BRICS 2026: शिखर सम्मेलन से पांच दिन पहले भारत के नेतृत्व में नई वैश्विक साझेदारी की तैयारी

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नई दिल्ली: BRICS 2026 के ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में अब केवल पांच दिन शेष रह गए हैं। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक और सतत विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को प्राथमिकता देते हुए एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया है, जिसमें विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को अधिक प्रभावी स्थान मिले।

भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। विदेश मंत्रालय से संबंधित आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत की अध्यक्षता का प्रमुख विषय “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” है। इस दृष्टिकोण के तहत BRICS देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वित्तीय, तकनीकी और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

बदलती दुनिया में BRICS की बढ़ती भूमिका

आज दुनिया कई तरह की चुनौतियों से गुजर रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी बदलाव और डिजिटल असमानता जैसे मुद्दे सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण बन चुके हैं। ऐसे समय में BRICS जैसे मंच की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत का मानना है कि इन चुनौतियों का समाधान केवल किसी एक देश के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए देशों के बीच संवाद, अनुभवों का आदान-प्रदान और साझा प्रयास जरूरी हैं। BRICS 2026 के माध्यम से भारत इसी बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।

लचीलेपन पर भारत का जोर

भारत की BRICS अध्यक्षता में Resilience यानी लचीलापन एक प्रमुख आधार है। इसका अर्थ केवल आर्थिक संकटों से निपटने की क्षमता नहीं है, बल्कि खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा, वित्त और आपूर्ति शृंखलाओं को भी अधिक मजबूत बनाना है।

कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया ने यह महसूस किया कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में किसी भी बड़े व्यवधान का असर कई देशों पर एक साथ पड़ सकता है। ऐसे में BRICS देशों के बीच बेहतर समन्वय और भरोसेमंद आपूर्ति तंत्र भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है।

खाद्य सुरक्षा भी इस एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। BRICS देशों के बीच कृषि सहयोग, ग्रामीण विकास और खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर पहले भी जोर दिया गया है।

नवाचार बनेगा विकास का आधार

BRICS 2026 में Innovation यानी नवाचार को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। तकनीक तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था और समाज को बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिनटेक, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करने वाले हैं।

भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अपने अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने की दिशा में लगातार काम किया है। BRICS मंच के माध्यम से सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझा करने और नवाचार आधारित समाधानों को बढ़ावा देने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS Young Diplomats Forum में भी Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability से जुड़े परिणामों पर काम किया गया। यह दिखाता है कि भारत इन चार प्राथमिकताओं को केवल शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इन्हें संस्थागत सहयोग का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सहयोग से मजबूत होगी साझेदारी

BRICS का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सदस्य देशों के बीच Cooperation यानी सहयोग को बढ़ाना है। आर्थिक और वित्तीय सहयोग के साथ-साथ शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

भारत की सोच है कि अलग-अलग देशों की क्षमताओं और अनुभवों को एक साथ लाकर साझा विकास के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इससे न केवल सदस्य देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे, बल्कि विकासशील देशों की सामूहिक आवाज भी वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी बन सकती है।

BRICS के तीन व्यापक सहयोग स्तंभों—राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्क—के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में भारत की अध्यक्षता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सतत विकास पर विशेष ध्यान

भारत के BRICS एजेंडे का चौथा प्रमुख आधार Sustainability यानी सतत विकास है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियां अब केवल पर्यावरण से जुड़े मुद्दे नहीं रह गए हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि और मानव सुरक्षा से भी सीधे जुड़ चुके हैं।

भारत सतत विकास को आर्थिक प्रगति के साथ जोड़कर देखने की वकालत करता रहा है। स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल तकनीक जैसे क्षेत्रों में BRICS देशों के बीच सहयोग भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक विकास की प्रक्रिया पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों की कीमत पर न हो।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती

BRICS को ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण मंचों में से एक माना जाता है। भारत अपनी अध्यक्षता के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है।

विकासशील देशों के सामने वित्त, तकनीक, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धता जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में BRICS के भीतर सहयोग के जरिए इन मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।

दिल्ली शिखर सम्मेलन से बड़ी उम्मीदें

नई दिल्ली में होने वाला आगामी BRICS शिखर सम्मेलन भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक स्थिति, सतत विकास, तकनीकी सहयोग, नवाचार, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

भारत के लिए यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी नहीं, बल्कि अपनी समावेशी, टिकाऊ और सहयोग आधारित वैश्विक दृष्टि को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।

भारत का संदेश—साझा भविष्य के लिए साझा प्रयास

BRICS 2026 की उलटी गिनती अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। पांच दिन बाद जब दुनिया की निगाहें नई दिल्ली पर होंगी, तब भारत के सामने अपनी अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को ठोस सहयोग में बदलने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

लचीलापन दुनिया को संकटों से मुकाबला करने की क्षमता देगा, नवाचार विकास के नए रास्ते खोलेगा, सहयोग देशों को एक-दूसरे के करीब लाएगा और सतत विकास आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करेगा।

BRICS 2026 के माध्यम से भारत का व्यापक संदेश स्पष्ट है—भविष्य केवल प्रतिस्पर्धा से नहीं, बल्कि सहयोग, नवाचार, समावेश और टिकाऊ विकास से बनाया जा सकता है। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन इसी सोच को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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