नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, 11 दिन बाद सुरंग से दो लोगों की जिंदगी बची

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काठमांडू: नेपाल में लगातार हुई मूसलाधार बारिश, ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आई विनाशकारी बाढ़ तथा भूस्खलन ने कई क्षेत्रों में भारी तबाही मचा दी है। प्राकृतिक आपदा ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर सड़कें, पुल, बाजार और अन्य जरूरी ढांचे बाढ़ के तेज बहाव तथा भूस्खलन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

इस भयावह स्थिति के बीच एक राहत देने वाली घटना सामने आई है। त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग में लंबे समय से फंसे दो कर्मचारियों को करीब 11 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। संजय साह और कबीर महर्जन को 240 घंटे से अधिक समय तक सुरंग में फंसे रहने के बाद जीवित बचाया गया। बचाव दल के लिए यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन आखिरकार दोनों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली।

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11 दिनों तक सुरंग में फंसे रहे कर्मचारी

आपदा के दौरान जलविद्युत परियोजना से जुड़ी सुरंग में फंसे दोनों कर्मचारियों तक पहुंचना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती थी। सुरंग के आसपास बने कठिन हालात और आपदा से प्रभावित क्षेत्र के कारण राहत कार्य आसानी से आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

कई घंटों की कोशिशों के बाद बचाव दल ने दोनों कर्मचारियों को बाहर निकाला। 11 दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहने के बावजूद उनका जीवित मिलना राहत एवं बचाव अभियान से जुड़े लोगों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

नेपाल के प्रभावित इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई सड़क मार्ग टूट गए हैं और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण विभिन्न इलाकों के बीच संपर्क बाधित हुआ है। बाजारों और स्थानीय कारोबारी क्षेत्रों में भी पानी और मलबे से भारी नुकसान की खबर है।

देवीघाट में क्षतिग्रस्त पुल को दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन के साथ स्थानीय लोग भी पुनर्निर्माण और राहत कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पहले संपर्क व्यवस्था बहाल करने और इसके बाद अन्य बुनियादी सुविधाओं को सामान्य करने पर जोर दिया जा रहा है।

राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे प्रभावित लोग

आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, चिकित्सा सहायता और दूसरी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर परिवारों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

लगातार खराब मौसम के कारण राहत एजेंसियों को कई इलाकों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में नए भूस्खलन का खतरा राहत एवं बचाव दलों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर रहा है।

भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बढ़ी चिंता

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों में भी देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हुई। वहीं उत्तराखंड के चंपावत में एसडीआरएफ की टीमों को बचाव अभियान में लगाया गया।

पहाड़ी इलाकों में बारिश और भूस्खलन के कारण राहत दलों को सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ रहा है। नदी का बढ़ता जलस्तर और खराब सड़क संपर्क प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को मुश्किल बना रहा है।

प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए मजबूत तैयारी जरूरी

नेपाल में हुई इस त्रासदी ने पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। पहाड़ों में अत्यधिक बारिश, ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं और अचानक आने वाली बाढ़ कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं।

ऐसे इलाकों में समय रहते मौसम संबंधी चेतावनी पहुंचाना, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है। साथ ही पुलों, सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखकर विकसित करने की आवश्यकता है।

पुनर्निर्माण की राह होगी चुनौतीपूर्ण

फिलहाल नेपाल में प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाना, लापता लोगों की तलाश करना और जरूरी संपर्क मार्गों को बहाल करना है। इसके बाद क्षतिग्रस्त पुलों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण का बड़ा काम सामने होगा।

11 दिन बाद दो कर्मचारियों का सुरंग से सुरक्षित बाहर निकलना इस भीषण आपदा के बीच उम्मीद की एक महत्वपूर्ण खबर है। हालांकि, व्यापक नुकसान से उबरने में नेपाल को लंबा समय लग सकता है। आने वाले दिनों में राहत कार्यों के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

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