चित्रकूट में डोंडा माफी टैंक का डीएम और एसपी ने किया निरीक्षण, जलाशय की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
चित्रकूट। जिले के ग्राम पंचायत डोंडा माफी स्थित डोंडा माफी टैंक में लगातार बढ़े जलस्तर और अतिरिक्त पानी की निकासी को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इसी क्रम में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने जलाशय का स्थलीय निरीक्षण कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने टैंक की सुरक्षा, जलस्तर, स्पिलवे गेट और क्षतिग्रस्त हिस्से में चल रहे मरम्मत कार्य की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों से ली।

निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का सीधा प्रभाव डोंडा माफी टैंक पर पड़ा। बारिश के कारण जलाशय में अचानक बड़ी मात्रा में पानी पहुंचने लगा, जिससे टैंक का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग ने समय रहते अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए स्पिलवे गेट खोलने की कार्रवाई की।
मध्य प्रदेश में हुई बारिश से बढ़ी टैंक में पानी की आवक
अधिशासी अभियंता सिंचाई प्रखंड प्रथम कर्वी एसके प्रसाद ने अधिकारियों को जानकारी देते हुए बताया कि 27 और 28 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के वीरसिंहपुर तहसील क्षेत्र में करीब 135.20 मिलीमीटर तथा मझगवां तहसील क्षेत्र में लगभग 81.60 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण डोंडा माफी टैंक में पानी की आवक अचानक बढ़ गई।
विभाग के अनुसार जलाशय में करीब 6500 क्यूसेक से अधिक पानी आने लगा था। पानी की तेज आवक के कारण टैंक का जलस्तर लगातार ऊपर जाने लगा। ऐसी परिस्थिति में जलाशय की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
रात में खोले गए दोनों स्पिलवे गेट
जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए 29 अगस्त 2026 को सुबह करीब तीन बजे डोंडा माफी टैंक के दोनों स्पिलवे गेट खोल दिए गए। इन गेटों के माध्यम से जलाशय से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दोनों स्पिलवे गेटों की संयुक्त क्षमता लगभग 3500 क्यूसेक है, जबकि उस समय टैंक में पानी की आवक इससे काफी अधिक, यानी करीब 6500 क्यूसेक से ऊपर बनी हुई थी। पानी की आवक और निकासी की क्षमता में अंतर होने के कारण जलाशय का जलस्तर तेजी से नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया।
अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए गेट खुले होने के बावजूद जब जलस्तर एफआरएल यानी निर्धारित अधिकतम जलस्तर से ऊपर जाने की स्थिति बनने लगी, तो टैंक की सुरक्षा के लिए तत्काल वैकल्पिक जल निकासी की व्यवस्था करनी पड़ी।
सुरक्षा के लिए स्पिलवे के बाईं ओर से निकाला गया अतिरिक्त पानी
जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करने और टैंक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्पिलवे गेट के बाईं ओर के हिस्से से अतिरिक्त पानी की निकासी का रास्ता बनाया गया। इससे तेज गति से आ रहे पानी को बाहर निकलने में मदद मिली और जलाशय के ऊपर दबाव बढ़ने की स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
प्रशासन और सिंचाई विभाग के अनुसार वर्तमान समय में डोंडा माफी टैंक का जलस्तर एफआरएल से नीचे है। जलाशय के दोनों स्पिलवे गेट खुले हुए हैं और पानी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
अधिकारियों की लगातार निगरानी
डोंडा माफी टैंक की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग ने मौके पर निगरानी बढ़ा दी है। सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर लगातार जलाशय स्थल पर मौजूद रहकर जलस्तर तथा पानी की निकासी पर नजर रख रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जलाशय की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और टैंक पूरी तरह सुरक्षित है। इसके बावजूद बारिश और जल आवक की परिस्थितियों को देखते हुए विभागीय टीम को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने टैंक की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को देखा। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि जलाशय के आसपास किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और पानी की निकासी व्यवस्थित तरीके से होती रहे।
क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम जारी
अतिरिक्त पानी की निकासी के दौरान स्पिलवे के बाईं ओर बने जल निकासी मार्ग के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा है। सिंचाई विभाग द्वारा इस क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शीघ्र पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि जलाशय की संरचना और जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत रखना आवश्यक है, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान पानी का सुरक्षित तरीके से संचयन और निकासी की जा सके।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि मरम्मत कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और संबंधित तकनीकी मानकों के अनुरूप काम कराया जाए। उनका जोर इस बात पर रहा कि टैंक को भविष्य में अधिक प्रभावी तरीके से जल संचयन के लिए उपयोग में लाया जा सके।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जल संचयन
डोंडा माफी टैंक में पर्याप्त मात्रा में पानी का संचयन आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जलाशय में एकत्रित पानी का उपयोग कृषि सहित विभिन्न आवश्यक कार्यों में किया जा सकता है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए मदद मिल सकती है।
प्रशासन का उद्देश्य केवल वर्तमान स्थिति को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि टैंक की जल संचयन क्षमता को सुरक्षित बनाए रखना भी है। यदि जलाशय में पानी व्यवस्थित रूप से संरक्षित रहता है तो इसका लाभ आसपास के ग्रामीणों को लंबे समय तक मिल सकता है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत जल्द पूरी होने के बाद जलाशय में पानी को दोबारा बेहतर तरीके से संग्रहित किया जा सके। इससे भविष्य में कृषि और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बारिश के दौरान प्रशासन की बढ़ी सतर्कता
चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के दौरान नदियों, जलाशयों और बांधों के जलस्तर में होने वाले बदलाव को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। डोंडा माफी टैंक में पानी की अचानक बढ़ी आवक ने भी विभागीय अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए प्रेरित किया।
फिलहाल जलाशय का जलस्तर एफआरएल से नीचे बताया गया है और दोनों स्पिलवे गेट खुले हैं। मौके पर तैनात सिंचाई विभाग की टीम जलस्तर और पानी की आवक-निकासी की निगरानी कर रही है।
प्रशासन की प्राथमिकता जलाशय की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने विभागीय टीम को किसी भी संभावित बदलाव की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
डोंडा माफी टैंक का निरीक्षण कर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मौके की वास्तविक स्थिति को समझा और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। प्रशासन की निगरानी और सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम की मौजूदगी से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। वहीं क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी होने के बाद जलाशय की व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है।
ब्यूरो रिपोर्ट : संजय मिश्रा