जालौन के पड़री गांव में मनरेगा कार्यों पर सवाल, पांच वर्क आईडी में 194 मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने का आरोप

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

80 वर्षीय बीमार महिला का नाम भी हाजिरी में शामिल होने का दावा, रात की तस्वीरों और मकान के बैकग्राउंड पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल; जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन

उरई/महेवा, जालौन। जनपद जालौन के विकासखंड महेवा की ग्राम पंचायत पड़री में ग्रामीण रोजगार से जुड़ी सरकारी योजना के तहत दर्ज मजदूरों की उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में पांच अलग-अलग वर्क आईडी के माध्यम से कुल 194 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई, जबकि मौके पर कोई भी मजदूर काम करता हुआ दिखाई नहीं दिया। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कार्यों की वास्तविक स्थिति, उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कराने की मांग उठाई है।

इस प्रकरण ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार, हाजिरी में एक ऐसी बुजुर्ग महिला का नाम भी शामिल है, जिसकी उम्र करीब 80 वर्ष है और जो बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ बताई जा रही है। आरोप है कि महिला पिछले लगभग 15 दिनों से अपने मायके हिम्मतपुर में रह रही है। ऐसे में उसके नाम पर दर्ज उपस्थिति की सत्यता की जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

पांच कार्यों में 194 मजदूरों की उपस्थिति पर विवाद

ग्रामीणों के मुताबिक, बुधवार को एनएमएमएस एप पर ग्राम पंचायत पड़री में संचालित पांच कार्यों के लिए कुल 194 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। उनका कहना है कि संबंधित स्थानों पर वास्तविक रूप से मजदूर काम करते नजर नहीं आए। इसी आधार पर ग्रामीणों ने डिजिटल हाजिरी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि कार्यस्थल पर मजदूर मौजूद नहीं थे, तो इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई? उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन भी जरूरी है।

इस प्रकरण में ग्राम प्रधान की ओर से दी गई जानकारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रधान ने बुधवार को छुट्टी होने के कारण किसी मजदूर के काम पर नहीं लगने की बात स्वीकार की। हालांकि, इस कथन और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच अंतर की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

80 वर्षीय महिला की हाजिरी को लेकर उठे सवाल

इस मामले का एक प्रमुख पहलू बुजुर्ग महिला के नाम पर दर्ज कथित उपस्थिति है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित महिला लगभग 80 वर्ष की हैं और बीमारी के चलते सामान्य रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। दावा किया गया है कि वह घटना के समय गांव में भी मौजूद नहीं थीं, बल्कि पिछले करीब पंद्रह दिनों से हिम्मतपुर स्थित अपने मायके में रह रही थीं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि महिला के नाम पर हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गई। यदि रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दिखाई गई है, तो इसकी पुष्टि के लिए संबंधित तारीख के डिजिटल विवरण, उपलब्ध तस्वीरों, कार्यस्थल के रिकॉर्ड और महिला के वास्तविक स्थान की जांच की जानी चाहिए।

हालांकि, इस संबंध में अभी किसी स्वतंत्र जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए महिला के नाम पर फर्जी हाजिरी दर्ज होने के आरोप को जांच के जरिए प्रमाणित किया जाना आवश्यक है।

रात की तस्वीरें और मकान का बैकग्राउंड बना जांच का आधार

ग्रामीणों ने एनएमएमएस एप पर दर्ज उपस्थिति से संबंधित तस्वीरों को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि कुछ तस्वीरें रात के समय की प्रतीत होती हैं, जबकि कुछ तस्वीरों के पीछे मकान दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित कार्य खेत में मेड़बंदी अथवा बंधा निर्माण से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में तस्वीरों में दिखाई देने वाले स्थान और वास्तविक कार्यस्थल का मिलान किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि तस्वीरें निर्धारित कार्यस्थल की नहीं हैं, तो यह उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का संकेत हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि तस्वीरों के समय, स्थान और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि तस्वीरें वास्तव में संबंधित कार्यस्थल पर ली गई थीं या नहीं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि केवल किसी तस्वीर में रात जैसा दृश्य दिखाई देने या पीछे मकान नजर आने से अपने आप फर्जीवाड़ा सिद्ध नहीं होता। इसके लिए तस्वीरों का तकनीकी परीक्षण, कार्यस्थल का निरीक्षण और संबंधित अभिलेखों का मिलान आवश्यक है। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि तस्वीरें किस तारीख और समय पर अपलोड की गईं तथा उनका संबंधित कार्यों से क्या संबंध है।

