जालौन में बेटियों ने संभाली प्रशासन की कमान, पल्लवी बनीं एक दिन की SP तो प्रतीक्षा ने DM की कुर्सी पर बैठकर बढ़ाया आत्मविश्वास
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत बालिकाओं को मिला प्रशासनिक कार्यप्रणाली समझने का अवसर, जिलाधिकारी समीर ने बुके देकर किया प्रतीक्षा का स्वागत; IAS-PCS अधिकारी बनकर देश सेवा करना चाहती हैं छात्रा

उरई, जालौन। बेटियों को यदि सही अवसर, शिक्षा और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी प्रतिभा से किसी भी क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं। इसी सोच को साकार करने की दिशा में जालौन जिले में मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत एक प्रेरणादायक पहल की गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारियों को करीब से समझने तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान किया गया।
इस विशेष पहल के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की कक्षा सात की छात्रा पल्लवी ने एक दिन की प्रतीकात्मक पुलिस अधीक्षक (SP) की भूमिका निभाई। वहीं, मडोरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्रा प्रतीक्षा को एक दिन की प्रतीकात्मक जिलाधिकारी (DM) बनने का अवसर मिला। दोनों छात्राओं के लिए यह अनुभव न केवल यादगार रहा, बल्कि उनके भीतर भविष्य के लक्ष्यों को लेकर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा करने वाला भी साबित हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को यह समझाना था कि प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही, छात्राओं को बड़े सपने देखने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देना भी इस पहल का अहम हिस्सा रहा।
एक दिन की SP बनकर पल्लवी ने जानी पुलिस की कार्यप्रणाली
जालौन पुलिस की ओर से आयोजित इस पहल में कक्षा सात की छात्रा पल्लवी को प्रतीकात्मक रूप से पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला। उरई स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उन्होंने महिला फरियादियों की समस्याएं सुनीं और पुलिस व्यवस्था के कामकाज को समझने का प्रयास किया।
पुलिस अधीक्षक की भूमिका में रहते हुए पल्लवी को यह जानने का अवसर मिला कि किसी शिकायत के सामने आने पर पुलिस किस प्रकार उसकी जानकारी जुटाती है और संबंधित मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। इस दौरान महिला शिकायतकर्ताओं की बात सुनने और उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने के महत्व को भी समझने का अवसर मिला।
पुलिस व्यवस्था में जिम्मेदारी निभाने के लिए अनुशासन, धैर्य, निर्णय लेने की क्षमता और लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना आवश्यक होता है। इस तरह की गतिविधियां छात्राओं को इन गुणों का महत्व समझाने में मदद करती हैं।
पल्लवी के लिए यह अनुभव सामान्य शैक्षणिक गतिविधि से अलग था। पुलिस कार्यालय के वातावरण को नजदीक से देखना और अधिकारियों के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करना उनके लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना। इस पहल से अन्य छात्राओं को भी पुलिस सेवा तथा महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिल सकती है।
जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठीं प्रतीक्षा, DM समीर ने किया स्वागत
इसी क्रम में मडोरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की कक्षा सात की छात्रा प्रतीक्षा को एक दिन की प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनने का अवसर दिया गया। जब वह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं, तो जिलाधिकारी समीर ने बुके भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्रतीक्षा को अपनी कुर्सी पर बैठाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
जिलाधिकारी की ओर से मिला यह सम्मान छात्रा के लिए खास अनुभव रहा। किसी जिले के प्रशासनिक प्रमुख की भूमिका को प्रतीकात्मक रूप से समझना और कार्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित होना विद्यार्थियों के लिए शासन-प्रशासन की व्यवस्था को जानने का व्यावहारिक माध्यम बन सकता है।
प्रतीक्षा को इस अवसर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों, जनसमस्याओं को सुनने और उनके समाधान की प्रक्रिया के बारे में जानने का मौका मिला। प्रशासन का काम केवल सरकारी कार्यालयों का संचालन करना नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान देना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और जनहित से जुड़े मामलों में उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है।
इस गतिविधि के जरिए छात्राओं को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि किसी भी जिम्मेदार पद पर पहुंचने के लिए ज्ञान, संवेदनशीलता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा महत्वपूर्ण गुण हैं।
IAS या PCS अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं प्रतीक्षा
