डेंगू बुखार की पहचान कैसे करें? जानिए शुरुआती लक्षण, चेतावनी संकेत और जांच का सही तरीका

बरसात और उसके बाद के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। यह एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। डेंगू के शुरुआती लक्षण कई दूसरी वायरल बीमारियों जैसे दिखाई दे सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पक्की पहचान करना हमेशा संभव नहीं होता। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार रक्त जांच महत्वपूर्ण होती है।
समय रहते डेंगू की पहचान करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। खास तौर पर बुखार कम होने के आसपास दिखाई देने वाले कुछ चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डेंगू क्या है?
डेंगू डेंगू वायरस से होने वाला संक्रमण है। इसका मुख्य वाहक संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर है। यह मच्छर आम तौर पर दिन में भी काटता है। संक्रमित मच्छर के काटने के बाद लक्षण सामान्यतः 4 से 10 दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं।
हर संक्रमित व्यक्ति में स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कई लोगों में संक्रमण हल्का हो सकता है, जबकि कुछ लोगों में तेज बुखार और अन्य लक्षण विकसित होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति को तेज बुखार होने पर केवल घरेलू अनुमान के आधार पर डेंगू मान लेना या खारिज कर देना उचित नहीं है।
डेंगू बुखार की शुरुआती पहचान
डेंगू का सबसे प्रमुख लक्षण तेज बुखार है। इसके साथ कई अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। WHO के अनुसार डेंगू में सामान्यतः निम्न समस्याएं देखी जा सकती हैं:
- तेज बुखार
- सिर में तेज दर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- मतली या उल्टी
- शरीर पर दाने
- कमजोरी और थकान
- कुछ मामलों में ग्रंथियों में सूजन
ये लक्षण सामान्य वायरल संक्रमणों में भी हो सकते हैं। इसलिए केवल सिरदर्द, बुखार या शरीर दर्द को डेंगू की निश्चित पहचान नहीं माना जा सकता।
तेज बुखार के साथ ये लक्षण हों तो रहें सतर्क
अगर तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द तथा मतली या त्वचा पर दाने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। WHO के अनुसार डेंगू की पहचान में मरीज के लक्षणों के साथ बीमारी के क्षेत्र और अन्य परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मलेरिया, चिकनगुनिया और कुछ अन्य संक्रमणों के लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना किसी बीमारी को निश्चित मान लेना सही नहीं है।
बुखार उतरना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं
डेंगू को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होने के बाद भी मरीज की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत अक्सर बीमारी के शुरुआती दिनों के बाद दिखाई दे सकते हैं। WHO के मुताबिक गंभीर अवस्था का जोखिम उस समय भी हो सकता है जब तापमान कम होने लगे।
इसलिए यदि बुखार उतरने के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, असामान्य रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आएं तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डेंगू के गंभीर चेतावनी संकेत
कुछ लक्षण गंभीर डेंगू की ओर संकेत कर सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- पेट में तेज दर्द या पेट छूने पर अधिक दर्द
- लगातार उल्टी
- नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव
- उल्टी या मल में खून
- तेज या कठिन सांस
- अत्यधिक कमजोरी
- बेचैनी या असामान्य सुस्ती
- बहुत अधिक प्यास लगना
- त्वचा का पीला, फीका या ठंडा महसूस होना
ऐसे संकेत दिखाई देने पर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। गंभीर डेंगू में अस्पताल में उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।
डेंगू की जांच कैसे होती है?
डेंगू की पुष्टि के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और बीमारी की अवधि को देखते हुए रक्त जांच की सलाह दे सकते हैं। बीमारी के शुरुआती चरण में NS1 एंटीजन जैसी जांच उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा वायरस या उसके आनुवंशिक पदार्थ की पहचान करने वाली जांच तथा बाद के चरण में एंटीबॉडी आधारित जांच भी इस्तेमाल की जा सकती है।
कौन-सी जांच कब कराई जाए, यह बीमारी के कितने दिन हुए हैं और स्थानीय चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए जांच की रिपोर्ट को स्वयं समझकर इलाज शुरू करने के बजाय डॉक्टर से उसकी व्याख्या कराना बेहतर है।
प्लेटलेट कम होना ही डेंगू की पहचान नहीं
डेंगू की चर्चा में प्लेटलेट काउंट का अक्सर उल्लेख होता है, लेकिन केवल प्लेटलेट कम होने को डेंगू की निश्चित पहचान नहीं माना जा सकता। इसी तरह सामान्य प्लेटलेट रिपोर्ट होने से भी शुरुआती चरण में डेंगू को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार रक्त की पूरी जांच और अन्य परीक्षणों को मरीज के लक्षणों तथा बीमारी की अवस्था के साथ देखते हैं। इसलिए सोशल मीडिया या आसपास के लोगों की सलाह के आधार पर केवल प्लेटलेट संख्या देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
डेंगू में क्या सावधानी रखें?
डेंगू का कोई ऐसा विशेष एंटीवायरल उपचार नहीं है जो वायरस को सीधे खत्म कर दे। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों और मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण हो सकता है। बुखार या दर्द के लिए कौन-सी दवा उपयुक्त है, यह डॉक्टर से पूछना चाहिए। WHO के अनुसार डेंगू में एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।
किसी भी दवा की मात्रा या संयोजन स्वयं तय करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना विशेष रूप से जरूरी है।
मच्छरों से बचाव भी जरूरी
डेंगू की रोकथाम में मच्छरों के काटने से बचना और मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करना महत्वपूर्ण है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। पानी की टंकियों और बर्तनों को ढककर रखें तथा पानी जमा करने वाले कंटेनरों को नियमित रूप से साफ करें। मच्छर दिन में भी काट सकते हैं, इसलिए दिन के समय भी मच्छरों से बचाव जरूरी है।
घर में किसी व्यक्ति को डेंगू होने पर भी मच्छरों से बचाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि संक्रमित मच्छर के माध्यम से वायरस आगे न फैल सके।
निष्कर्ष
डेंगू बुखार की पहचान में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी या त्वचा पर दाने जैसे लक्षण महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। लेकिन ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर डेंगू की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती। चिकित्सकीय जांच और जरूरत के अनुसार रक्त परीक्षण जरूरी हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होने के बाद भी मरीज की निगरानी जारी रखी जाए। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी जैसे चेतावनी संकेत दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय देखभाल गंभीर डेंगू के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। डेंगू का संदेह होने पर डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।