बहराइच में तेंदुए का आतंक: नल पर पानी पीने गए 9 वर्षीय राजवीर को उठा ले गया तेंदुआ, गांव में पसरा मातम

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कमलेश कुमार बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

दिनांक 8 अगस्त 2026

बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के ग्राम सभा बारखड़िया अंतर्गत आनंद नगर गांव में सोमवार रात एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। घर के समीप लगे नल पर पानी पीने के लिए गया 9 वर्षीय राजवीर कथित तौर पर तेंदुए के हमले का शिकार हो गया। घटना के बाद बच्चे की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया, वहीं पूरे गांव में डर और शोक का माहौल है।

मृतक बच्चे की पहचान राजवीर पुत्र राजू के रूप में बताई गई है। ग्रामीणों के अनुसार राजवीर अपने परिवार का इकलौता बेटा था। बताया जा रहा है कि बच्चे के पिता का निधन पहले ही हो चुका था। ऐसे में परिवार के लिए यह हादसा किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। मासूम की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है।

रात में नल पर गया था मासूम

ग्रामीणों के अनुसार घटना 7 सितंबर 2026 की रात करीब 8:30 बजे हुई। बताया गया कि राजवीर घर के नजदीक स्थित नल पर पानी पीने के लिए गया था। इसी दौरान आसपास मौजूद तेंदुए ने बच्चे पर हमला कर दिया।

घटना के समय गांव में बिजली नहीं होने की बात सामने आई है। अंधेरा होने के कारण आसपास मौजूद लोगों को तत्काल घटना का पता नहीं चल सका। ग्रामीणों का कहना है कि इसी अंधेरे का फायदा उठाकर जंगली जानवर बच्चे को खेत की दिशा में ले गया।

बच्चे के काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास के ग्रामीण भी खोजबीन में जुट गए। घटना की जानकारी फैलते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग टॉर्च और अन्य साधनों की मदद से बच्चे की तलाश करने लगे। बाद में जब राजवीर के साथ हुई अनहोनी की जानकारी सामने आई तो परिवार में चीख-पुकार मच गई।

इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

राजवीर की मौत ने उसके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। ग्रामीणों के मुताबिक वह परिवार का इकलौता बेटा था। पिता की पहले ही मृत्यु हो जाने के बाद परिवार की उम्मीदें इसी मासूम से जुड़ी थीं।

बच्चे की मौत की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस घटना से बेहद दुखी हैं। जिस घर में बच्चे की आवाज और चहल-पहल रहती थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है।

ग्रामीणों के लिए यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय भी बन गई है।

जंगल से सटे इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही बनी चिंता

बहराइच के कई ग्रामीण क्षेत्र जंगल और वन्य क्षेत्र के आसपास स्थित हैं। ऐसे इलाकों में तेंदुए सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही समय-समय पर ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जंगली जानवर आबादी के आसपास दिखाई देते हैं। खेतों और गांव के बीच उनकी आवाजाही से लोगों में भय बना रहता है। खासकर शाम ढलने के बाद ग्रामीण अपने बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर भेजने में डर महसूस करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर लगातार निगरानी की जरूरत है। यदि आबादी के आसपास किसी तेंदुए या अन्य हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना मिले तो संबंधित विभाग को तत्काल सक्रिय होकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए।

बिजली कटौती को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी

आनंद नगर के ग्रामीणों ने रात के समय बिजली कटौती को भी सुरक्षा से जोड़कर देखा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली चले जाने के बाद गांव और आसपास के खेतों में काफी अंधेरा हो जाता है।

ऐसे में जंगल या खेतों से निकलकर आबादी की ओर आने वाले जंगली जानवरों को देख पाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि पर्याप्त रोशनी होने से कम से कम लोगों को आसपास की गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, वन्यजीवों के व्यवहार और हमले के कारणों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए घटना से जुड़े प्रत्येक तथ्य की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की

राजवीर की मौत के बाद ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि गांव के आसपास तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए विशेषज्ञ टीम की मदद ली जाए। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में रात के समय गश्त बढ़ाने और ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के संबंध में जागरूक करने की मांग भी की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल किसी घटना के बाद कुछ दिनों तक निगरानी करना पर्याप्त नहीं होगा। जंगल से सटे गांवों में लगातार वन्यजीव गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

राजवीर की घटना के बाद गांव में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम के बाद बच्चों का अकेले बाहर निकलना जोखिम भरा हो सकता है।

ऐसे क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ग्रामीणों के अनुसार पानी भरने, शौचालय जाने या किसी अन्य जरूरी काम के लिए भी रात में अकेले बाहर निकलने से बचना चाहिए। साथ ही खेतों, झाड़ियों और सुनसान रास्तों के आसपास विशेष सतर्कता बरतनी जरूरी है।

वन विभाग की ओर से यदि क्षेत्र में वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि की जाती है, तो ग्रामीणों को उसके व्यवहार और उससे बचाव के उपायों की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण होगा।

प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की चुनौती

मासूम राजवीर की मौत के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा कायम करना है। घटना की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियां पहले से थीं या नहीं और क्या आसपास के गांवों में भी वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना मिली थी।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन, बिजली विभाग और वन विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। रात के समय प्रकाश व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, नियमित गश्त और ग्रामीणों को जागरूक करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।

एक परिवार का उजड़ा चिराग

राजवीर की मौत ने आनंद नगर गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक मासूम बच्चे की जिंदगी खत्म होने के साथ उसका परिवार भी ऐसी पीड़ा में पहुंच गया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

ग्रामीण अब चाहते हैं कि इस घटना को केवल एक हादसे के रूप में देखकर भुला न दिया जाए। उनका कहना है कि यदि इलाके में तेंदुए या अन्य हिंसक वन्यजीवों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं तो प्रशासन को दीर्घकालिक सुरक्षा योजना तैयार करनी चाहिए।

राजवीर की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर जंगल से सटे गांवों में इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीरता सामने रख दी है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि क्षेत्र में प्रभावी निगरानी और सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी असहनीय त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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