हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नौकरी के हजारों मामले लंबित, कैबिनेट से राहत की मांग तेज

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शिमला, 10 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी मिलने का इंतजार कर रहे परिवारों ने राज्य सरकार से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग उठाई है। लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी प्रक्रिया में देरी के कारण पात्र लोगों को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी कर चुके उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति देने और आय सीमा से जुड़े नियमों में एकरूपता लाने की अपील की है।

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शनिवार, 10 अक्टूबर को लगभग 250 से 300 अभ्यर्थियों और उनके परिवार के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर हिमाचल प्रदेश सचिवालय पहुंचा। यह कार्यक्रम राज्य में कैबिनेट की बैठक के दिन आयोजित किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार का ध्यान उन परिवारों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया, जो अपने परिजनों की मृत्यु के बाद से सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

क्या है करुणामूलक नियुक्ति का मामला?

करुणामूलक नियुक्ति योजना का उद्देश्य सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित को रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता करना है। ऐसी व्यवस्था का मकसद परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में मदद देना होता है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद कई परिवारों के सामने नियमित आय का साधन समाप्त हो जाने की समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे में पात्रता और निर्धारित नियमों के अधीन नौकरी मिलने से परिवार को आर्थिक स्थिरता प्राप्त हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश में इसी व्यवस्था के तहत नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में आवेदन लंबे समय से विभिन्न विभागों में लंबित हैं। इनमें सरकारी विभागों के अलावा बोर्ड, निगम और विश्वविद्यालयों से संबंधित मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मामलों के निपटारे में देरी से उन परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिन्हें तत्काल आर्थिक सहारे की आवश्यकता है।

सरकार से तीन प्रमुख मांगें

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के सामने कई मांगें रखीं। उनकी प्रमुख मांग है कि लंबे समय से लंबित आवेदनों की समीक्षा कर पात्र उम्मीदवारों को जल्द नियुक्ति प्रदान की जाए। इसके साथ ही स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों के मामलों में अनावश्यक देरी समाप्त करने की अपील की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि अस्वीकृत किए गए आवेदनों पर वार्षिक पारिवारिक आय की अधिकतम सीमा तीन लाख रुपये तक समान रूप से लागू करने पर विचार किया जाए। उनका तर्क है कि आय से जुड़े नियमों में स्पष्टता और एकरूपता होने से पात्रता संबंधी विवाद कम हो सकते हैं तथा जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सकती है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि आवेदन करने वाले लोगों को वर्षों तक अनिश्चितता में न रहना पड़े। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों की विभागवार समीक्षा कर समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने का आग्रह किया।

3,500 लंबित मामलों से शुरू हुई चर्चा

हिमाचल प्रदेश करुणामूलक संघ के अध्यक्ष अजय कुमार ने लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठाते हुए बताया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के समय करीब 3,500 मामले लंबित थे। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में आय सीमा से संबंधित नियमों में बदलाव कर कुछ राहत दी गई थी।

अजय कुमार के मुताबिक, पहले पारिवारिक आय की सीमा ढाई लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर तीन लाख रुपये किया गया। इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय से जुड़ी शर्त को हटाने की बात भी उन्होंने कही। हालांकि, उनके अनुसार संशोधित आय संबंधी मानदंड केवल तीन महीने की अवधि के लिए लागू रहे।

संघ अध्यक्ष का दावा है कि इस अवधि में लगभग 1,200 अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी हुई। इनमें से करीब 450 उम्मीदवारों को तृतीय श्रेणी यानी क्लास-III के पदों पर नियुक्ति मिल सकी। शेष मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ने की गति धीमी रही। ये आंकड़े संघ के अध्यक्ष द्वारा बताए गए हैं; इनकी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि स्क्रीनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों के मामलों में शीघ्र निर्णय लिया जाए, तो बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिल सकती है।

क्लास-III और क्लास-IV पदों पर नियुक्ति का सवाल

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, लंबित मामलों में ऐसे कई उम्मीदवार शामिल हैं, जो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए पात्र हो सकते हैं। इन नियुक्तियों को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने और पदों की श्रेणी निर्धारित करने जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

