जालौन में 60 फुट ऊंचे रावण के पुतले को अंतिम रूप दे रहे साहिल खान, आतिशबाजी बनेगी दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
जालौन। विजयादशमी के पर्व को लेकर नगर में उत्साह का माहौल बनने लगा है। बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक दशहरा उत्सव को यादगार बनाने के लिए श्री बाराही देवी मंदिर मेला ग्राउंड में तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। इस बार यहां लगभग 60 फुट ऊंचा रावण का पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। पुतले के निर्माण और सजावट का कार्य युवा कारीगर साहिल खान अपनी टीम के साथ कर रहे हैं। पर्व नजदीक आने के कारण कारीगर दिन-रात मेहनत करके पुतले को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

इस वर्ष रावण के पुतले को पहले से अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बनाने के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। आयोजन के दौरान विशेष आतिशबाजी की भी तैयारी है, जो रावण दहन के समय दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन सकती है। दशहरा पर्व को लेकर नगर के लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है और मेला ग्राउंड में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
60 फुट ऊंचा रावण बनेगा आकर्षण का केंद्र
श्री बाराही देवी मंदिर मेला ग्राउंड में तैयार किया जा रहा विशाल रावण का पुतला इस बार दशहरा आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहेगा। करीब 60 फुट ऊंचाई वाले इस पुतले को भव्य रूप देने के लिए कारीगर हर छोटी-बड़ी बारीकी पर ध्यान दे रहे हैं। पुतले की बनावट, सजावट और उसके बाहरी स्वरूप को आकर्षक बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा ऐसा अवसर है, जो समाज को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। रावण दहन के आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस परंपरा को देखने के लिए उत्साहित रहते हैं। ऐसे में विशाल पुतले का निर्माण आयोजन को विशेष पहचान देता है।
इस बार आयोजकों और कारीगरों की कोशिश है कि रावण दहन का कार्यक्रम दर्शकों के लिए यादगार बने। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पुतले को नया स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे परंपरा के साथ नवीनता का भी समावेश हो सके।
साहिल खान ने संभाली पुरानी परंपरा की जिम्मेदारी
जालौन नगर में दशहरा पर्व पर रावण का पुतला तैयार करने और उसके दहन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस काम से जुड़े रहे कासिम चच्चा वर्षों तक अपने हुनर और अनुभव के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहे। उनके हाथों से तैयार होने वाले पुतलों का दशहरा आयोजन में विशेष महत्व रहता था।
करीब तीन वर्ष पहले कासिम चच्चा के निधन के बाद इस काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवा कारीगर साहिल खान ने संभाली। उन्होंने अपने कौशल और मेहनत के बल पर इस परंपरा को जारी रखने का प्रयास किया है। अब साहिल अपनी टीम के साथ रावण के पुतले का निर्माण कर रहे हैं और हर वर्ष इसे बेहतर रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
किसी पारंपरिक कला को जीवित रखना आसान नहीं होता। इसके लिए अनुभव, धैर्य, मेहनत और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। साहिल खान का प्रयास इस बात का उदाहरण है कि नई पीढ़ी किस प्रकार पुराने हुनर को अपनाकर उसे आगे बढ़ा सकती है। उनके काम में परंपरा को बनाए रखने के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की कोशिश भी दिखाई देती है।
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल तकनीक से मिलेगा नया स्वरूप
समय के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। जालौन में तैयार किए जा रहे रावण के पुतले में भी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुतले को अधिक आकर्षक बनाना और दशहरा आयोजन के अनुभव को बेहतर करना है।
आधुनिक तकनीक के उपयोग से पारंपरिक पुतलों की प्रस्तुति में नए प्रयोग किए जा सकते हैं। हालांकि, ऐसे बड़े पुतले का निर्माण करने के लिए कारीगरों को आकार, संतुलन, सजावट और अन्य तकनीकी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक काम करना पड़ता है। साहिल खान और उनकी टीम इसी मेहनत में लगी हुई है।
