कोंच परिवार परामर्श केंद्र की पहल से बिखरने से बचे दो परिवार, आपसी समझौते से फिर साथ रहने को राजी हुए दंपत्ति
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
कोंच (जालौन)। पारिवारिक विवादों को बातचीत और आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाने की दिशा में कोंच कोतवाली परिसर में संचालित परिवार परामर्श केंद्र ने सराहनीय पहल की। केंद्र पर पहुंचे दो अलग-अलग पारिवारिक विवादों का निस्तारण काउंसलिंग और समझाइश के जरिए कराया गया। दोनों मामलों में पति-पत्नी और उनके परिजनों के बीच बातचीत कराकर आपसी सहमति बनाई गई। इसके बाद दोनों दंपत्तियों ने साथ रहने पर अपनी सहमति जताई और खुशी-खुशी अपने घर लौट गए।

परिवार परामर्श केंद्र की इस पहल से दो परिवारों के बीच बढ़ते विवाद को कम करने और रिश्तों को एक और अवसर देने का प्रयास सफल रहा। केंद्र के काउंसलर्स ने दोनों पक्षों की बात सुनकर उन्हें पारिवारिक जीवन में संवाद, धैर्य और आपसी सम्मान के महत्व को समझाया। समझौते के बाद दोनों दंपत्तियों ने साथ रहने का निर्णय लिया।
आपसी बातचीत से सुलझाए गए दो पारिवारिक विवाद
कोंच कोतवाली मुख्यालय पर स्थापित परिवार परामर्श केंद्र का उद्देश्य पारिवारिक समस्याओं से जुड़े मामलों में संबंधित पक्षों को बातचीत का अवसर देना और उनकी सहमति से विवादों का समाधान तलाशना है। इसी क्रम में रविवार को केंद्र पर दो ऐसे मामले पहुंचे, जिनमें महिलाओं ने अपने पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर मारपीट करने तथा प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे।
दोनों मामलों में शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों को परामर्श केंद्र पर बुलाया गया। काउंसलर्स ने पति-पत्नी और उनके परिजनों से अलग-अलग तथा आपसी बातचीत के माध्यम से विवाद की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों पक्षों को समझाया गया कि पारिवारिक मतभेदों को दूर करने के लिए संवाद और एक-दूसरे की बात सुनना महत्वपूर्ण है।
केंद्र पर हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। इसके बाद दोनों दंपत्तियों ने अपने वैवाहिक जीवन को आगे बढ़ाने और साथ रहने का निर्णय लिया।
पहला मामला: सोनम और ज्ञानेंद्र सिंह के विवाद में बनी सहमति
परिवार परामर्श केंद्र में आया पहला मामला आवेदिका सोनम पत्नी ज्ञानेंद्र सिंह निवासी ग्राम क्योलारी, थाना रेढ़र से संबंधित था। सोनम ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि उसके पति और ससुराल पक्ष के लोग उसके साथ मारपीट करते हैं तथा उसे प्रताड़ित किया जाता है।
शिकायत के बाद मामले को परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया। केंद्र पर दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी गई। काउंसलर्स ने मामले की परिस्थितियों को समझते हुए पति-पत्नी तथा उनके परिजनों को आपसी विवाद समाप्त करने और रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए समझाया।
परामर्श के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई गई, जिससे विवाद को लेकर सहमति बनाने का रास्ता निकला। इसके बाद सोनम और ज्ञानेंद्र सिंह साथ रहने के लिए राजी हो गए। दोनों पक्षों की सहमति से मामले का निस्तारण किया गया।
इस पहल के माध्यम से परिवार के सदस्यों को आपसी मतभेद दूर करने और वैवाहिक संबंध को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
दूसरा मामला: शहनाज और फिरोज भी साथ रहने को हुए तैयार
परिवार परामर्श केंद्र में दूसरा मामला ग्राम भदेवरा, थाना कोंच निवासी शहनाज पत्नी फिरोज का था। शहनाज ने भी शिकायत की थी कि उसका पति और ससुराल पक्ष के लोग उसके साथ मारपीट करते हैं तथा उसे प्रताड़ित किया जाता है।
शिकायत के आधार पर मामले को परिवार परामर्श केंद्र के समक्ष रखा गया। यहां संबंधित पक्षों को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी गईं। काउंसलर्स ने दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद का समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया।