अजय कुमार ने बताया कि पहले चतुर्थ श्रेणी के अंतर्गत चपरासी और चौकीदार जैसे पदों पर नियुक्तियां की जाती थीं। अब इस श्रेणी के कई कार्यों को मल्टी-टास्क वर्कर यानी बहुकार्य कर्मी के पदों से जोड़ने का प्रस्ताव है।

संघ के अध्यक्ष के अनुसार, मल्टी-टास्क वर्कर पदों पर करुणामूलक नियुक्तियां शुरू करने के लिए संबंधित सरकारी नीति को अंतिम रूप देना आवश्यक है। उनका आरोप है कि यह प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित है। उन्होंने राज्य सरकार से संबंधित नीति को जल्द जारी करने की मांग की, ताकि पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

हालांकि, इस नीति की वर्तमान स्थिति और इसे लागू करने की संभावित तारीख के बारे में उपलब्ध समाचार में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई है।

वित्त विभाग की मंजूरी पर टिकी उम्मीदें

अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया केवल आवेदन और स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आवश्यक नियमों, वित्तीय स्वीकृति और पदों की उपलब्धता से संबंधित औपचारिकताएं भी समय पर पूरी की जानी चाहिए।

उनके अनुसार, यदि नीति संबंधी निर्णय में देरी होती है, तो स्क्रीनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों को भी नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। संघ ने सरकार से इस मामले को प्राथमिकता देने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग की है।

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकार को लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करने पर विचार करना चाहिए। इससे उम्मीदवारों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनका आवेदन किस चरण में है और आगे की प्रक्रिया में कितना समय लग सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ घटते अवसरों की चिंता

करुणामूलक नियुक्ति का इंतजार कर रहे परिवारों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पात्रता की आयु सीमा से जुड़ा प्रश्न है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक निर्णय नहीं होने के कारण कुछ उम्मीदवार निर्धारित आयु सीमा के करीब पहुंच सकते हैं या पात्रता से जुड़े अवसर गंवा सकते हैं।

उनका मानना है कि नियुक्ति में होने वाली देरी का असर केवल रोजगार मिलने पर नहीं, बल्कि परिवार की भविष्य की आर्थिक योजनाओं पर भी पड़ता है। जिन परिवारों ने कमाने वाले सदस्य को खोया है, उनके लिए नियमित आमदनी की व्यवस्था करना पहले से ही कठिन हो सकता है।

ऐसे में अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार मामलों का निपटारा करते समय उनकी प्रतीक्षा अवधि, पात्रता और लागू नियमों को ध्यान में रखे। हालांकि, आयु सीमा में किसी विशेष छूट या नियम में बदलाव का निर्णय राज्य सरकार की आधिकारिक नीति पर निर्भर करेगा।

सरकार के सामने लंबित मामलों के समाधान की चुनौती

हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नियुक्तियों का मुद्दा प्रशासनिक प्रक्रिया, वित्तीय मंजूरी और पात्रता नियमों से जुड़ा हुआ है। एक ओर आवेदक जल्द निर्णय चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर नियुक्तियों के लिए निर्धारित नियमों और विभागीय प्रक्रियाओं का पालन भी जरूरी है।

ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए पात्र उम्मीदवारों के हितों और लागू नियमों के बीच संतुलन बनाए। विभागवार आंकड़े जारी करना, आवेदनों की स्थिति स्पष्ट करना और नीति संबंधी निर्णयों के लिए समयसीमा तय करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

फिलहाल, 10 अक्टूबर को सचिवालय पहुंचे अभ्यर्थियों ने कैबिनेट के समक्ष अपनी समस्याएं रखने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। अब उनकी नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है।

निष्कर्ष: हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए लंबित मामलों का समाधान एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। अभ्यर्थियों ने सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने, स्क्रीनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों को राहत देने और आय सीमा तथा मल्टी-टास्क वर्कर पदों से संबंधित नीतिगत मामलों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। हालांकि, इन मांगों पर सरकार की ओर से लिए गए किसी नए निर्णय या नियुक्तियों की निश्चित समयसीमा की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।

