प्रतापगढ़ में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत मामले पर राष्ट्रीय परशुराम सेना ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

प्रतापगढ़, 24 सितंबर। पट्टी कोतवाली में पुलिस अभिरक्षा के दौरान एक युवक की मौत के मामले ने एक बार फिर क्षेत्र में चर्चा और सवालों को जन्म दिया है। इसी प्रकरण में एक ब्राह्मण परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर राष्ट्रीय परशुराम सेना ने आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित और असंवैधानिक कार्रवाई बताया है। संगठन के पदाधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

राष्ट्रीय परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक तिवारी के नेतृत्व में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता प्रदीप शुक्ला सहित कई पदाधिकारी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। संगठन का कहना है कि पुलिस कार्रवाई और मामले में दर्ज मुकदमे को लेकर परिवार के बीच गहरा आक्रोश और चिंता है। पदाधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर घटना से जुड़े उनके पक्ष को सुना।

पुलिस कस्टडी में युवक की मौत का मामला

पट्टी कोतवाली में पुलिस अभिरक्षा के दौरान युवक की मौत का मामला सामने आने के बाद से ही यह प्रकरण संवेदनशील बना हुआ है। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई, युवक की मौत की परिस्थितियों और उसके बाद दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय परशुराम सेना का आरोप है कि युवक की पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत के बाद पीड़ित परिवार पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। संगठन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे न्यायसंगत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं बताया। हालांकि, मामले में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष इस प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।

बंदिशों के बावजूद परिवार तक पहुंचे संगठन के पदाधिकारी

राष्ट्रीय परशुराम सेना के पदाधिकारियों के मुताबिक, पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्हें कई तरह की बंदिशों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद संगठन के प्रतिनिधि परिवार के घर पहुंचे और सदस्यों से बातचीत की।

मुलाकात के दौरान संगठन के नेताओं ने परिवार के सदस्यों से घटना से संबंधित जानकारी प्राप्त की। परिवार ने अपने साथ हुई कथित कार्रवाई और मुकदमे को लेकर अपनी पीड़ा पदाधिकारियों के सामने रखी।

संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार की बात को सामने लाना और उसे कानूनी तथा सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना है।

मुलाकात के दौरान छलका परिवार का दर्द

पीड़ित परिवार ने संगठन के पदाधिकारियों के सामने अपनी परेशानी और भावनाएं साझा कीं। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि घटना के बाद उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई और अब उन पर जबरन मुकदमा लादे जाने की कोशिश की जा रही है।

परिवार के सदस्यों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उनके लिए स्थिति बेहद कठिन हो गई है। उनका आरोप है कि एक तरफ युवक की मौत का दुख है, वहीं दूसरी ओर परिवार के खिलाफ कार्रवाई होने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।

परिवार ने संगठन के नेताओं से पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने घटना की सच्चाई सामने लाने और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।

राष्ट्रीय परशुराम सेना ने जताया समर्थन

पीड़ित परिवार की बात सुनने के बाद राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता प्रदीप शुक्ला और प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक तिवारी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा।

संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार को कानूनी प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के साथ-साथ न्याय के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया जाएगा। नेताओं ने परिवार को आश्वस्त किया कि किसी भी स्तर पर यदि उन्हें कानूनी सहायता की जरूरत होगी तो संगठन अपनी ओर से सहयोग करने का प्रयास करेगा।

राष्ट्रीय परशुराम सेना ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।

परिवार को आर्थिक सहायता भी दी

पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय परशुराम सेना की ओर से तत्काल आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया। संगठन ने कहा कि परिवार इस समय आर्थिक और मानसिक दबाव से गुजर रहा है, इसलिए संगठन की ओर से अपनी क्षमता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई गई है।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सहायता परिवार की तत्काल जरूरतों को देखते हुए दी गई है। साथ ही भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर परिवार के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया गया।

निष्पक्ष जांच की मांग

राष्ट्रीय परशुराम सेना ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि पुलिस अभिरक्षा में हुई युवक की मौत गंभीर विषय है और घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। साथ ही संगठन ने पीड़ित परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमे की भी निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की मांग की।

किसी भी पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में जांच एजेंसियों के लिए घटना से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और संबंधित पक्षों के बयानों को निष्पक्ष रूप से देखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आता है।

आगे भी जारी रहेगा संगठन का सहयोग

राष्ट्रीय परशुराम सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। संगठन की ओर से परिवार को कानूनी और सामाजिक स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक तिवारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप शुक्ला ने परिवार से कहा कि न्याय की प्रक्रिया में उन्हें जो भी वैधानिक सहायता चाहिए होगी, संगठन उसके लिए प्रयास करेगा। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से भी मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की।

फिलहाल पट्टी कोतवाली से जुड़े इस मामले में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत और उसके बाद दर्ज मुकदमे को लेकर विवाद बना हुआ है। पीड़ित परिवार के आरोप, संगठन की आपत्तियां और पुलिस का आधिकारिक पक्ष—इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने का इंतजार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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