जालौन के दो शिक्षकों को मानद पीएचडी उपाधि से सम्मानित किया गया

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जनपद जालौन के बेसिक शिक्षा विभाग के लिए 27 सितंबर का दिन गौरव और उपलब्धि लेकर आया। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जनपद के दो शिक्षकों को नई दिल्ली में आयोजित एक दीक्षांत समारोह के दौरान मानद पीएचडी (Honorary Doctorate) उपाधि से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि से न केवल दोनों शिक्षकों का सम्मान बढ़ा है, बल्कि जालौन के बेसिक शिक्षा परिवार में भी खुशी का माहौल है।

नई दिल्ली के पीरागढ़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित सिंफनी बैंक्विट में सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इसी कार्यक्रम में जनपद जालौन से जुड़े दो शिक्षकों—केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर—को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मानद पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

शिक्षा के प्रति समर्पण का मिला सम्मान

सम्मानित किए गए शिक्षकों में केके श्रीवास्तव वर्तमान में उच्च प्राथमिक विद्यालय मडोरी, विकासखंड माधौगढ़ में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विद्यालयी शिक्षा से जुड़े कार्यों और शैक्षिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

दूसरे सम्मानित शिक्षक शिव कुमार राठौर जालौन विकासखंड में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वह कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय छिरिया सलेमपुर में सहायक अध्यापक के पद पर भी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, शिक्षकों को शैक्षिक सहयोग देने और विद्यार्थियों के हित में किए गए कार्यों के लिए उन्हें भी मानद पीएचडी उपाधि से नवाजा गया।

दोनों शिक्षकों की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपने नियमित शिक्षण कार्य के साथ-साथ शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया है। उनके सम्मान को जिले के शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित हुआ दीक्षांत समारोह

सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी रही।

समारोह के दौरान केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर को उनके शैक्षिक योगदान के लिए मानद पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। दोनों शिक्षकों को मुख्य अतिथि डॉ. प्रोफेसर एमएन होडा, निदेशक, भारती विद्यापीठ, डॉ. रविंद्र पहुजा, जुडिशियल मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट दिल्ली तथा दिनेश कुमार, कमिश्नर ऑफ पुलिस एवं स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (पूर्व) ने सम्मानित किया।

सम्मान समारोह के दौरान दोनों शिक्षकों को उपाधि प्रदान किए जाने पर उपस्थित लोगों ने उनका अभिनंदन किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों की सराहना करते हुए उनके योगदान को सम्मान के योग्य बताया गया।

बेसिक शिक्षा परिवार में खुशी की लहर

जालौन के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय राजधानी में मानद पीएचडी उपाधि मिलने की खबर जनपद पहुंचते ही शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षकों, अधिकारियों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने दोनों शिक्षकों को बधाई दी।

शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी शिक्षक के लिए विद्यार्थियों के बीच कार्य करते हुए अपने क्षेत्र में पहचान बनाना महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है। ऐसे में जिले के दो शिक्षकों को एक बड़े मंच पर सम्मान मिलना अन्य शिक्षकों को भी अपने कार्यों के प्रति और अधिक समर्पित होने की प्रेरणा दे सकता है।

दोनों शिक्षकों को मिली यह उपाधि उनके अब तक के शैक्षिक कार्यों के प्रति सम्मान के रूप में देखी जा रही है। खास तौर पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य करते हुए शिक्षकों को शैक्षिक मार्गदर्शन देने की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा

विद्यालय में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहती। एक शिक्षक विद्यार्थियों में सीखने की रुचि विकसित करने, उनकी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह एआरपी के रूप में कार्य करने वाले शिक्षक अन्य शिक्षकों को भी शैक्षिक गतिविधियों और शिक्षण पद्धतियों से संबंधित सहयोग प्रदान करते हैं।

केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर की उपलब्धि इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि दोनों शिक्षक विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। उनके सम्मान से यह संदेश जाता है कि विद्यालय स्तर पर लगातार किए जाने वाले सकारात्मक प्रयासों को व्यापक स्तर पर पहचान मिल सकती है।

मानद पीएचडी की उपाधि मिलने के बाद दोनों शिक्षकों के सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उम्मीद जताई कि वे आगे भी शिक्षा के क्षेत्र में इसी तरह सक्रिय रहेंगे और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के लिए उपयोगी कार्य करते रहेंगे।