परिवार परामर्श केंद्र की टीम ने पति-पत्नी और उनके परिजनों को समझाया कि किसी भी रिश्ते में मतभेद उत्पन्न होने पर बातचीत, संयम और एक-दूसरे की भावनाओं को समझने का प्रयास आवश्यक होता है। लंबे समय तक विवाद बने रहने से परिवार के सदस्यों के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं, इसलिए समस्याओं को समय रहते सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
परामर्श के बाद शहनाज और फिरोज के बीच भी सहमति बन गई। दोनों पक्षों ने साथ रहने का निर्णय लिया और मामले का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।
परिवार परामर्श केंद्र की भूमिका रही महत्वपूर्ण
दोनों मामलों में परिवार परामर्श केंद्र के काउंसलर्स ने सूझबूझ के साथ बातचीत कराकर विवादों को सुलझाने का प्रयास किया। पारिवारिक मामलों में कई बार आपसी गलतफहमियां, संवाद की कमी और रिश्तेदारों के बीच मतभेद परिस्थितियों को जटिल बना देते हैं। ऐसे में निष्पक्ष तरीके से दोनों पक्षों की बात सुनना और उन्हें अपनी समस्याएं रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण माना जाता है।
कोंच परिवार परामर्श केंद्र में भी इसी प्रक्रिया के तहत दोनों मामलों में संबंधित लोगों के बीच बातचीत कराई गई। समझाइश के बाद दोनों दंपत्तियों ने साथ रहने पर सहमति जताई। इससे विवादों के समाधान के लिए संवाद और आपसी सहमति की उपयोगिता सामने आई।
हालांकि, पारिवारिक विवादों में समझौते के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा, सम्मान और इच्छा का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि किसी महिला या परिवार के सदस्य को दोबारा हिंसा अथवा प्रताड़ना का सामना करना पड़े, तो उसे सहायता लेने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी
परिवार परामर्श केंद्र में दोनों मामलों के निस्तारण के दौरान काउंसलर पुरुषोत्तम दास रिछारिया और मोहम्मद जाहिद खान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके साथ परिवार परामर्श केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ उपनिरीक्षक विमलेश कुमार तथा महिला आरक्षी अर्चना केसरवानी भी मौजूद रहीं।
टीम ने दोनों मामलों में संबंधित पक्षों से बातचीत कर उन्हें समझाने और आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों दंपत्तियों के साथ रहने पर राजी होने के आधार पर मामलों का निस्तारण किया गया।
संवाद और समझदारी से मजबूत हो सकते हैं पारिवारिक रिश्ते
परिवार समाज की महत्वपूर्ण इकाई है। पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों का प्रभाव केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पड़ सकता है। इसलिए पारिवारिक समस्याओं का समाधान तलाशने में संवाद, धैर्य और पारस्परिक सम्मान की अहम भूमिका होती है।
परिवार परामर्श केंद्र जैसे प्रयास विवादों से जूझ रहे दंपत्तियों को अपनी बात रखने और समस्याओं का समाधान तलाशने का अवसर प्रदान करते हैं। समय रहते उचित परामर्श मिलने से कई मामलों में गलतफहमियां दूर हो सकती हैं और रिश्तों को सुधारने का अवसर मिल सकता है।
कोंच में रविवार को सामने आए दोनों मामलों में भी काउंसलिंग के बाद पति-पत्नी साथ रहने के लिए सहमत हुए। इस प्रकार परिवार परामर्श केंद्र ने दो परिवारों के बीच उत्पन्न विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की दिशा में पहल की।
निष्कर्ष: कोंच कोतवाली स्थित परिवार परामर्श केंद्र में दो पारिवारिक विवादों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया। सोनम-ज्ञानेंद्र सिंह और शहनाज-फिरोज ने परामर्श के बाद साथ रहने का निर्णय लिया। केंद्र की इस पहल ने यह संदेश दिया कि पारिवारिक समस्याओं के समाधान में संवाद और समझदारी महत्वपूर्ण हैं, बशर्ते रिश्ते में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा, सहमति और सम्मान को प्राथमिकता दी जाए।