महिला मेट से लेकर पंचायत सचिव तक की भूमिका जांच के घेरे में

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में महिला मेट, ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और विकासखंड स्तर के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पांच कार्यों में बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज होने और मौके पर काम नहीं होने के दावे की जांच सभी संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी जालौन, झांसी मंडलायुक्त, लोकायुक्त मनरेगा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने की बात कही है। उनका दावा है कि शिकायत के साथ उपलब्ध तस्वीरें तथा अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

उनकी मांग है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिन कार्यों के नाम पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, उनकी वास्तविक प्रगति और भुगतान संबंधी अभिलेखों की भी जांच होनी चाहिए।

ग्राम प्रधान ने क्या कहा?

ग्राम प्रधान शिवसिंह के अनुसार, बुधवार को छुट्टी होने के कारण किसी भी मजदूर को काम पर नहीं लगाया गया था। उनका यह बयान दर्ज उपस्थिति के संबंध में उठे सवालों को और महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि, इस अंतर के पीछे क्या कारण रहा, इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही की जा सकेगी।

वहीं, पंचायत सचिव अंजिला पाल ने छुट्टी पर होने के कारण संबंधित कार्यों की जानकारी नहीं होने की बात कही। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पांचों कार्यों में मजदूरों की उपस्थिति किस प्रक्रिया के तहत दर्ज की गई थी।

ग्राम रोजगार सेवक शिल्पी निषाद से भी इस संबंध में पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि उन्होंने आमने-सामने बयान देने की बात कही थी। अगले दिन सुबह करीब 10 बजे दोबारा फोन किए जाने पर उनके पिता रामबाबू ने कथित तौर पर अभद्रता से बात की और बयान देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित कर्मचारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

बीडीओ ने चुनावी व्यस्तता का दिया हवाला

महेवा के खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि वह दो दिनों से एमएलसी चुनाव संबंधी कार्यों में व्यस्त थे। ऐसे में इस मामले की विस्तृत जानकारी और संबंधित अभिलेखों की जांच के संबंध में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

दूसरी ओर, उपायुक्त मनरेगा रामेन्द्र कुशवाह ने कथित अनियमितता की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि जांच कब शुरू होती है, किन अभिलेखों और कार्यस्थलों का सत्यापन किया जाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

ग्रामीण रोजगार योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध कराना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी पंचायत में बिना वास्तविक काम के उपस्थिति दर्ज किए जाने की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।

पड़री ग्राम पंचायत के मामले में पांच वर्क आईडी, 194 मजदूरों की कथित हाजिरी, बुजुर्ग महिला के नाम पर दर्ज उपस्थिति और तस्वीरों की प्रामाणिकता जैसे बिंदुओं का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए मस्टर रोल, एनएमएमएस एप पर उपलब्ध तस्वीरों और समय संबंधी विवरण, कार्यस्थल निरीक्षण रिपोर्ट, माप पुस्तिका तथा भुगतान रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।

फिलहाल, मामले में ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों और अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर सवाल उठे हैं, लेकिन दोष और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही किया जाना चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा और मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना जरूरी होगा। वहीं, यदि रिकॉर्ड में दर्ज उपस्थिति के पीछे कोई तकनीकी या प्रशासनिक कारण सामने आता है, तो उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

अब ग्रामीणों की निगाहें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। निष्पक्ष जांच से ही यह पता चल सकेगा कि पड़री ग्राम पंचायत में दर्ज 194 मजदूरों की उपस्थिति वास्तविक थी या सरकारी रोजगार योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितता हुई है।

