जून 29, 2026

‘विकसित गांव–विकसित भारत’ के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त रोडमैप तैयार, 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होगी ‘विकसित भारत जय राम जी’ योजना

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नई दिल्ली:
ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन’ का आयोजन किया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित गांव–विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच एक साझा कार्ययोजना तैयार करना था।

यह सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा क्योंकि पहली बार देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों ने एक ही मंच पर एकत्र होकर ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर व्यापक चर्चा की।

विकसित भारत की नींव हैं विकसित गांव

सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके गांवों में बसती है। उन्होंने कहा कि यदि देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो सबसे पहले गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “गांव केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि विकास के वाहक हैं।” उनका कहना था कि गांवों में आर्थिक गतिविधियों, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किए बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता।

केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय पर जोर

सम्मेलन के दौरान ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई तथा राज्यों के अनुभवों और सफल मॉडलों को साझा किया गया। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, पारदर्शिता और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित करें।

इसके अलावा डिजिटल तकनीक के उपयोग, ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विस्तार, महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, रोजगार सृजन और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

1 जुलाई से लागू होगी ‘विकसित भारत जय राम जी’ योजना

सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में ‘विकसित भारत जय राम जी’ योजना रही। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि यह योजना 1 जुलाई से पूरे देश में लागू की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना, जनभागीदारी को बढ़ाना तथा गांवों के समग्र विकास को नई गति देना है। योजना के तहत स्थानीय समुदायों, पंचायतों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

सरकार का मानना है कि यदि गांवों में बेहतर सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे तो पलायन कम होगा और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे कृषि के साथ-साथ ग्रामीण उद्योग, स्वरोजगार और उद्यमिता को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और साझा रणनीति से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का प्रभाव और अधिक व्यापक हो सकता है।

2047 के लक्ष्य पर केंद्रित रणनीति

सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ग्रामीण विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना होगा। इसके लिए योजनाओं की नियमित निगरानी, तकनीकी नवाचार, पारदर्शी प्रशासन और जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि “विकसित गांव ही विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं।” पहली बार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों का एक मंच पर आना सहकारी संघवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 1 जुलाई से शुरू होने वाली ‘विकसित भारत जय राम जी’ योजना के माध्यम से सरकार ग्रामीण भारत के समग्र विकास को नई गति देने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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