कानपुर देहात में जर्जर बिजली लाइन बनी खतरे की घंटी, किसानों की सुरक्षा पर मंडरा रहा संकट; शिकायतों के बावजूद मरम्मत का इंतजार

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

सरवनखेड़ा क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट की क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन को लेकर ग्रामीणों में चिंता, बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के आरोप

कानपुर देहात।

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जनपद के सरवनखेड़ा विकासखंड क्षेत्र में जर्जर विद्युत लाइन को लेकर ग्रामीणों और किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। खेतों के बीच से होकर दूरस्थ गांवों तक विद्युत आपूर्ति पहुंचाने वाली 11 हजार वोल्ट की लाइन के तार क्षतिग्रस्त होने और कई स्थानों पर नीचे की ओर झूलने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या के संबंध में विद्युत विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की कटाई, रखरखाव और खेतों में अन्य कृषि कार्य करते समय संभावित दुर्घटना का भय बना हुआ है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब विद्युत लाइनों को सुरक्षित और दुरुस्त रखना विभाग की जिम्मेदारी है, तो बार-बार शिकायत किए जाने के बाद भी समस्या का निस्तारण क्यों नहीं हो रहा है? आखिर किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका को देखते हुए समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?

बार-बार मरम्मत के बाद भी जर्जर तारों से नहीं मिली राहत

स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के अनुसार, क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन के तार कई बार क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अलग-अलग मौकों पर मरम्मत किए जाने के बावजूद लाइन की स्थिति संतोषजनक नहीं हुई है। कुछ स्थानों पर तारों के नीचे की ओर झूलने की बात भी कही जा रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, समस्या केवल बिजली आपूर्ति बाधित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है। यदि किसी स्थान पर तार टूटकर नीचे गिरते हैं या खेतों में काम कर रहे लोगों के संपर्क में आते हैं, तो गंभीर हादसा हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत से बार-बार उत्पन्न होने वाली समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है। ऐसे में विद्युत विभाग को मौके का निरीक्षण कराकर लाइन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। जहां तार बदलने, खंभों की मरम्मत अथवा लाइन को सुरक्षित ऊंचाई पर व्यवस्थित करने की जरूरत है, वहां मानकों के अनुसार काम कराया जाना चाहिए।

हालांकि, इस मामले में विद्युत विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाई, तकनीकी निरीक्षण और प्रस्तावित मरम्मत की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

खेतों में काम करने वाले किसानों की बढ़ी चिंता

सरवनखेड़ा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कृषि आजीविका का प्रमुख आधार है। किसान अपने खेतों में फसल की बुवाई, सिंचाई, कटाई और उपज के रखरखाव जैसे कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में खेतों के ऊपर से गुजरने वाली क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन उनके लिए चिंता का विषय बन सकती है।

किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि फसल तैयार होने के बाद उसे काटने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए खेतों में लगातार काम करना पड़ता है। यदि विद्युत तार नीचे की ओर झूल रहे हों, तो कृषि कार्यों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी किसान के लिए खेत में काम करना उसकी रोजमर्रा की जरूरत है। वह हर समय इस आशंका के साथ काम नहीं कर सकता कि कहीं ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन कोई दुर्घटना न पैदा कर दे। इसलिए संबंधित विभाग को किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समस्या का जल्द निस्तारण करना चाहिए।

यह भी आवश्यक है कि जब तक लाइन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित स्थानों पर लोगों को स्पष्ट चेतावनी दी जाए और जरूरत पड़ने पर विद्युत आपूर्ति को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जाए।

शिकायतें पहुंचीं, लेकिन समाधान को लेकर उठ रहे सवाल

स्थानीय ग्रामीणों और भारतीय जनता पार्टी के एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि विद्युत लाइन की समस्या के संबंध में विभागीय अधिकारियों तथा जिले के पार्टी पदाधिकारियों तक कई बार जानकारी पहुंचाई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, हर बार समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दिया।

उनका कहना है कि जब ग्रामीण अपनी परेशानी लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं के पास पहुंचते हैं, तो वे संबंधित विभाग तक उनकी बात पहुंचाने और समाधान कराने का प्रयास करते हैं। लेकिन यदि शिकायत के बाद भी काम नहीं होता, तो जनता के बीच कार्यकर्ताओं को जवाब देना मुश्किल हो जाता है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, कई बार कर्मचारी समस्या से परिचित होने की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन आवश्यक कार्रवाई समय पर नहीं होती। वहीं, उच्च स्तर पर शिकायत पहुंचाने के बाद उसे दर्ज कर लेने या समाधान का आश्वासन मिलने की बात कही जाती है। इसके बावजूद समस्या बनी रहने से लोगों में निराशा बढ़ती है।