प्रतीक्षा का सपना भविष्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) की अधिकारी बनना है। वह पढ़ाई के माध्यम से अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहती हैं और देश तथा समाज के लिए काम करने की इच्छा रखती हैं।
जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठने का अवसर उनके लिए अपने सपने को और करीब से समझने जैसा रहा। इस अनुभव ने उन्हें प्रशासनिक सेवाओं की जिम्मेदारियों को जानने तथा अपने भविष्य के लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने की प्रेरणा दी।
किसी विद्यार्थी के जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण उस दिशा में नियमित प्रयास करना भी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मजबूत शैक्षणिक आधार, सामान्य ज्ञान, तार्किक क्षमता, अनुशासन और निरंतर अध्ययन की आवश्यकता होती है। प्रतीक्षा की इच्छा इस बात को दर्शाती है कि कम उम्र में भी विद्यार्थियों के भीतर समाज के लिए कुछ अच्छा करने की भावना विकसित की जा सकती है।
उनकी आकांक्षा दूसरी छात्राओं को भी यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि वे अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार प्रशासन, पुलिस, शिक्षा, विज्ञान तथा अन्य क्षेत्रों में करियर बनाने का सपना देख सकती हैं।
मिशन शक्ति फेज-6.0 का उद्देश्य बेटियों को बनाना आत्मनिर्भर
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन शक्ति के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता और प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू बालिकाओं को उनके अधिकारों, अवसरों और भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना है।
जालौन में पल्लवी और प्रतीक्षा को प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी देना इसी दिशा में एक प्रेरक प्रयास है। ऐसी गतिविधियां छात्राओं को सरकारी सेवाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व, संवाद और निर्णय लेने जैसे कौशल विकसित करने की प्रेरणा भी देती हैं।
जब छात्राओं को वास्तविक जीवन से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझने का अवसर मिलता है, तो उनकी जानकारी केवल किताबों तक सीमित नहीं रहती। वे यह जान पाती हैं कि प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारी आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किस तरह काम करते हैं।
इसके अतिरिक्त, इस तरह की पहल समाज में बेटियों की क्षमता को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक हो सकती है। बालिकाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना परिवार, विद्यालय और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
शिक्षा और मार्गदर्शन से खुलेंगे सफलता के नए रास्ते
किसी भी विद्यार्थी के सपनों को साकार करने में विद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी योगदान देते हैं। इसी तरह, परिवार का सहयोग और समाज का प्रोत्साहन बच्चों को कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की ताकत देता है।
पल्लवी और प्रतीक्षा को मिला यह अवसर बताता है कि विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में जानकारी देना कितना उपयोगी हो सकता है। इससे उन्हें अपनी रुचि पहचानने, करियर के विकल्प समझने और भविष्य की तैयारी के लिए प्रेरणा मिलती है।
हालांकि, प्रतीकात्मक रूप से किसी पद पर बैठना वास्तविक नियुक्ति नहीं है, लेकिन इस अनुभव से मिलने वाली सीख लंबे समय तक उपयोगी हो सकती है। यदि ऐसी गतिविधियों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, करियर मार्गदर्शन और नियमित प्रोत्साहन भी मिले, तो छात्राओं को अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिल सकती है।
जालौन की बेटियों ने दिया बड़ा संदेश
जालौन में मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत आयोजित यह पहल बेटियों की प्रतिभा और संभावनाओं को सामने लाने का एक सकारात्मक उदाहरण है। कक्षा सात की पल्लवी का एक दिन की प्रतीकात्मक SP बनना और प्रतीक्षा का प्रतीकात्मक DM की कुर्सी पर बैठना यह संदेश देता है कि बच्चों को अवसर मिलने पर वे नई जिम्मेदारियों को समझने और भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
प्रतीक्षा का IAS या PCS अधिकारी बनने का सपना और पल्लवी का पुलिस व्यवस्था को करीब से जानने का अनुभव दूसरी छात्राओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
आज इन छात्राओं ने प्रतीकात्मक रूप से प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारियों को समझा है। भविष्य में वे अपने अध्ययन, मेहनत और लगन के बल पर अपने चुने हुए क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
इस पहल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बेटियों के सपनों को सीमित करने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए जाने चाहिए। आत्मविश्वास, शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास के साथ बालिकाएं अपने लिए सफलता के नए रास्ते बना सकती हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।