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हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नौकरी के हजारों मामले लंबित, कैबिनेट से राहत की मांग तेज

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 10, 2026

शिमला, 10 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी मिलने का इंतजार कर रहे परिवारों ने राज्य सरकार से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग उठाई है। लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी प्रक्रिया में देरी के कारण पात्र लोगों को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी कर चुके उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति देने और आय सीमा से जुड़े नियमों में एकरूपता लाने की अपील की है।

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शनिवार, 10 अक्टूबर को लगभग 250 से 300 अभ्यर्थियों और उनके परिवार के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर हिमाचल प्रदेश सचिवालय पहुंचा। यह कार्यक्रम राज्य में कैबिनेट की बैठक के दिन आयोजित किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार का ध्यान उन परिवारों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया, जो अपने परिजनों की मृत्यु के बाद से सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

क्या है करुणामूलक नियुक्ति का मामला?

करुणामूलक नियुक्ति योजना का उद्देश्य सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित को रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता करना है। ऐसी व्यवस्था का मकसद परिवार को आर्थिक संकट से उबरने में मदद देना होता है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद कई परिवारों के सामने नियमित आय का साधन समाप्त हो जाने की समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे में पात्रता और निर्धारित नियमों के अधीन नौकरी मिलने से परिवार को आर्थिक स्थिरता प्राप्त हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश में इसी व्यवस्था के तहत नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में आवेदन लंबे समय से विभिन्न विभागों में लंबित हैं। इनमें सरकारी विभागों के अलावा बोर्ड, निगम और विश्वविद्यालयों से संबंधित मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मामलों के निपटारे में देरी से उन परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिन्हें तत्काल आर्थिक सहारे की आवश्यकता है।

सरकार से तीन प्रमुख मांगें

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के सामने कई मांगें रखीं। उनकी प्रमुख मांग है कि लंबे समय से लंबित आवेदनों की समीक्षा कर पात्र उम्मीदवारों को जल्द नियुक्ति प्रदान की जाए। इसके साथ ही स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों के मामलों में अनावश्यक देरी समाप्त करने की अपील की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि अस्वीकृत किए गए आवेदनों पर वार्षिक पारिवारिक आय की अधिकतम सीमा तीन लाख रुपये तक समान रूप से लागू करने पर विचार किया जाए। उनका तर्क है कि आय से जुड़े नियमों में स्पष्टता और एकरूपता होने से पात्रता संबंधी विवाद कम हो सकते हैं तथा जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सकती है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि आवेदन करने वाले लोगों को वर्षों तक अनिश्चितता में न रहना पड़े। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों की विभागवार समीक्षा कर समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने का आग्रह किया।

3,500 लंबित मामलों से शुरू हुई चर्चा

हिमाचल प्रदेश करुणामूलक संघ के अध्यक्ष अजय कुमार ने लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठाते हुए बताया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के समय करीब 3,500 मामले लंबित थे। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में आय सीमा से संबंधित नियमों में बदलाव कर कुछ राहत दी गई थी।

अजय कुमार के मुताबिक, पहले पारिवारिक आय की सीमा ढाई लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर तीन लाख रुपये किया गया। इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय से जुड़ी शर्त को हटाने की बात भी उन्होंने कही। हालांकि, उनके अनुसार संशोधित आय संबंधी मानदंड केवल तीन महीने की अवधि के लिए लागू रहे।

संघ अध्यक्ष का दावा है कि इस अवधि में लगभग 1,200 अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी हुई। इनमें से करीब 450 उम्मीदवारों को तृतीय श्रेणी यानी क्लास-III के पदों पर नियुक्ति मिल सकी। शेष मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ने की गति धीमी रही। ये आंकड़े संघ के अध्यक्ष द्वारा बताए गए हैं; इनकी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि स्क्रीनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों के मामलों में शीघ्र निर्णय लिया जाए, तो बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिल सकती है।

क्लास-III और क्लास-IV पदों पर नियुक्ति का सवाल

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, लंबित मामलों में ऐसे कई उम्मीदवार शामिल हैं, जो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए पात्र हो सकते हैं। इन नियुक्तियों को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने और पदों की श्रेणी निर्धारित करने जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