हालांकि, संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और समाधान में देरी के पीछे क्या कारण रहे।

बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ रहा असर

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका से जुड़ा है। बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता अक्सर गांवों में लोगों के बीच रहते हैं और उनकी समस्याओं को प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

जब ग्रामीण बिजली, सड़क, पानी या अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायत लेकर आते हैं, तो कार्यकर्ता उनसे समस्या के समाधान का भरोसा जताते हैं। लेकिन यदि संबंधित विभाग से समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो जनता के सामने उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को भी तब निराशा होती है, जब वे किसी वास्तविक जनसमस्या को लेकर बार-बार अधिकारियों से संपर्क करते हैं, लेकिन उसका समाधान नहीं निकलता। जिला स्तर की बैठकों में समस्याएं उठाए जाने और उन्हें दर्ज किए जाने के बाद भी यदि धरातल पर बदलाव नहीं आता, तो व्यवस्था के प्रति असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

यह स्थिति किसी एक राजनीतिक दल या कार्यकर्ता तक सीमित नहीं मानी जानी चाहिए। जनसमस्याओं का समाधान प्रशासनिक जिम्मेदारी का विषय है। किसी भी नागरिक की शिकायत को गंभीरता से सुनना और उस पर समयबद्ध कार्रवाई करना सुशासन की बुनियादी अपेक्षा है।

सरकार के निर्देशों के अनुरूप विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी

विद्युत व्यवस्था का उद्देश्य केवल घरों और खेतों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखना भी है। बिजली की उच्च वोल्टेज वाली लाइनों का रखरखाव तकनीकी मानकों और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार होना चाहिए।

यदि किसी क्षेत्र में तार क्षतिग्रस्त हैं, नीचे झूल रहे हैं या उनके टूटने की आशंका है, तो संबंधित विभाग को शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना भी निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रभावित स्थानों की पहचान कर प्राथमिकता तय की जा सकती है।

सरवनखेड़ा क्षेत्र के मामले में भी विद्युत विभाग को संबंधित लाइन का निरीक्षण कराकर उसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि लाइन में तकनीकी खामी पाई जाती है, तो केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही, शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति और काम पूरा होने की संभावित समयसीमा की जानकारी दी जानी चाहिए।

दुर्घटना होने से पहले कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और शिकायतकर्ता की मुख्य मांग यही है कि किसी गंभीर घटना के घटित होने से पहले विद्युत लाइन को सुरक्षित बनाया जाए। उनका कहना है कि यदि समस्या को समय रहते दूर नहीं किया गया और कोई दुर्घटना हो गई, तो उसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा हो सकता है।

किसानों की सुरक्षा, ग्रामीणों की सुविधा और निर्बाध विद्युत आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को इस मामले में त्वरित पहल करनी चाहिए। साथ ही, शिकायतों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी समस्याएं लंबे समय तक लंबित न रहें।

ग्रामीणों की अपेक्षा है कि उनकी शिकायतों को केवल आश्वासन या कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मौके पर काम कराकर उसका परिणाम भी दिखाई दे।

अब जवाबदेही और ठोस कार्रवाई का इंतजार

कानपुर देहात के सरवनखेड़ा क्षेत्र में जर्जर विद्युत लाइन का मामला ग्रामीण सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। यदि स्थानीय स्तर पर बताई जा रही स्थिति सही है, तो इसे सामान्य शिकायत मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

संबंधित विद्युत अधिकारियों को चाहिए कि वे मौके का निरीक्षण करें, जोखिम वाले स्थानों की पहचान करें और आवश्यक मरम्मत अथवा तार बदलने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। शिकायतों का रिकॉर्ड रखने के साथ-साथ उनके निस्तारण की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों से भी अपेक्षा है कि वे इस विषय को संबंधित विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएं और समाधान होने तक उसकी प्रगति पर नजर रखें।

ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—खेतों के ऊपर से गुजरने वाली जर्जर विद्युत लाइन को सुरक्षित किया जाए, किसानों को संभावित खतरे से राहत मिले और बार-बार शिकायत करने की मजबूरी समाप्त हो। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है और ग्रामीणों को आश्वासन के बजाय वास्तविक राहत कब मिलती है।

