प्रयागराज में शिक्षक भर्ती को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, नियमों और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल

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प्रयागराज। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रयागराज में बड़ी संख्या में छात्रों और अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर शिक्षा सेवा चयन आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने लंबे समय से प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती नहीं होने, शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी UPTET की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती परीक्षाओं के नियमों में अचानक किए जा रहे बदलावों पर नाराजगी जताई। छात्रों का कहना है कि वर्षों से सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती को लेकर लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है। उनका दावा है कि पिछले करीब आठ से नौ वर्षों में प्राथमिक स्तर पर नियमित शिक्षक भर्ती का अभाव रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की उम्र बढ़ रही है और उनकी तैयारी के बावजूद रोजगार का अवसर लगातार टलता जा रहा है।

Protest AI Generated syemboli photo

प्राथमिक शिक्षक भर्ती का इंतजार

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का सबसे प्रमुख मुद्दा प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी किए जाने की मांग है। उनका कहना है कि भर्ती को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन अभ्यर्थियों को स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाती।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि सरकार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती की योजना बना रही है तो इसकी विस्तृत अधिसूचना सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसमें पदों की संख्या, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा कार्यक्रम और चयन प्रक्रिया जैसी सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।

छात्रों का कहना है कि पारदर्शी विज्ञापन जारी होने से अफवाहों पर रोक लगेगी और अभ्यर्थी अपनी तैयारी को सही दिशा में आगे बढ़ा सकेंगे।

UPTET के परिणाम और सामान्यीकरण को लेकर नाराजगी

प्रदर्शन का दूसरा प्रमुख मुद्दा UPTET के परिणाम और परीक्षा में अपनाई गई सामान्यीकरण प्रक्रिया से जुड़ा है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा और परिणाम प्रक्रिया में ऐसे बदलाव किए गए जिनसे उम्मीदवारों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

छात्र विशेष रूप से सामान्यीकरण यानी normalization की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि अलग-अलग पालियों में परीक्षा आयोजित की जाती है तो अंकों के सामान्यीकरण के लिए अपनाए गए नियमों को पहले से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग सामान्यीकरण की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करे और बताए कि अलग-अलग अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों पर इसका प्रभाव किस प्रकार पड़ा। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता तभी सुनिश्चित होगी जब परीक्षा के नियम और परिणाम तैयार करने की पद्धति सभी के सामने स्पष्ट हो।

TGT और PGT नियमों में बदलाव का मुद्दा

प्रदर्शनकारियों ने TGT और PGT परीक्षाओं से संबंधित नियमों को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई। छात्रों का आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण पात्रता और परीक्षा संबंधी प्रावधानों की जानकारी उन्हें पर्याप्त समय पहले नहीं मिली।

TGT यानी प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक परीक्षा में TET को लेकर सामने आए प्रावधानों ने भी अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ाई है। छात्रों का कहना है कि यदि किसी परीक्षा के लिए अतिरिक्त पात्रता अनिवार्य की जाती है तो इसकी जानकारी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।

इसी तरह PGT यानी स्नातकोत्तर शिक्षक परीक्षा में 50 प्रतिशत से संबंधित प्रावधान को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि नियमों में अचानक बदलाव से उन युवाओं पर असर पड़ सकता है जिन्होंने पहले से मौजूद नियमों को ध्यान में रखकर अपनी तैयारी की है।

उनकी मांग है कि किसी भी भर्ती परीक्षा में बदलाव करने से पहले पर्याप्त सार्वजनिक सूचना दी जाए और अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए उचित अवसर मिले।

छात्रों की मुख्य मांगें

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने कई मांगें सामने रखीं। इनमें प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करना प्रमुख है। इसके अलावा UPTET के परिणाम में सामान्यीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करने और परीक्षा से संबंधित नियमों में पारदर्शिता लाने की मांग भी की गई।

छात्रों का कहना है कि शिक्षक भर्ती केवल एक परीक्षा नहीं है, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए आयोग और संबंधित विभाग को अभ्यर्थियों की शंकाओं का आधिकारिक जवाब देना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा न हो।

लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं की चिंता

शिक्षक भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता भर्ती प्रक्रिया की अनिश्चितता है। कई अभ्यर्थी वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनके अनुसार भर्ती में देरी होने से न केवल आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है, बल्कि उम्र संबंधी पात्रता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए और आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी करना चाहिए। इससे अभ्यर्थियों को यह पता रहेगा कि किस परीक्षा की तैयारी किस समय करनी है।

राजनीतिक प्रसंग में पवन ने साझा की पुरानी याद

वीडियो के दूसरे हिस्से में पवन ने अपने राजनीतिक जीवन से जुड़ी एक व्यक्तिगत स्मृति साझा की। उन्होंने समाजवादी राजनीति के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया।

पवन के अनुसार, जेल से रिहा होने के बाद मुलायम सिंह यादव उनके फैजाबाद स्थित घर पहुंचे थे। इस मुलाकात को उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक बताया। उनके मुताबिक मुलायम सिंह यादव ने उनके परिवार के साथ भोजन किया और उस समय उन्हें प्रोत्साहित किया।

पवन ने बताया कि उस मुलाकात के दौरान मुलायम सिंह यादव ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सकारात्मक बात कही थी। पवन के अनुसार, वरिष्ठ नेता ने उन्हें आगे बढ़ने और राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह प्रसंग पवन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संबंध और विश्वास से जुड़ी स्मृति के रूप में प्रस्तुत किया।

राजनीतिक निष्ठा पर पिता की सीख

पवन ने अपनी राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में अपने पिता की सीख का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें राजनीतिक निष्ठा को लेकर स्पष्ट सलाह दी थी। पवन के अनुसार, उनके पिता का मानना था कि राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन व्यक्ति को अपने सिद्धांत और निष्ठा को आसानी से नहीं बदलना चाहिए।

पवन ने इसी संदर्भ में मुलायम सिंह यादव के परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुराने राजनीतिक संबंध और परिवार से मिला सम्मान उनके लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।

उनकी बातों से यह संकेत मिलता है कि उनकी राजनीतिक सोच में व्यक्तिगत संबंध, पुराने विश्वास और परिवार से मिली सीख की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

एक वीडियो में शिक्षा और राजनीति के दो अलग मुद्दे

वीडियो के शुरुआती हिस्से में जहां छात्रों की आवाज शिक्षक भर्ती, परीक्षा प्रणाली और नियमों की पारदर्शिता को लेकर सामने आती है, वहीं बाद के हिस्से में पवन अपने राजनीतिक जीवन की पुरानी स्मृतियों को साझा करते दिखाई देते हैं।

प्रयागराज का प्रदर्शन बताता है कि शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा नियमों को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं। वहीं पवन द्वारा सुनाया गया राजनीतिक प्रसंग व्यक्तिगत संबंधों और राजनीतिक निष्ठा के एक अलग पहलू को सामने रखता है।

फिलहाल छात्रों की प्रमुख मांग यही है कि शिक्षक भर्ती और परीक्षाओं से जुड़े सभी नियमों को स्पष्ट तरीके से सार्वजनिक किया जाए। प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर आधिकारिक सूचना और UPTET सामान्यीकरण प्रक्रिया पर स्पष्टता मिलने से अभ्यर्थियों की कई शंकाओं का समाधान हो सकता है।

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