कुंडा-बाबागंज में बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान, रात की नींद और दिन का सुकून प्रभावित

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अंशुमान द्विवेदी

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता प्रतापगढ़

कुंडा/बाबागंज। प्रतापगढ़ जिले के कुंडा और बाबागंज क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की अनियमितता से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दिन में कई-कई घंटे बिजली बाधित रहने के साथ ही रात के समय भी बार-बार आपूर्ति ठप होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। गर्मी और उमस के बीच बिजली की आंख-मिचौली ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत कटौती का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सिंचाई और छोटे कारोबार पर भी पड़ रहा है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली को रोजमर्रा की जिंदगी की महत्वपूर्ण जरूरत माना जाता है। घरों में पंखे, कूलर, पानी की मोटर और अन्य उपकरण बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में लगातार बिजली कटने से लोगों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार बिजली कुछ समय के लिए आती है और फिर दोबारा चली जाती है, जिससे उन्हें यह पता नहीं चल पाता कि आपूर्ति कब सामान्य होगी।

दिन में कटौती से प्रभावित हो रहे जरूरी काम

कुंडा-बाबागंज के विभिन्न गांवों में दिन के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। पानी की मोटर न चल पाने के कारण कई परिवारों को पानी की व्यवस्था करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। वहीं बिजली से संचालित उपकरणों पर निर्भर लोगों के लिए समस्या और बढ़ जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार, बिजली की अनियमितता के कारण रोजमर्रा के कामों का समय तय करना मुश्किल हो गया है। जिन कामों को कुछ घंटे में पूरा किया जा सकता है, उन्हें बिजली उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। इससे लोगों के समय और श्रम दोनों पर असर पड़ रहा है।

रात में बिजली गुल होने से नींद प्रभावित

दिनभर गर्मी और उमस के बाद लोगों को रात में आराम की उम्मीद रहती है, लेकिन रात के समय अचानक बिजली कट जाने से परेशानी बढ़ जाती है। पंखे और कूलर बंद होने के कारण कमरों में गर्मी और उमस बढ़ जाती है। इससे परिवारों को रात में जागकर समय गुजारना पड़ रहा है।

विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को गर्मी के दौरान अधिक परेशानी होने की बात ग्रामीणों ने कही है। लोगों का कहना है कि रात में बिजली कटने के बाद कई बार लंबे समय तक आपूर्ति बहाल नहीं होती। इससे अगले दिन की दिनचर्या भी प्रभावित होती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि रात के समय विद्युत आपूर्ति को यथासंभव नियमित रखा जाए और किसी तकनीकी समस्या या आवश्यक कार्य के कारण कटौती होने पर पहले से सूचना दी जाए।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

बिजली कटौती का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी देखने को मिल रहा है। शाम और रात का समय ग्रामीण इलाकों में बच्चों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान बिजली चली जाने पर उन्हें पढ़ाई रोकनी पड़ती है या वैकल्पिक रोशनी का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीण अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। मोबाइल, कंप्यूटर या इंटरनेट आधारित पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को भी बिजली की जरूरत होती है। बार-बार बिजली बाधित होने से पढ़ाई का समय प्रभावित होने की शिकायत सामने आ रही है।

अभिभावकों की मांग है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई के समय विशेष रूप से बिजली आपूर्ति को नियमित रखने की व्यवस्था की जाए।

किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर भी असर

कुंडा-बाबागंज का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में परिवार खेती से जुड़े हैं। किसानों के लिए विद्युत आपूर्ति का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि कई स्थानों पर सिंचाई के लिए विद्युत चालित पंप और ट्यूबवेल का इस्तेमाल किया जाता है।

किसानों के अनुसार जब जरूरत के समय बिजली नहीं मिलती तो सिंचाई का निर्धारित कार्यक्रम बिगड़ जाता है। बिजली आने का इंतजार करने के कारण किसानों को खेतों पर अतिरिक्त समय देना पड़ता है। इससे श्रम और समय दोनों की लागत बढ़ सकती है।

किसानों का कहना है कि यदि बिजली आपूर्ति का समय स्पष्ट हो और निर्धारित अवधि में नियमित बिजली मिले तो सिंचाई की योजना बनाना आसान होगा। उनका आग्रह है कि कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।

दुकानदार और छोटे कारोबारी भी परेशान

विद्युत कटौती का असर स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। आटा चक्की, वेल्डिंग, साइबर कैफे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़े काम और अन्य छोटे व्यवसायों के लिए बिजली जरूरी है। लंबे समय तक बिजली न रहने पर इन गतिविधियों पर सीधा असर पड़ता है।

दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक काम के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बिजली उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें इंतजार करना पड़ता है या वापस लौटना पड़ता है। इससे कारोबार प्रभावित होने की आशंका रहती है।

वहीं घरों में फ्रिज और पानी की मोटर जैसे उपकरणों के संचालन में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की समस्या का असर धीरे-धीरे क्षेत्र की सामान्य आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगता है।

फॉल्ट होने पर आपूर्ति बहाल करने की मांग

ग्रामीणों के मुताबिक कई बार बिजली कटौती का कारण स्पष्ट नहीं होता। कहीं लाइन में खराबी तो कहीं ट्रांसफार्मर या अन्य तकनीकी समस्या के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आती है। लोगों की मांग है कि किसी भी फॉल्ट की जानकारी मिलने के बाद उसे जल्द ठीक करने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में तकनीकी खराबी के कारण बिजली बंद है तो विभाग को उपभोक्ताओं को उसकी जानकारी देनी चाहिए। इससे लोगों को कम से कम यह पता रहेगा कि बिजली कब तक बहाल होने की संभावना है।

बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

लगातार अनियमित आपूर्ति को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ने की बात सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं होने के कारण वे अपने दैनिक कामों की योजना नहीं बना पा रहे हैं।

ग्रामीणों ने बिजली विभाग के संबंधित अधिकारियों से क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए स्थानीय स्तर पर लाइन, ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत उपकरणों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

स्पष्ट रोस्टर और सूचना व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में बिजली आपूर्ति का स्पष्ट रोस्टर जारी करना भी शामिल है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय के अनुसार बिजली उपलब्ध हो तो घरों, खेतों और दुकानों से जुड़े काम बेहतर तरीके से किए जा सकते हैं।

इसके अलावा अचानक होने वाली कटौती की स्थिति में उपभोक्ताओं को सूचना देने की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की गई है। लोगों का कहना है कि तकनीकी कारणों से बिजली बंद होना अलग बात है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने पर विभाग की ओर से जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

अधिकारियों से व्यवस्था सुधारने की उम्मीद

कुंडा-बाबागंज क्षेत्र के ग्रामीण अब बिजली विभाग की ओर से प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और जहां तकनीकी खामियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली केवल रोशनी का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, खेती, घरेलू जरूरतों और स्थानीय कारोबार से जुड़ी आवश्यक सुविधा है। इसलिए विद्युत आपूर्ति में सुधार का सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा।

फिलहाल क्षेत्र के लोगों की नजर संबंधित विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि बिजली कटौती की समस्या का कारण स्पष्ट किया जाए और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि दिन के कामकाज के साथ-साथ रात में भी लोगों को राहत मिल सके।

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