जिले के लिए गौरव का अवसर

जालौन जैसे जनपद से जुड़े दो शिक्षकों को नई दिल्ली में सम्मानित किया जाना स्थानीय स्तर पर भी गौरव का विषय बना हुआ है। आम तौर पर राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर किसी जिले के शिक्षकों को पहचान मिलने से उस जिले की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सकारात्मक कार्यों को भी चर्चा मिलती है।

दोनों शिक्षकों की उपलब्धि ने जालौन के बेसिक शिक्षा परिवार में उत्साह बढ़ाया है। सहकर्मियों और अधिकारियों की ओर से बधाई संदेश मिलने का सिलसिला जारी रहा। शुभचिंतकों ने दोनों शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयास करने के लिए प्रेरित करेगा।

मेहनत और जिम्मेदारी का सम्मान

शिक्षण कार्य एक निरंतर जिम्मेदारी वाला क्षेत्र है। विद्यार्थियों की शैक्षिक जरूरतों के साथ बदलती शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार करना भी शिक्षकों के लिए जरूरी होता है। ऐसे में वर्षों तक शिक्षा से जुड़े रहकर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने वाले शिक्षकों को मिलने वाला सम्मान उनके कार्यों को प्रोत्साहन देता है।

केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर को मिली मानद पीएचडी उपाधि भी इसी तरह की उपलब्धि के रूप में सामने आई है। दोनों शिक्षकों ने विद्यालयी शिक्षा से जुड़े अपने दायित्वों के साथ शैक्षिक क्षेत्र में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं और इसी योगदान के लिए उन्हें नई दिल्ली में सम्मानित किया गया।

उनकी इस उपलब्धि से जालौन के शिक्षक समुदाय में सकारात्मक संदेश पहुंचा है। जिले के शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों ने दोनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अच्छे कार्यों को पहचान मिलना पूरे शिक्षक समुदाय के लिए उत्साहवर्धक है।

फिलहाल, नई दिल्ली में आयोजित दीक्षांत समारोह में जालौन के दोनों शिक्षकों को मानद पीएचडी उपाधि मिलने की उपलब्धि जनपद में चर्चा का विषय बनी हुई है। केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर के सम्मान से उनके परिवार, सहकर्मियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में खुशी है। यह सम्मान उनके शैक्षिक योगदान को मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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जालौन के दो शिक्षकों को मानद पीएचडी उपाधि से सम्मानित किया गया

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 27, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जनपद जालौन के बेसिक शिक्षा विभाग के लिए 27 सितंबर का दिन गौरव और उपलब्धि लेकर आया। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जनपद के दो शिक्षकों को नई दिल्ली में आयोजित एक दीक्षांत समारोह के दौरान मानद पीएचडी (Honorary Doctorate) उपाधि से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि से न केवल दोनों शिक्षकों का सम्मान बढ़ा है, बल्कि जालौन के बेसिक शिक्षा परिवार में भी खुशी का माहौल है।

नई दिल्ली के पीरागढ़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित सिंफनी बैंक्विट में सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इसी कार्यक्रम में जनपद जालौन से जुड़े दो शिक्षकों—केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर—को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मानद पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

शिक्षा के प्रति समर्पण का मिला सम्मान

सम्मानित किए गए शिक्षकों में केके श्रीवास्तव वर्तमान में उच्च प्राथमिक विद्यालय मडोरी, विकासखंड माधौगढ़ में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विद्यालयी शिक्षा से जुड़े कार्यों और शैक्षिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

दूसरे सम्मानित शिक्षक शिव कुमार राठौर जालौन विकासखंड में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वह कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय छिरिया सलेमपुर में सहायक अध्यापक के पद पर भी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, शिक्षकों को शैक्षिक सहयोग देने और विद्यार्थियों के हित में किए गए कार्यों के लिए उन्हें भी मानद पीएचडी उपाधि से नवाजा गया।

दोनों शिक्षकों की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपने नियमित शिक्षण कार्य के साथ-साथ शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया है। उनके सम्मान को जिले के शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित हुआ दीक्षांत समारोह

सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी रही।

समारोह के दौरान केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर को उनके शैक्षिक योगदान के लिए मानद पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। दोनों शिक्षकों को मुख्य अतिथि डॉ. प्रोफेसर एमएन होडा, निदेशक, भारती विद्यापीठ, डॉ. रविंद्र पहुजा, जुडिशियल मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट दिल्ली तथा दिनेश कुमार, कमिश्नर ऑफ पुलिस एवं स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (पूर्व) ने सम्मानित किया।

