चिराग पासवान ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- सदन को बाधित करने के बजाय जनहित के मुद्दे उठाने चाहिए

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पटना: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने विपक्ष की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद और विधानसभा जनता की समस्याओं पर चर्चा और समाधान खोजने के महत्वपूर्ण मंच हैं। उनके मुताबिक विपक्ष को सदनों की कार्यवाही बाधित करने या बहिष्कार करने के बजाय वहां मौजूद रहकर सरकार से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाना चाहिए।

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व्यापारियों से जुड़े एक कॉन्क्लेव में बोलते हुए पासवान ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि केंद्र में राहुल गांधी से लेकर बिहार में नेता प्रतिपक्ष तक कई मौकों पर सदन की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से चलने नहीं दे रहे हैं।

व्यापारियों की समस्याओं पर हुआ मंथन

कॉन्क्लेव का उद्देश्य व्यापारियों की रोजमर्रा की परेशानियों और कारोबार से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से आए व्यापारियों ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की नीतियों को लेकर अपने सुझाव रखे।

पासवान ने कहा कि व्यापार क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए नीतिगत बदलाव करना आवश्यक है। व्यापारियों की ओर से दिए गए सुझावों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने और समाधान की दिशा में काम करने की बात भी कही गई।

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का जिक्र

अपने संबोधन में पासवान ने केंद्र सरकार की नीतियों और सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने इसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि प्रशासन तथा विभिन्न विभागों में जरूरी सुधारों पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने भारत के बढ़ते वैश्विक व्यापारिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार भारत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे भारतीय कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते का उल्लेख

पासवान ने यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौते का जिक्र करते हुए इसे बेहद महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने और भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।

बिहार के स्थानीय मुद्दों पर मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन

पासवान ने प्रदेश स्तर की समस्याओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बिहार से जुड़े मुद्दों को लेकर वह मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और संबंधित समस्याओं को उनके सामने रखेंगे।

उन्होंने विशेष रूप से छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से जुड़े मामलों पर ध्यान देने की बात कही। पासवान ने कहा कि उचित मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और अभ्यर्थियों की आवाज सुनी जानी चाहिए।

युवाओं के आंदोलन और सदन की भूमिका पर जोर

पासवान ने कहा कि मौजूदा समय में Gen-Z के सामने शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं समेत कई चुनौतियां हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि युवाओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, तो जनप्रतिनिधियों को उन मुद्दों को संसद और विधानसभा में उठाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि केवल मार्च या विरोध प्रदर्शन करने के बजाय सदन में उपस्थित रहकर मुद्दों पर चर्चा करना अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है।

छात्रों और अभ्यर्थियों के समर्थन की बात

चिराग पासवान ने कहा कि वह उन छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ हैं जो अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने पीएचडी अभ्यर्थियों की समस्याओं का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके मुद्दों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

उन्होंने अभ्यर्थियों से जुड़े नोटिफिकेशन और भर्ती प्रक्रिया के मामलों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, मांग सामने आने के बाद संबंधित विषयों पर तेजी से कार्रवाई की गई।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार की चर्चा

पासवान ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार से अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा। इस संदर्भ में परीक्षा के अलग-अलग चरणों और व्यवस्था में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किए जाने की बात कही गई।

2047 के भारत में युवाओं की भूमिका

अपने संबोधन में पासवान ने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवा पीढ़ी की भागीदारी जरूरी होगी।

उन्होंने Gen-Z को भविष्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पीढ़ी के रूप में पेश किया। उनका कहना था कि युवाओं की समस्याओं को समझने के साथ-साथ उन्हें निर्णय लेने और नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।

1974 के छात्र आंदोलन का संदर्भ

पासवान ने 1974 के जयप्रकाश नारायण आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के राजनीतिक इतिहास में छात्र आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि उस दौर के आंदोलनों से जुड़े कई लोग आगे चलकर देश और राज्यों की राजनीति में प्रमुख भूमिका में आए।

उन्होंने रामविलास पासवान, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं के राजनीतिक सफर का संदर्भ भी इसी व्यापक छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में दिया।

युवाओं से व्यवस्था में बदलाव का हिस्सा बनने की अपील

चिराग पासवान ने युवाओं से लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय के साथ व्यवस्था में सुधार जरूरी है और युवा इस बदलाव के महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं।

उनके संबोधन का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि युवाओं की समस्याओं को केवल आंदोलन या विरोध तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्हें नीति निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रक्रिया में भी प्रभावी भागीदारी मिलनी चाहिए।

इस दौरान व्यापार, रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। पासवान ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाने के साथ-साथ सरकार द्वारा सुधारों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उठाए जा रहे कदमों को भी रेखांकित किया।

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