रिपोर्ट: जालौन, उत्तर प्रदेश

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जालौन के पड़री गांव में मनरेगा कार्यों पर सवाल, पांच वर्क आईडी में 194 मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने का आरोप

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 22, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

80 वर्षीय बीमार महिला का नाम भी हाजिरी में शामिल होने का दावा, रात की तस्वीरों और मकान के बैकग्राउंड पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल; जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन

उरई/महेवा, जालौन। जनपद जालौन के विकासखंड महेवा की ग्राम पंचायत पड़री में ग्रामीण रोजगार से जुड़ी सरकारी योजना के तहत दर्ज मजदूरों की उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में पांच अलग-अलग वर्क आईडी के माध्यम से कुल 194 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई, जबकि मौके पर कोई भी मजदूर काम करता हुआ दिखाई नहीं दिया। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कार्यों की वास्तविक स्थिति, उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कराने की मांग उठाई है।

इस प्रकरण ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार, हाजिरी में एक ऐसी बुजुर्ग महिला का नाम भी शामिल है, जिसकी उम्र करीब 80 वर्ष है और जो बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ बताई जा रही है। आरोप है कि महिला पिछले लगभग 15 दिनों से अपने मायके हिम्मतपुर में रह रही है। ऐसे में उसके नाम पर दर्ज उपस्थिति की सत्यता की जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

पांच कार्यों में 194 मजदूरों की उपस्थिति पर विवाद

ग्रामीणों के मुताबिक, बुधवार को एनएमएमएस एप पर ग्राम पंचायत पड़री में संचालित पांच कार्यों के लिए कुल 194 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। उनका कहना है कि संबंधित स्थानों पर वास्तविक रूप से मजदूर काम करते नजर नहीं आए। इसी आधार पर ग्रामीणों ने डिजिटल हाजिरी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि कार्यस्थल पर मजदूर मौजूद नहीं थे, तो इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई? उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन भी जरूरी है।

इस प्रकरण में ग्राम प्रधान की ओर से दी गई जानकारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रधान ने बुधवार को छुट्टी होने के कारण किसी मजदूर के काम पर नहीं लगने की बात स्वीकार की। हालांकि, इस कथन और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच अंतर की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

80 वर्षीय महिला की हाजिरी को लेकर उठे सवाल

इस मामले का एक प्रमुख पहलू बुजुर्ग महिला के नाम पर दर्ज कथित उपस्थिति है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित महिला लगभग 80 वर्ष की हैं और बीमारी के चलते सामान्य रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। दावा किया गया है कि वह घटना के समय गांव में भी मौजूद नहीं थीं, बल्कि पिछले करीब पंद्रह दिनों से हिम्मतपुर स्थित अपने मायके में रह रही थीं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि महिला के नाम पर हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गई। यदि रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दिखाई गई है, तो इसकी पुष्टि के लिए संबंधित तारीख के डिजिटल विवरण, उपलब्ध तस्वीरों, कार्यस्थल के रिकॉर्ड और महिला के वास्तविक स्थान की जांच की जानी चाहिए।

हालांकि, इस संबंध में अभी किसी स्वतंत्र जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए महिला के नाम पर फर्जी हाजिरी दर्ज होने के आरोप को जांच के जरिए प्रमाणित किया जाना आवश्यक है।

रात की तस्वीरें और मकान का बैकग्राउंड बना जांच का आधार

ग्रामीणों ने एनएमएमएस एप पर दर्ज उपस्थिति से संबंधित तस्वीरों को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि कुछ तस्वीरें रात के समय की प्रतीत होती हैं, जबकि कुछ तस्वीरों के पीछे मकान दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित कार्य खेत में मेड़बंदी अथवा बंधा निर्माण से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में तस्वीरों में दिखाई देने वाले स्थान और वास्तविक कार्यस्थल का मिलान किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि तस्वीरें निर्धारित कार्यस्थल की नहीं हैं, तो यह उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का संकेत हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि तस्वीरों के समय, स्थान और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि तस्वीरें वास्तव में संबंधित कार्यस्थल पर ली गई थीं या नहीं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि केवल किसी तस्वीर में रात जैसा दृश्य दिखाई देने या पीछे मकान नजर आने से अपने आप फर्जीवाड़ा सिद्ध नहीं होता। इसके लिए तस्वीरों का तकनीकी परीक्षण, कार्यस्थल का निरीक्षण और संबंधित अभिलेखों का मिलान आवश्यक है। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि तस्वीरें किस तारीख और समय पर अपलोड की गईं तथा उनका संबंधित कार्यों से क्या संबंध है।

