पॉक्सो एक्ट और बाल सुरक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं को किया जागरूक

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

विधिक जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को बताए गए कानूनी अधिकार, गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर

उरई (जालौन)। बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उरई में विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के

निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में अहिंसा दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज उरई और सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट सहित बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना रहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी, शोषण, उत्पीड़न या असुरक्षित स्थिति का सामना होने पर उन्हें चुप रहने के बजाय उचित सहायता हासिल करने के लिए उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। कार्यक्रम में बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ सुरक्षित व्यवहार और आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

पॉक्सो कानून की दी गई जानकारी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए बनाए गए पॉक्सो एक्ट-2012 के प्रमुख प्रावधानों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है और कानून में ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि किसी बच्चे के साथ अपराध होता है या उसे किसी तरह की असुरक्षित परिस्थिति का सामना करना पड़ता है, तो मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

विधिक जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि कानून केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई का माध्यम नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों की जानकारी बच्चों को स्वयं को सुरक्षित रखने में भी मदद करती है।

कानूनी सहायता हासिल करने की प्रक्रिया बताई

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को निःशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित जानकारी भी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि किसी व्यक्ति को कानूनी सहायता की आवश्यकता होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को विधिक सहायता के लिए उपलब्ध टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी दी। बच्चों को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर वे अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के मन से कानूनी प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की झिझक दूर करना और उन्हें यह भरोसा दिलाना था कि जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध है।

चाइल्ड हेल्पलाइन और आपात नंबर की दी जानकारी

सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 112 आपातकालीन सेवा के बारे में भी बताया गया। बच्चों को समझाया गया कि किसी गंभीर या आपात स्थिति में समय गंवाए बिना उचित माध्यम से मदद मांगना जरूरी है।

विशेष रूप से यह जानकारी दी गई कि यदि किसी बच्चे को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो या वह किसी परेशानी में फंस जाए, तो विश्वसनीय वयस्क, शिक्षक, अभिभावक या संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है।

गुड टच-बैड टच पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बारे में समझाया गया तथा उन्हें अपने शरीर और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई।

बच्चों को बताया गया कि यदि कोई व्यवहार उन्हें असहज या असुरक्षित महसूस कराता है, तो उस स्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना जरूरी है। शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया, ताकि बच्चे बिना डर अपनी परेशानी साझा कर सकें।

साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताए

वर्तमान समय में बच्चों और किशोरों के बीच इंटरनेट तथा सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को भी शामिल किया गया। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

उन्हें समझाया गया कि इंटरनेट पर निजी जानकारी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, व्यक्तिगत तस्वीरें या अन्य संवेदनशील सामग्री साझा करने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते समय सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर अभिभावक या शिक्षक को जानकारी देने की सलाह दी गई।

विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली प्रत्येक जानकारी या व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक, संदेश या ऑनलाइन गतिविधि के मामले में सावधानी बरतना साइबर अपराधों से बचाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समझाया कानून

जागरूकता कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और सहज बनाने के उद्देश्य से पॉक्सो एक्ट से संबंधित नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और असुरक्षित परिस्थितियों में सही कदम उठाने का संदेश दिया गया।

व्यावहारिक और संवादात्मक तरीके से प्रस्तुत किए गए कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को गंभीर विषयों को आसानी से समझने में मदद की। आयोजन के दौरान बच्चों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप्पी साधना समाधान नहीं है।

पीएलवी ने लोक अदालत की दी जानकारी

कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर महेश सिंह परिहार ने विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न गतिविधियों और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोक अदालत, सुलह-समझौता केंद्र सहित कानूनी सहायता से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में बताया।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि विवादों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ कानून के तहत उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं की भी जानकारी रखना उपयोगी है। विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या कुसुमलता शाक्यवार तथा सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल की प्रधानाचार्या चन्द्राणी मित्रा सहित विद्यालय प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

इस अवसर पर प्रबंध समिति के सलाहकार प्रमोद कुमार दुबे, डीईओ दीपक नारायण, पीएलवी मनीषा चतुर्वेदी, महेन्द्र कुमार मिश्रा, योगेन्द्र सिंह तखेले, धर्मेन्द्र कुमार, रामदेव चतुर्वेदी समेत अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।

जागरूकता से मजबूत होगी बाल सुरक्षा

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि बाल सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी मिलने से वे असुरक्षित परिस्थितियों को पहचानने तथा जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।

पॉक्सो एक्ट, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपातकालीन सेवा, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर सावधानी जैसे विषयों पर हुई चर्चा ने विद्यार्थियों को कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर जागरूक करने का प्रयास किया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों तक कानून की जानकारी सरल भाषा में पहुंचाने और सुरक्षित वातावरण के प्रति उनकी समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।