सम्मान समारोह के दौरान दोनों शिक्षकों को उपाधि प्रदान किए जाने पर उपस्थित लोगों ने उनका अभिनंदन किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों की सराहना करते हुए उनके योगदान को सम्मान के योग्य बताया गया।

बेसिक शिक्षा परिवार में खुशी की लहर

जालौन के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय राजधानी में मानद पीएचडी उपाधि मिलने की खबर जनपद पहुंचते ही शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षकों, अधिकारियों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने दोनों शिक्षकों को बधाई दी।

शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी शिक्षक के लिए विद्यार्थियों के बीच कार्य करते हुए अपने क्षेत्र में पहचान बनाना महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है। ऐसे में जिले के दो शिक्षकों को एक बड़े मंच पर सम्मान मिलना अन्य शिक्षकों को भी अपने कार्यों के प्रति और अधिक समर्पित होने की प्रेरणा दे सकता है।

दोनों शिक्षकों को मिली यह उपाधि उनके अब तक के शैक्षिक कार्यों के प्रति सम्मान के रूप में देखी जा रही है। खास तौर पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य करते हुए शिक्षकों को शैक्षिक मार्गदर्शन देने की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा

विद्यालय में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहती। एक शिक्षक विद्यार्थियों में सीखने की रुचि विकसित करने, उनकी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह एआरपी के रूप में कार्य करने वाले शिक्षक अन्य शिक्षकों को भी शैक्षिक गतिविधियों और शिक्षण पद्धतियों से संबंधित सहयोग प्रदान करते हैं।

केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर की उपलब्धि इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि दोनों शिक्षक विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। उनके सम्मान से यह संदेश जाता है कि विद्यालय स्तर पर लगातार किए जाने वाले सकारात्मक प्रयासों को व्यापक स्तर पर पहचान मिल सकती है।

मानद पीएचडी की उपाधि मिलने के बाद दोनों शिक्षकों के सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उम्मीद जताई कि वे आगे भी शिक्षा के क्षेत्र में इसी तरह सक्रिय रहेंगे और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के लिए उपयोगी कार्य करते रहेंगे।

जिले के लिए गौरव का अवसर

जालौन जैसे जनपद से जुड़े दो शिक्षकों को नई दिल्ली में सम्मानित किया जाना स्थानीय स्तर पर भी गौरव का विषय बना हुआ है। आम तौर पर राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर किसी जिले के शिक्षकों को पहचान मिलने से उस जिले की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सकारात्मक कार्यों को भी चर्चा मिलती है।

दोनों शिक्षकों की उपलब्धि ने जालौन के बेसिक शिक्षा परिवार में उत्साह बढ़ाया है। सहकर्मियों और अधिकारियों की ओर से बधाई संदेश मिलने का सिलसिला जारी रहा। शुभचिंतकों ने दोनों शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयास करने के लिए प्रेरित करेगा।

मेहनत और जिम्मेदारी का सम्मान

शिक्षण कार्य एक निरंतर जिम्मेदारी वाला क्षेत्र है। विद्यार्थियों की शैक्षिक जरूरतों के साथ बदलती शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार करना भी शिक्षकों के लिए जरूरी होता है। ऐसे में वर्षों तक शिक्षा से जुड़े रहकर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने वाले शिक्षकों को मिलने वाला सम्मान उनके कार्यों को प्रोत्साहन देता है।

केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर को मिली मानद पीएचडी उपाधि भी इसी तरह की उपलब्धि के रूप में सामने आई है। दोनों शिक्षकों ने विद्यालयी शिक्षा से जुड़े अपने दायित्वों के साथ शैक्षिक क्षेत्र में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं और इसी योगदान के लिए उन्हें नई दिल्ली में सम्मानित किया गया।

उनकी इस उपलब्धि से जालौन के शिक्षक समुदाय में सकारात्मक संदेश पहुंचा है। जिले के शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों ने दोनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अच्छे कार्यों को पहचान मिलना पूरे शिक्षक समुदाय के लिए उत्साहवर्धक है।

फिलहाल, नई दिल्ली में आयोजित दीक्षांत समारोह में जालौन के दोनों शिक्षकों को मानद पीएचडी उपाधि मिलने की उपलब्धि जनपद में चर्चा का विषय बनी हुई है। केके श्रीवास्तव और शिव कुमार राठौर के सम्मान से उनके परिवार, सहकर्मियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में खुशी है। यह सम्मान उनके शैक्षिक योगदान को मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है।