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कानपुर देहात में जर्जर बिजली लाइन बनी खतरे की घंटी, किसानों की सुरक्षा पर मंडरा रहा संकट; शिकायतों के बावजूद मरम्मत का इंतजार

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 18, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

सरवनखेड़ा क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट की क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन को लेकर ग्रामीणों में चिंता, बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के आरोप

कानपुर देहात।

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जनपद के सरवनखेड़ा विकासखंड क्षेत्र में जर्जर विद्युत लाइन को लेकर ग्रामीणों और किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। खेतों के बीच से होकर दूरस्थ गांवों तक विद्युत आपूर्ति पहुंचाने वाली 11 हजार वोल्ट की लाइन के तार क्षतिग्रस्त होने और कई स्थानों पर नीचे की ओर झूलने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या के संबंध में विद्युत विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की कटाई, रखरखाव और खेतों में अन्य कृषि कार्य करते समय संभावित दुर्घटना का भय बना हुआ है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब विद्युत लाइनों को सुरक्षित और दुरुस्त रखना विभाग की जिम्मेदारी है, तो बार-बार शिकायत किए जाने के बाद भी समस्या का निस्तारण क्यों नहीं हो रहा है? आखिर किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका को देखते हुए समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?

बार-बार मरम्मत के बाद भी जर्जर तारों से नहीं मिली राहत

स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के अनुसार, क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन के तार कई बार क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अलग-अलग मौकों पर मरम्मत किए जाने के बावजूद लाइन की स्थिति संतोषजनक नहीं हुई है। कुछ स्थानों पर तारों के नीचे की ओर झूलने की बात भी कही जा रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, समस्या केवल बिजली आपूर्ति बाधित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है। यदि किसी स्थान पर तार टूटकर नीचे गिरते हैं या खेतों में काम कर रहे लोगों के संपर्क में आते हैं, तो गंभीर हादसा हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत से बार-बार उत्पन्न होने वाली समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है। ऐसे में विद्युत विभाग को मौके का निरीक्षण कराकर लाइन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। जहां तार बदलने, खंभों की मरम्मत अथवा लाइन को सुरक्षित ऊंचाई पर व्यवस्थित करने की जरूरत है, वहां मानकों के अनुसार काम कराया जाना चाहिए।

हालांकि, इस मामले में विद्युत विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाई, तकनीकी निरीक्षण और प्रस्तावित मरम्मत की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

खेतों में काम करने वाले किसानों की बढ़ी चिंता

सरवनखेड़ा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कृषि आजीविका का प्रमुख आधार है। किसान अपने खेतों में फसल की बुवाई, सिंचाई, कटाई और उपज के रखरखाव जैसे कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में खेतों के ऊपर से गुजरने वाली क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन उनके लिए चिंता का विषय बन सकती है।

किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि फसल तैयार होने के बाद उसे काटने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए खेतों में लगातार काम करना पड़ता है। यदि विद्युत तार नीचे की ओर झूल रहे हों, तो कृषि कार्यों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी किसान के लिए खेत में काम करना उसकी रोजमर्रा की जरूरत है। वह हर समय इस आशंका के साथ काम नहीं कर सकता कि कहीं ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन कोई दुर्घटना न पैदा कर दे। इसलिए संबंधित विभाग को किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समस्या का जल्द निस्तारण करना चाहिए।

यह भी आवश्यक है कि जब तक लाइन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित स्थानों पर लोगों को स्पष्ट चेतावनी दी जाए और जरूरत पड़ने पर विद्युत आपूर्ति को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जाए।

शिकायतें पहुंचीं, लेकिन समाधान को लेकर उठ रहे सवाल

स्थानीय ग्रामीणों और भारतीय जनता पार्टी के एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि विद्युत लाइन की समस्या के संबंध में विभागीय अधिकारियों तथा जिले के पार्टी पदाधिकारियों तक कई बार जानकारी पहुंचाई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, हर बार समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दिया।

उनका कहना है कि जब ग्रामीण अपनी परेशानी लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं के पास पहुंचते हैं, तो वे संबंधित विभाग तक उनकी बात पहुंचाने और समाधान कराने का प्रयास करते हैं। लेकिन यदि शिकायत के बाद भी काम नहीं होता, तो जनता के बीच कार्यकर्ताओं को जवाब देना मुश्किल हो जाता है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, कई बार कर्मचारी समस्या से परिचित होने की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन आवश्यक कार्रवाई समय पर नहीं होती। वहीं, उच्च स्तर पर शिकायत पहुंचाने के बाद उसे दर्ज कर लेने या समाधान का आश्वासन मिलने की बात कही जाती है। इसके बावजूद समस्या बनी रहने से लोगों में निराशा बढ़ती है।

