अपना बनकर बुजुर्गों से मिले डीएम समीर, सम्मान पाकर खिल उठे वृद्धजनों के चेहरे
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
वृद्ध आश्रम में डीएम ने बुजुर्गों से जाना हाल, माला और अंगवस्त्र भेंट कर किया सम्मान; स्वास्थ्य शिविर में हुआ परीक्षण
उरई (जालौन)। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर जालौन जिले में बुजुर्गों के सम्मान और उनकी देखभाल का एक भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिलाधिकारी समीर वृद्ध आश्रम पहुंचे और वहां रह रहे बुजुर्गों के बीच काफी समय

बिताया। उन्होंने अधिकारियों की औपचारिक बैठक की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह वृद्धजनों से बातचीत की और उनकी कुशलक्षेम पूछी। जिलाधिकारी के इस आत्मीय व्यवहार से आश्रम में रह रहे बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई।
वृद्ध आश्रम पहुंचते ही जिलाधिकारी ने वहां मौजूद वृद्धजनों से एक-एक कर बातचीत की। उन्होंने उनके स्वास्थ्य, दैनिक जीवन, भोजन, रहने की व्यवस्था और अन्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बुजुर्गों ने भी जिलाधिकारी के साथ सहजता से संवाद किया और अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए। जिलाधिकारी ने उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वस्त किया कि वृद्धजनों की सुविधाओं और आवश्यकताओं को लेकर प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करेगा।
माला पहनाकर और अंगवस्त्र भेंट कर किया सम्मान
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के मौके पर जिलाधिकारी ने आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों का सम्मान भी किया। उन्होंने वृद्धजनों को माला पहनाई और अंगवस्त्र भेंट किए। इसके साथ ही मिष्ठान देकर उनका अभिनंदन किया गया। सम्मान पाकर कई वृद्धजनों के चेहरे पर प्रसन्नता दिखाई दी। कार्यक्रम का माहौल औपचारिकता से अधिक आत्मीयता से भरा रहा।
जिलाधिकारी ने कहा कि बुजुर्ग किसी भी समाज की महत्वपूर्ण पूंजी होते हैं। उनके पास जीवन के लंबे अनुभवों से अर्जित ज्ञान होता है, जो नई पीढ़ी को सही दिशा देने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि वृद्धजनों का सम्मान केवल किसी विशेष दिवस पर किए जाने वाला आयोजन नहीं होना चाहिए। परिवार और समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और सहयोग की भावना लगातार बनी रहनी चाहिए।
बुजुर्गों की समस्याएं सीधे सुनीं
डीएम समीर ने वृद्ध आश्रम की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली और बुजुर्गों से सीधे पूछा कि उन्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं है। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि आश्रम में भोजन, रहने, साफ-सफाई, पेयजल तथा अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति कैसी है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से भी व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि वृद्धजनों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आश्रम में रह रहे लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने और उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने पर जोर दिया।
इस दौरान जिलाधिकारी ने बुजुर्गों के साथ बैठकर उनकी बातें सुनीं। उनके व्यवहार में सहजता और अपनापन देखकर वृद्धजन भी खुलकर अपनी बात रखते नजर आए। कुछ बुजुर्गों ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए तो जिलाधिकारी ने उन्हें ध्यान से सुना। इस संवाद ने कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक बना दिया।
स्वास्थ्य शिविर में वृद्धजनों का परीक्षण
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर वृद्ध आश्रम परिसर में स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम और चिकित्सकों ने आश्रम में रह रहे बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। अलग-अलग स्वास्थ्य जांच के माध्यम से वृद्धजनों की सेहत का जायजा लिया गया।
चिकित्सकों ने बुजुर्गों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आवश्यक परामर्श भी दिया। नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाओं के इस्तेमाल और दैनिक जीवन में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को लेकर भी जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम से जांच प्रक्रिया और वृद्धजनों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को समय-समय पर चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान वृद्धजनों के सम्मान के साथ-साथ समाज में उनके प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी सामने आया। वृद्धावस्था जीवन का ऐसा पड़ाव है, जब व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग, सम्मान और सुरक्षित वातावरण की विशेष आवश्यकता होती है। ऐसे में परिवार, समाज और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि बुजुर्गों का अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां मानवीय मूल्यों और सामाजिक संस्कारों को मजबूती मिलती है। इसलिए वृद्धजनों की देखभाल को केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
आत्मीय व्यवहार से भावुक हुआ माहौल
वृद्ध आश्रम में जिलाधिकारी के दौरे के दौरान कई ऐसे क्षण आए, जब माहौल भावुक हो गया। जिलाधिकारी ने बुजुर्गों से बातचीत करते हुए उनके जीवन की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली और उनका हाल जाना। बुजुर्गों ने भी जिलाधिकारी के प्रति स्नेह व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया।
सम्मान मिलने और अधिकारियों को अपने बीच पाकर वृद्धजनों में उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम के बाद आश्रम का वातावरण काफी सकारात्मक नजर आया। बुजुर्गों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता दिखाई दी।
प्रशासन की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा। इसमें वृद्धजनों से सीधा संवाद, उनकी समस्याओं की जानकारी, आश्रम की व्यवस्थाओं का निरीक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहे। इससे वृद्धजनों की जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का संदेश भी गया।
कार्यक्रम में नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार, समाज कल्याण अधिकारी संजय श्रीवास्तव सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने भी वृद्धजनों की सुविधाओं को लेकर आवश्यक जानकारी प्राप्त की।
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित इस पहल ने यह संदेश दिया कि उम्र का बढ़ना किसी व्यक्ति के सम्मान को कम नहीं करता। बुजुर्गों का अनुभव और जीवन संघर्ष समाज की अमूल्य विरासत है। उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार, आत्मीय संवाद और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सामूहिक सामाजिक दायित्व है। जिलाधिकारी समीर की इस पहल से वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को सम्मान और अपनत्व का एहसास हुआ, वहीं कार्यक्रम ने समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का भी संदेश दिया।