छह वर्षों से जेल में बंद थे। गैंगस्टर मामले में निचली अदालत से 10-10 वर्ष की सजा मिलने के बाद दोनों की ओर से उस फैसले को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया गया था।
बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील के साथ राहत की मांग की थी। हालांकि वहां से तत्काल जमानत नहीं मिल सकी। इसके बाद दोनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। शीर्ष अदालत के समक्ष उनके लंबे समय से जेल में रहने और मामले की अपील लंबित होने सहित विभिन्न पहलुओं को रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों की सजा को हाईकोर्ट में अपील के निर्णय तक स्थगित करने का आदेश दिया और जमानत स्वीकार कर ली। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल 10 वर्ष की सजा का क्रियान्वयन रुका रहेगा, जबकि हाईकोर्ट में उनकी अपील पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य मुकदमे में पहले ही मिल चुकी थी जमानत
बचाव पक्ष की ओर से यह भी बताया गया कि बिकरू कांड के मुख्य आपराधिक मामले में रामू बाजपेई और सुरेश वर्मा को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। ऐसे में गैंगस्टर मामले में जेल में रहने के कारण उनकी हिरासत जारी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैंगस्टर मामले में सजा स्थगित किए जाने और जमानत दिए जाने के बाद दोनों के जेल से बाहर आने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। हालांकि रिहाई के लिए अदालत की ओर से निर्धारित शर्तों और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।
कई आरोपियों पर लगा था गैंगस्टर एक्ट
बिकरू कांड के बाद पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों और कथित गिरोह से संबंधित आरोपियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 30 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में कई आरोपियों को अदालत ने 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
बाद के वर्षों में अलग-अलग आरोपियों ने अपनी सजा और जमानत को लेकर उच्च न्यायालय तथा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अगस्त 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी गैंगस्टर मामले में पांच दोषियों की 10 वर्ष की सजा को स्थगित करते हुए उन्हें जमानत दी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस मामले से जुड़े दोषियों की अलग-अलग याचिकाओं पर अदालतें स्वतंत्र रूप से विचार कर रही हैं।
क्या था बिकरू कांड?
बिकरू कांड 2 जुलाई 2020 की रात की घटना से संबंधित है। उस रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिस की एक टीम विकास दुबे और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहुंची थी। पुलिस टीम पर हमला हुआ, जिसमें आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और कई अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई।
घटना के बाद पुलिस ने मुख्य मुकदमे के अलावा कथित आपराधिक गतिविधियों और गिरोह से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा इसी व्यापक कानूनी कार्रवाई का हिस्सा था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मतलब
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने को मामले में अंतिम बरी होना नहीं माना जा सकता। अदालत ने फिलहाल दोनों की 10 वर्ष की सजा को हाईकोर्ट में लंबित अपील के फैसले तक स्थगित किया है। इसलिए मामले का अंतिम कानूनी परिणाम हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और उसके निर्णय पर निर्भर करेगा।
सजा स्थगित होने का व्यावहारिक असर यह है कि संबंधित अवधि में दोनों को जेल में सजा काटते रहने की बाध्यता नहीं होगी, बशर्ते वे जमानत की शर्तों का पालन करें। आगे की न्यायिक प्रक्रिया हाईकोर्ट में जारी रहेगी।
रिहाई के लिए पूरी करनी होंगी औपचारिकताएं
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब जेल प्रशासन के स्तर पर आवश्यक दस्तावेज और जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। अदालत की शर्तों के अनुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों की रिहाई संभव होगी। किसी भी मामले में जमानत का आदेश संबंधित कानूनी शर्तों के पालन से जुड़ा होता है।
बचाव पक्ष के अनुसार, मुख्य मुकदमे में पहले से जमानत और अब गैंगस्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों की रिहाई का रास्ता खुल गया है।
आगे हाईकोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई
रामू बाजपेई और सुरेश वर्मा के मामले में अब अगला महत्वपूर्ण चरण इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अपील की सुनवाई है। निचली अदालत द्वारा दी गई 10 वर्ष की सजा को दोनों ने चुनौती दे रखी है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक सजा के क्रियान्वयन को रोकता है।
इस तरह बिकरू कांड से जुड़े गैंगस्टर मामले में एक और महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद मामले की न्यायिक प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। दोनों आरोपियों की अपील पर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस सजा को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।