कानपुर देहात में CHC से गायब 102 एंबुलेंस 15 किलोमीटर दूर खाई में मिली, हादसे ने खड़े किए कई सवाल

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

डेरापुर, कानपुर देहात। डेरापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर से 102 सेवा की एक एंबुलेंस के अचानक गायब होने और कुछ घंटे बाद करीब 15 किलोमीटर दूर हाईवे किनारे खाई में क्षतिग्रस्त हालत में मिलने से स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार तड़के हुई इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल एंबुलेंस के दुर्घटनाग्रस्त होने की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 12 बजे 102 एंबुलेंस संख्या यूपी 32 एफजी 0502 एक मरीज को लेकर डेरापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी। मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद एंबुलेंस के चालक शैलेश यादव और ईएमटी इरम ने वाहन को अस्पताल परिसर में खड़ा किया। इसके बाद दोनों अस्पताल परिसर के अंदर चले गए और आराम करने लगे।

बताया जा रहा है कि बुधवार तड़के करीब 3:12 बजे एंबुलेंस CHC परिसर से गायब हो गई। सुबह जब एंबुलेंस की जरूरत पड़ी तो चालक और ईएमटी वाहन को लेने के लिए बाहर आए। निर्धारित स्थान पर एंबुलेंस नहीं मिलने पर दोनों हैरान रह गए। अस्पताल परिसर में तलाश करने के बाद भी जब वाहन का पता नहीं चला तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।

कुछ घंटे बाद खाई में मिली एंबुलेंस

एंबुलेंस के गायब होने की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद डेरापुर पुलिस ने वाहन की तलाश शुरू कर दी। पुलिस को कुछ समय बाद जानकारी मिली कि कानपुर-इटावा हाईवे पर थानवापुर के पास एक एंबुलेंस खाई में गिरी हुई है।

मौके पर पहुंची पुलिस ने वाहन की पहचान की तो वह वही 102 एंबुलेंस निकली, जो डेरापुर CHC परिसर से गायब हुई थी। एंबुलेंस हादसे में क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। खास बात यह रही कि वाहन के आसपास कोई व्यक्ति नहीं मिला। चालक या किसी अन्य व्यक्ति के घटनास्थल पर नहीं मिलने से मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

एंबुलेंस CHC से निकलकर करीब 15 किलोमीटर दूर हाईवे तक कैसे पहुंची और वहां किस परिस्थिति में खाई में गिरी, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।

एंबुलेंस की चाबी को लेकर भी सवाल

घटना के बाद सबसे अहम सवाल एंबुलेंस की चाबी को लेकर उठ रहा है। यदि वाहन बिना अनुमति के CHC परिसर से बाहर ले जाया गया, तो उसे स्टार्ट करने के लिए चाबी का इस्तेमाल कैसे हुआ? चाबी किसके पास थी और एंबुलेंस को परिसर से बाहर ले जाने वाला व्यक्ति कौन था, पुलिस इन बिंदुओं की भी पड़ताल कर रही है।

दूसरी ओर, यह भी जांच का विषय है कि क्या एंबुलेंस को वास्तव में चोरी किया गया था या किसी अन्य परिस्थिति में वह CHC परिसर से बाहर गई। पुलिस ने अभी एंबुलेंस चोरी होने की पुष्टि नहीं की है।

घटना के सामने आने के बाद अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि रात के समय एंबुलेंस परिसर से बाहर निकली, तो क्या वहां किसी सुरक्षा कर्मचारी की ड्यूटी थी? क्या परिसर के प्रवेश और निकास पर निगरानी की व्यवस्था थी? क्या आसपास कोई व्यक्ति मौजूद था? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

हाईवे तक पहुंचने की भी होगी जांच

एंबुलेंस डेरापुर क्षेत्र से निकलकर कानपुर-इटावा हाईवे पर थानवापुर के पास कैसे पहुंची, यह पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस रास्ते में आने वाले संभावित मार्गों और स्थानों की जानकारी जुटा रही है।

थाना प्रभारी धीरेन्द्र सिंह के अनुसार, एंबुलेंस चोरी होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि वाहन को नशे की हालत में चलाए जाने की आशंका समेत अन्य संभावनाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि एंबुलेंस को किसने चलाया, वह CHC से किस समय निकली और हाईवे तक पहुंचने के दौरान रास्ते में क्या हुआ। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

हादसे के कारण का पता लगाने की कोशिश

एंबुलेंस के खाई में मिलने के बाद पुलिस दुर्घटना के कारणों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वाहन तेज गति में था या किसी अन्य कारण से चालक ने नियंत्रण खो दिया। सड़क की स्थिति, वाहन की गति, मोड़ और दुर्घटना स्थल की परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा एंबुलेंस के तकनीकी हिस्सों की जांच से भी हादसे की वजह जानने में मदद मिल सकती है। यदि वाहन में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी हुई थी तो उसकी भी पड़ताल जरूरी होगी।

फिलहाल मौके से किसी व्यक्ति के नहीं मिलने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना के समय वाहन कौन चला रहा था। पुलिस इसी बिंदु को सुलझाने के लिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

स्वास्थ्य विभाग के लिए भी मामला अहम

102 एंबुलेंस सेवा मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में किसी एंबुलेंस का अस्पताल परिसर से अचानक गायब होना और बाद में दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में मिलना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी गंभीर मामला है।

घटना की जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वाहन की जिम्मेदारी किसके पास थी और उसे परिसर में किस प्रकार सुरक्षित रखा गया था। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि रात के समय एंबुलेंस की निगरानी के लिए निर्धारित व्यवस्था का पालन हुआ था या नहीं।

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित स्तर पर कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

CCTV फुटेज से खुल सकता है राज

पुलिस के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि CHC परिसर या आसपास के मार्ग पर कैमरे सक्रिय थे, तो उनसे यह पता चल सकता है कि एंबुलेंस किस समय अस्पताल से निकली और उसे कौन चला रहा था।

इसके बाद हाईवे के आसपास लगे कैमरों की फुटेज से वाहन की आवाजाही का रास्ता भी सामने आ सकता है। पुलिस इस घटनाक्रम को जोड़कर दुर्घटना से पहले और बाद की स्थिति को समझने का प्रयास कर रही है।

फिलहाल डेरापुर में हुई यह घटना कई अनसुलझे सवाल छोड़ गई है। CHC परिसर से एंबुलेंस के निकलने से लेकर हाईवे की खाई में उसके मिलने तक के घटनाक्रम की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ हो पाएगी। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और CCTV फुटेज समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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