पुतले को तैयार करने के लिए केवल सामग्री जुटाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके अलग-अलग हिस्सों को सही ढंग से जोड़ना, बाहरी सजावट करना और पूरे ढांचे को व्यवस्थित रखना भी महत्वपूर्ण होता है। विशाल आकार के कारण निर्माण कार्य में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। पर्व की निर्धारित तिथि से पहले सभी काम पूरे करना भी कारीगरों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती रहती है।
आतिशबाजी से बढ़ेगी रावण दहन की रौनक
इस बार दशहरा उत्सव में रावण दहन के साथ विशेष आतिशबाजी की भी तैयारी की जा रही है। आयोजन के दौरान आतिशबाजी लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण बन सकती है। विशाल पुतले के दहन और रोशनी से सजे कार्यक्रम को देखने के लिए नगरवासियों में उत्साह बना हुआ है।
दशहरा के अवसर पर होने वाला रावण दहन भारतीय समाज में बुराई, अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि अंततः सत्य और सदाचार की ही विजय होती है। इसलिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है।
हालांकि, आतिशबाजी और रावण दहन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। आयोजन स्थल पर दर्शकों के लिए सुरक्षित दूरी बनाए रखना, भीड़ को व्यवस्थित करना और आग से बचाव के उचित इंतजाम करना महत्वपूर्ण होगा। बच्चों को आतिशबाजी के नजदीक जाने से रोकना और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
दमोह और दिबियापुर में भी दिखा चुके हैं हुनर
साहिल खान केवल जालौन में ही रावण के पुतले तैयार नहीं करते, बल्कि वह दमोह और दिबियापुर सहित अन्य स्थानों पर भी पुतलों का निर्माण कर चुके हैं। अलग-अलग जगहों पर काम करने के अनुभव ने उन्हें इस पारंपरिक कला को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।
रावण के बड़े पुतले तैयार करने में कारीगरी के साथ योजना और समय प्रबंधन की भी अहम भूमिका होती है। पुतले की ऊंचाई के अनुसार सामग्री का चयन, ढांचे की मजबूती, सजावट और अंतिम रूप देने तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है। ऐसे काम में टीम के सदस्यों के बीच तालमेल भी बेहद जरूरी होता है।
साहिल खान अपनी टीम के सहयोग से इस वर्ष जालौन के मेला ग्राउंड में तैयार किए जा रहे पुतले को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उनके प्रयास से कासिम चच्चा की शुरू की गई परंपरा को आगे बढ़ाने का काम जारी है। यह निरंतरता स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
दशहरा पर्व को लेकर नगरवासियों में उत्साह
विजयादशमी नजदीक आने के साथ ही श्री बाराही देवी मंदिर मेला ग्राउंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। लगभग 60 फुट ऊंचे रावण के पुतले को देखने और दहन का कार्यक्रम देखने के लिए लोगों में उत्सुकता है। आयोजन की तैयारियां पूरी होने के बाद मेला ग्राउंड में दशहरा उत्सव की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।
दशहरा का पर्व परिवारों और समाज को एक साथ आने का अवसर भी देता है। धार्मिक परंपराओं के साथ मेलों, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामूहिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा मिलता है। ऐसे कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कारीगरों की प्रतिभा को पहचान दिलाने में भी योगदान देते हैं।
जालौन में इस बार का रावण दहन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें वर्षों पुरानी परंपरा और आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिलेगा। एक ओर साहिल खान अपने हुनर से विशाल पुतले को अंतिम रूप दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विशेष आतिशबाजी आयोजन को आकर्षक बनाने की तैयारी का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, श्री बाराही देवी मंदिर मेला ग्राउंड में दशहरा उत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 60 फुट ऊंचे रावण का पुतला, साहिल खान की मेहनत और आतिशबाजी की तैयारी इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहेंगी। अब नगरवासियों को विजयादशमी के अवसर पर होने वाले रावण दहन कार्यक्रम का इंतजार है, जो हर वर्ष की तरह बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देगा।
