लगातार बारिश से कई घर और पशुबाड़े ढहे, मलबे में दबकर गृहस्थी बर्बाद
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
कोंच। तहसील क्षेत्र में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश ने ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को प्रभावित करने के साथ-साथ कच्चे मकानों और पशुबाड़ों की मजबूती की भी पोल खोल दी है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ने से कई कमजोर भवन और पशु रखने के स्थान ढह गए। इन हादसों में ग्रामीणों को घरेलू सामान के नुकसान के साथ पशुओं के घायल होने का भी सामना करना पड़ा है। शनिवार को जहां क्षेत्र में चार कच्चे मकान गिरने की घटनाएं सामने आई थीं, वहीं रविवार को भी अलग-अलग गांवों में घर और पशुबाड़े गिरने की जानकारी मिली।

बारिश से प्रभावित परिवारों के सामने अब अपने जरूरी सामान को सुरक्षित करने और रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई ग्रामीणों की गृहस्थी का सामान मलबे के नीचे दबकर खराब हो गया। पशुपालकों को भी अपने मवेशियों के घायल होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।
पशुबाड़े का लेंटर गिरने से सामान मलबे में दबा
तहसील क्षेत्र के ग्राम गोराकरनपुर में रविवार को बारिश के चलते एक पशुबाड़े का लेंटर अचानक भरभरा कर गिर गया। बताया गया कि यह पशुबाड़ा किशोरी पाल का था। घटना के समय बाड़े में पशु बंधे हुए थे। लेंटर गिरने के बाद वहां रखा भूसा, गेहूं, आटा और घरेलू उपयोग की अन्य सामग्री मलबे के नीचे दब गई।
हादसे के कारण किशोरी पाल के परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पशुबाड़े में बंधी दो भैंस और एक बछड़ा भी मलबे की चपेट में आने से घायल हो गए। भवन के गिरने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गए। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद मलबा हटाकर पशुओं को बाहर निकाला।
समय रहते ग्रामीणों के पहुंचने से पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि घायल होने के कारण पशुपालक परिवार की चिंता बढ़ गई है। बारिश के बीच पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए अब उन्हें दूसरी जगह बांधने की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर की जांच
पशुबाड़ा गिरने की सूचना मिलने के बाद लेखपाल उदय यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बारिश के कारण हुए नुकसान की जानकारी जुटाई। मौके पर स्थिति देखने के बाद उन्होंने संबंधित क्षति की रिपोर्ट तैयार की।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण मिट्टी की नमी काफी बढ़ गई है। ऐसे में पहले से कमजोर हो चुके कच्चे निर्माणों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। कई परिवारों के घर और पशुबाड़े लंबे समय से मरम्मत की प्रतीक्षा में थे। बारिश शुरू होने के बाद ऐसे भवनों के लिए खतरा और बढ़ गया।
राजाराम का कच्चा मकान भी हुआ धराशायी
गोराकरनपुर गांव में ही बारिश का असर राजाराम बरार के परिवार पर भी पड़ा। उनका कच्चा मकान बारिश की वजह से कमजोर होकर गिर गया। मकान के ढहने से परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ है। घर में रखा सामान भी प्रभावित हुआ।
लगातार बारिश के बीच मकान गिरने से परिवार के सामने रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में कई ऐसे कच्चे मकान हैं, जिनकी दीवारें लगातार नमी के कारण कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे घरों में रहने वाले परिवारों को बारिश के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
तेजराम पाल का पशुबाड़ा भी गिरा
इसी गांव में तेजराम पाल का पशुबाड़ा भी बारिश की नमी के कारण ढह गया। पशुबाड़े के गिरने से उन्हें भी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण पशुओं को खुले या अस्थायी स्थान पर रखने की मजबूरी बन रही है।
पशुपालकों के लिए यह स्थिति इसलिए भी परेशानी वाली है क्योंकि बारिश के दौरान पशुओं को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखना जरूरी होता है। पशुबाड़ों के क्षतिग्रस्त होने से पशुओं की देखभाल में अतिरिक्त कठिनाई पैदा हो रही है।
अंडा गांव में भी गिरा कच्चा मकान
बारिश से नुकसान का एक और मामला ग्राम अंडा में सामने आया। यहां हेमंत कुशवाहा का कच्चा मकान बारिश के कारण गिर गया। मकान गिरने के दौरान परिवार के सदस्य भी घर के आसपास मौजूद थे। हादसे के दौरान हेमंत कुशवाहा की पत्नी बाल-बाल बच गईं।
मकान गिरने के बाद घर में रखा घरेलू सामान मलबे के नीचे दब गया और कई सामान क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में परिवार की एक गाय भी घायल हो गई। मकान के गिरने से परिवार के सामने रहने और घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की समस्या खड़ी हो गई है।
बारिश ने बढ़ाई ग्रामीण परिवारों की चिंता
क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कमजोर मकानों और पशुबाड़ों के गिरने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। कई ग्रामीण अपने घरों की दीवारों और छतों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
कच्चे मकान लगातार पानी और नमी के संपर्क में आने से कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में दीवारों के गिरने या छत के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। जिन परिवारों के घर पहले से जर्जर स्थिति में हैं, उनके लिए लगातार बारिश विशेष परेशानी का कारण बन रही है।
प्रभावित परिवारों को नुकसान का आकलन जरूरी
ग्रामीणों ने बारिश से प्रभावित परिवारों के नुकसान का उचित आकलन किए जाने की आवश्यकता जताई है। जिन लोगों के मकान या पशुबाड़े क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके घरेलू सामान और पशुओं को हुए नुकसान का भी संज्ञान लिया जाना जरूरी है।
रविवार को गोराकरनपुर में लेखपाल द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच किए जाने से प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि उनके नुकसान का रिकॉर्ड तैयार होगा। वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में कमजोर और जर्जर मकानों की स्थिति का भी जायजा लिया जाए, ताकि बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका को कम किया जा सके।
मलबे के बीच परिवारों के सामने नई चुनौती
इन घटनाओं ने यह भी दिखाया है कि लगातार बारिश ग्रामीण परिवारों के लिए केवल जलभराव तक सीमित समस्या नहीं है। कच्चे घरों और पुराने निर्माणों पर बारिश का सीधा असर पड़ रहा है। जिन परिवारों की पूरी गृहस्थी घर के भीतर रखी होती है, मकान गिरने पर उनका जरूरी सामान भी मलबे में दब जाता है।
गोराकरनपुर और अंडा गांव में सामने आई घटनाओं में भी यही स्थिति देखने को मिली। कहीं पशुओं के घायल होने की चिंता है तो कहीं परिवार को अपने रहने के लिए सुरक्षित स्थान तलाशना पड़ रहा है। ऐसे में बारिश प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल राहत और प्रशासनिक सहायता की जरूरत महसूस हो रही है।
फिलहाल ग्रामीण बारिश के थमने और हालात सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लगातार बारिश के बीच क्षेत्र में कमजोर भवनों को लेकर ग्रामीणों में सतर्कता बढ़ गई है।