महिला मेट से लेकर पंचायत सचिव तक की भूमिका जांच के घेरे में

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में महिला मेट, ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और विकासखंड स्तर के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पांच कार्यों में बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज होने और मौके पर काम नहीं होने के दावे की जांच सभी संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी जालौन, झांसी मंडलायुक्त, लोकायुक्त मनरेगा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने की बात कही है। उनका दावा है कि शिकायत के साथ उपलब्ध तस्वीरें तथा अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

उनकी मांग है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिन कार्यों के नाम पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, उनकी वास्तविक प्रगति और भुगतान संबंधी अभिलेखों की भी जांच होनी चाहिए।

ग्राम प्रधान ने क्या कहा?

ग्राम प्रधान शिवसिंह के अनुसार, बुधवार को छुट्टी होने के कारण किसी भी मजदूर को काम पर नहीं लगाया गया था। उनका यह बयान दर्ज उपस्थिति के संबंध में उठे सवालों को और महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि, इस अंतर के पीछे क्या कारण रहा, इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही की जा सकेगी।

वहीं, पंचायत सचिव अंजिला पाल ने छुट्टी पर होने के कारण संबंधित कार्यों की जानकारी नहीं होने की बात कही। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पांचों कार्यों में मजदूरों की उपस्थिति किस प्रक्रिया के तहत दर्ज की गई थी।

ग्राम रोजगार सेवक शिल्पी निषाद से भी इस संबंध में पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि उन्होंने आमने-सामने बयान देने की बात कही थी। अगले दिन सुबह करीब 10 बजे दोबारा फोन किए जाने पर उनके पिता रामबाबू ने कथित तौर पर अभद्रता से बात की और बयान देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित कर्मचारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

बीडीओ ने चुनावी व्यस्तता का दिया हवाला

महेवा के खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि वह दो दिनों से एमएलसी चुनाव संबंधी कार्यों में व्यस्त थे। ऐसे में इस मामले की विस्तृत जानकारी और संबंधित अभिलेखों की जांच के संबंध में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

दूसरी ओर, उपायुक्त मनरेगा रामेन्द्र कुशवाह ने कथित अनियमितता की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि जांच कब शुरू होती है, किन अभिलेखों और कार्यस्थलों का सत्यापन किया जाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

ग्रामीण रोजगार योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध कराना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी पंचायत में बिना वास्तविक काम के उपस्थिति दर्ज किए जाने की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।

पड़री ग्राम पंचायत के मामले में पांच वर्क आईडी, 194 मजदूरों की कथित हाजिरी, बुजुर्ग महिला के नाम पर दर्ज उपस्थिति और तस्वीरों की प्रामाणिकता जैसे बिंदुओं का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए मस्टर रोल, एनएमएमएस एप पर उपलब्ध तस्वीरों और समय संबंधी विवरण, कार्यस्थल निरीक्षण रिपोर्ट, माप पुस्तिका तथा भुगतान रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।

फिलहाल, मामले में ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों और अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर सवाल उठे हैं, लेकिन दोष और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही किया जाना चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा और मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना जरूरी होगा। वहीं, यदि रिकॉर्ड में दर्ज उपस्थिति के पीछे कोई तकनीकी या प्रशासनिक कारण सामने आता है, तो उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

अब ग्रामीणों की निगाहें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। निष्पक्ष जांच से ही यह पता चल सकेगा कि पड़री ग्राम पंचायत में दर्ज 194 मजदूरों की उपस्थिति वास्तविक थी या सरकारी रोजगार योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितता हुई है।

रिपोर्ट: जालौन, उत्तर प्रदेश