अजय कुमार ने बताया कि पहले चतुर्थ श्रेणी के अंतर्गत चपरासी और चौकीदार जैसे पदों पर नियुक्तियां की जाती थीं। अब इस श्रेणी के कई कार्यों को मल्टी-टास्क वर्कर यानी बहुकार्य कर्मी के पदों से जोड़ने का प्रस्ताव है।

संघ के अध्यक्ष के अनुसार, मल्टी-टास्क वर्कर पदों पर करुणामूलक नियुक्तियां शुरू करने के लिए संबंधित सरकारी नीति को अंतिम रूप देना आवश्यक है। उनका आरोप है कि यह प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित है। उन्होंने राज्य सरकार से संबंधित नीति को जल्द जारी करने की मांग की, ताकि पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

हालांकि, इस नीति की वर्तमान स्थिति और इसे लागू करने की संभावित तारीख के बारे में उपलब्ध समाचार में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई है।

वित्त विभाग की मंजूरी पर टिकी उम्मीदें

अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया केवल आवेदन और स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आवश्यक नियमों, वित्तीय स्वीकृति और पदों की उपलब्धता से संबंधित औपचारिकताएं भी समय पर पूरी की जानी चाहिए।

उनके अनुसार, यदि नीति संबंधी निर्णय में देरी होती है, तो स्क्रीनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों को भी नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। संघ ने सरकार से इस मामले को प्राथमिकता देने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग की है।

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकार को लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करने पर विचार करना चाहिए। इससे उम्मीदवारों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनका आवेदन किस चरण में है और आगे की प्रक्रिया में कितना समय लग सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ घटते अवसरों की चिंता

करुणामूलक नियुक्ति का इंतजार कर रहे परिवारों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पात्रता की आयु सीमा से जुड़ा प्रश्न है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक निर्णय नहीं होने के कारण कुछ उम्मीदवार निर्धारित आयु सीमा के करीब पहुंच सकते हैं या पात्रता से जुड़े अवसर गंवा सकते हैं।

उनका मानना है कि नियुक्ति में होने वाली देरी का असर केवल रोजगार मिलने पर नहीं, बल्कि परिवार की भविष्य की आर्थिक योजनाओं पर भी पड़ता है। जिन परिवारों ने कमाने वाले सदस्य को खोया है, उनके लिए नियमित आमदनी की व्यवस्था करना पहले से ही कठिन हो सकता है।

ऐसे में अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार मामलों का निपटारा करते समय उनकी प्रतीक्षा अवधि, पात्रता और लागू नियमों को ध्यान में रखे। हालांकि, आयु सीमा में किसी विशेष छूट या नियम में बदलाव का निर्णय राज्य सरकार की आधिकारिक नीति पर निर्भर करेगा।

सरकार के सामने लंबित मामलों के समाधान की चुनौती

हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नियुक्तियों का मुद्दा प्रशासनिक प्रक्रिया, वित्तीय मंजूरी और पात्रता नियमों से जुड़ा हुआ है। एक ओर आवेदक जल्द निर्णय चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर नियुक्तियों के लिए निर्धारित नियमों और विभागीय प्रक्रियाओं का पालन भी जरूरी है।

ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए पात्र उम्मीदवारों के हितों और लागू नियमों के बीच संतुलन बनाए। विभागवार आंकड़े जारी करना, आवेदनों की स्थिति स्पष्ट करना और नीति संबंधी निर्णयों के लिए समयसीमा तय करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

फिलहाल, 10 अक्टूबर को सचिवालय पहुंचे अभ्यर्थियों ने कैबिनेट के समक्ष अपनी समस्याएं रखने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। अब उनकी नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है।

निष्कर्ष: हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए लंबित मामलों का समाधान एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। अभ्यर्थियों ने सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने, स्क्रीनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों को राहत देने और आय सीमा तथा मल्टी-टास्क वर्कर पदों से संबंधित नीतिगत मामलों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। हालांकि, इन मांगों पर सरकार की ओर से लिए गए किसी नए निर्णय या नियुक्तियों की निश्चित समयसीमा की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।