हालांकि, संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और समाधान में देरी के पीछे क्या कारण रहे।

बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ रहा असर

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका से जुड़ा है। बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता अक्सर गांवों में लोगों के बीच रहते हैं और उनकी समस्याओं को प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

जब ग्रामीण बिजली, सड़क, पानी या अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायत लेकर आते हैं, तो कार्यकर्ता उनसे समस्या के समाधान का भरोसा जताते हैं। लेकिन यदि संबंधित विभाग से समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो जनता के सामने उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को भी तब निराशा होती है, जब वे किसी वास्तविक जनसमस्या को लेकर बार-बार अधिकारियों से संपर्क करते हैं, लेकिन उसका समाधान नहीं निकलता। जिला स्तर की बैठकों में समस्याएं उठाए जाने और उन्हें दर्ज किए जाने के बाद भी यदि धरातल पर बदलाव नहीं आता, तो व्यवस्था के प्रति असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

यह स्थिति किसी एक राजनीतिक दल या कार्यकर्ता तक सीमित नहीं मानी जानी चाहिए। जनसमस्याओं का समाधान प्रशासनिक जिम्मेदारी का विषय है। किसी भी नागरिक की शिकायत को गंभीरता से सुनना और उस पर समयबद्ध कार्रवाई करना सुशासन की बुनियादी अपेक्षा है।

सरकार के निर्देशों के अनुरूप विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी

विद्युत व्यवस्था का उद्देश्य केवल घरों और खेतों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखना भी है। बिजली की उच्च वोल्टेज वाली लाइनों का रखरखाव तकनीकी मानकों और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार होना चाहिए।

यदि किसी क्षेत्र में तार क्षतिग्रस्त हैं, नीचे झूल रहे हैं या उनके टूटने की आशंका है, तो संबंधित विभाग को शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना भी निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रभावित स्थानों की पहचान कर प्राथमिकता तय की जा सकती है।

सरवनखेड़ा क्षेत्र के मामले में भी विद्युत विभाग को संबंधित लाइन का निरीक्षण कराकर उसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि लाइन में तकनीकी खामी पाई जाती है, तो केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही, शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति और काम पूरा होने की संभावित समयसीमा की जानकारी दी जानी चाहिए।

दुर्घटना होने से पहले कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और शिकायतकर्ता की मुख्य मांग यही है कि किसी गंभीर घटना के घटित होने से पहले विद्युत लाइन को सुरक्षित बनाया जाए। उनका कहना है कि यदि समस्या को समय रहते दूर नहीं किया गया और कोई दुर्घटना हो गई, तो उसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा हो सकता है।

किसानों की सुरक्षा, ग्रामीणों की सुविधा और निर्बाध विद्युत आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को इस मामले में त्वरित पहल करनी चाहिए। साथ ही, शिकायतों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी समस्याएं लंबे समय तक लंबित न रहें।

ग्रामीणों की अपेक्षा है कि उनकी शिकायतों को केवल आश्वासन या कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मौके पर काम कराकर उसका परिणाम भी दिखाई दे।

अब जवाबदेही और ठोस कार्रवाई का इंतजार

कानपुर देहात के सरवनखेड़ा क्षेत्र में जर्जर विद्युत लाइन का मामला ग्रामीण सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। यदि स्थानीय स्तर पर बताई जा रही स्थिति सही है, तो इसे सामान्य शिकायत मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

संबंधित विद्युत अधिकारियों को चाहिए कि वे मौके का निरीक्षण करें, जोखिम वाले स्थानों की पहचान करें और आवश्यक मरम्मत अथवा तार बदलने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। शिकायतों का रिकॉर्ड रखने के साथ-साथ उनके निस्तारण की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों से भी अपेक्षा है कि वे इस विषय को संबंधित विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएं और समाधान होने तक उसकी प्रगति पर नजर रखें।

ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—खेतों के ऊपर से गुजरने वाली जर्जर विद्युत लाइन को सुरक्षित किया जाए, किसानों को संभावित खतरे से राहत मिले और बार-बार शिकायत करने की मजबूरी समाप्त हो। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है और ग्रामीणों को आश्वासन के बजाय वास्तविक राहत कब मिलती है।