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पॉक्सो एक्ट और बाल सुरक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं को किया जागरूक

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 1, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

विधिक जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को बताए गए कानूनी अधिकार, गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर

उरई (जालौन)। बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उरई में विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के

निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में अहिंसा दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज उरई और सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट सहित बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना रहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी, शोषण, उत्पीड़न या असुरक्षित स्थिति का सामना होने पर उन्हें चुप रहने के बजाय उचित सहायता हासिल करने के लिए उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। कार्यक्रम में बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ सुरक्षित व्यवहार और आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

पॉक्सो कानून की दी गई जानकारी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए बनाए गए पॉक्सो एक्ट-2012 के प्रमुख प्रावधानों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है और कानून में ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि किसी बच्चे के साथ अपराध होता है या उसे किसी तरह की असुरक्षित परिस्थिति का सामना करना पड़ता है, तो मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

विधिक जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि कानून केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई का माध्यम नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों की जानकारी बच्चों को स्वयं को सुरक्षित रखने में भी मदद करती है।

कानूनी सहायता हासिल करने की प्रक्रिया बताई

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को निःशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित जानकारी भी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि किसी व्यक्ति को कानूनी सहायता की आवश्यकता होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को विधिक सहायता के लिए उपलब्ध टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी दी। बच्चों को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर वे अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के मन से कानूनी प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की झिझक दूर करना और उन्हें यह भरोसा दिलाना था कि जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध है।

चाइल्ड हेल्पलाइन और आपात नंबर की दी जानकारी

सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 112 आपातकालीन सेवा के बारे में भी बताया गया। बच्चों को समझाया गया कि किसी गंभीर या आपात स्थिति में समय गंवाए बिना उचित माध्यम से मदद मांगना जरूरी है।

विशेष रूप से यह जानकारी दी गई कि यदि किसी बच्चे को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो या वह किसी परेशानी में फंस जाए, तो विश्वसनीय वयस्क, शिक्षक, अभिभावक या संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है।

गुड टच-बैड टच पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बारे में समझाया गया तथा उन्हें अपने शरीर और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई।

बच्चों को बताया गया कि यदि कोई व्यवहार उन्हें असहज या असुरक्षित महसूस कराता है, तो उस स्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना जरूरी है। शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया, ताकि बच्चे बिना डर अपनी परेशानी साझा कर सकें।

साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताए

वर्तमान समय में बच्चों और किशोरों के बीच इंटरनेट तथा सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को भी शामिल किया गया। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

उन्हें समझाया गया कि इंटरनेट पर निजी जानकारी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, व्यक्तिगत तस्वीरें या अन्य संवेदनशील सामग्री साझा करने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते समय सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर अभिभावक या शिक्षक को जानकारी देने की सलाह दी गई।

विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली प्रत्येक जानकारी या व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक, संदेश या ऑनलाइन गतिविधि के मामले में सावधानी बरतना साइबर अपराधों से बचाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समझाया कानून

जागरूकता कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और सहज बनाने के उद्देश्य से पॉक्सो एक्ट से संबंधित नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और असुरक्षित परिस्थितियों में सही कदम उठाने का संदेश दिया गया।

व्यावहारिक और संवादात्मक तरीके से प्रस्तुत किए गए कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को गंभीर विषयों को आसानी से समझने में मदद की। आयोजन के दौरान बच्चों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप्पी साधना समाधान नहीं है।

पीएलवी ने लोक अदालत की दी जानकारी

कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर महेश सिंह परिहार ने विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न गतिविधियों और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोक अदालत, सुलह-समझौता केंद्र सहित कानूनी सहायता से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में बताया।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि विवादों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ कानून के तहत उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं की भी जानकारी रखना उपयोगी है। विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या कुसुमलता शाक्यवार तथा सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल की प्रधानाचार्या चन्द्राणी मित्रा सहित विद्यालय प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

इस अवसर पर प्रबंध समिति के सलाहकार प्रमोद कुमार दुबे, डीईओ दीपक नारायण, पीएलवी मनीषा चतुर्वेदी, महेन्द्र कुमार मिश्रा, योगेन्द्र सिंह तखेले, धर्मेन्द्र कुमार, रामदेव चतुर्वेदी समेत अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।

जागरूकता से मजबूत होगी बाल सुरक्षा

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि बाल सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी मिलने से वे असुरक्षित परिस्थितियों को पहचानने तथा जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।

पॉक्सो एक्ट, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपातकालीन सेवा, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर सावधानी जैसे विषयों पर हुई चर्चा ने विद्यार्थियों को कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर जागरूक करने का प्रयास किया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों तक कानून की जानकारी सरल भाषा में पहुंचाने और सुरक्षित वातावरण के प्रति उनकी समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।