कालपी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का श्रद्धापूर्वक विसर्जन, जयकारों से गूंजा बिहारी जी घाट

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देव पटेल

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन

गाजे-बाजे के साथ घाट पहुंचे श्रद्धालु, नम आंखों से दी मां दुर्गा को विदाई; पुलिस और प्रशासन ने संभाली सुरक्षा की कमान

कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश। शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ ही धर्मनगरी कालपी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के बीच संपन्न हुआ। नगर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक भक्तिमय माहौल देखने को मिला। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाकर श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ विसर्जन स्थल तक पहुंचे। इस दौरान पूरा क्षेत्र माता रानी के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद मां को भावभीनी विदाई दी और अगले वर्ष दोबारा आगमन की प्रार्थना की।

यमुना नदी के तट पर स्थित बिहारी जी घाट के समीप विसर्जन के लिए तैयार किए गए अस्थायी सरोवर में देवी प्रतिमाओं का धार्मिक परंपराओं के अनुसार विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। विसर्जन के दौरान श्रद्धा और भावुकता का अनूठा संगम दिखाई दिया।

नवरात्रि के दौरान सजे थे देवी पंडाल

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर कालपी नगर और आसपास के गांवों में जगह-जगह मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। विभिन्न पूजा समितियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में देवी पंडाल सजाकर नौ दिनों तक धार्मिक आयोजन किए। इन पंडालों में मां दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से भक्तों ने नवरात्रि पर्व मनाया।

नवरात्रि के अंतिम दिनों में देवी पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की खुशहाली, अच्छी सेहत और जीवन में सुख-शांति की कामना की। पर्व के समापन पर जब प्रतिमाओं को विदाई देने का समय आया तो श्रद्धालु भावुक नजर आए।

कालपी नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विसर्जन को लेकर विशेष उत्साह रहा। लोगों ने मिलकर देवी प्रतिमाओं को विदाई देने की तैयारियां कीं और पारंपरिक तरीके से शोभायात्राएं निकालीं।

गाजे-बाजे के साथ बिहारी जी घाट पहुंचे श्रद्धालु

उसरगांव, बैरई, जोल्हूपुर सहित आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु अपनी-अपनी टोलियों के साथ देवी प्रतिमाएं लेकर बिहारी जी घाट पहुंचे। शोभायात्राओं में ढोल-नगाड़ों और अन्य वाद्ययंत्रों की धुन के बीच माता रानी के जयकारे लगाए गए। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ विसर्जन यात्रा में भाग लिया।

शोभायात्रा के दौरान भक्त मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए आगे बढ़ते रहे। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने धार्मिक उल्लास के साथ इस आयोजन में सहभागिता की। प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले जाने के बाद पूजा-अर्चना की गई और परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उन्हें अस्थायी सरोवर में विसर्जित किया गया।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। माता रानी की विदाई के समय भक्तों ने अगले वर्ष फिर से आने के जयकारे लगाए। घाट पर मौजूद लोगों के चेहरों पर जहां पर्व के समापन की भावुकता थी, वहीं अगले वर्ष मां के आगमन की उम्मीद और उत्साह भी दिखाई दिया।

नगर के मोहल्लों से भी निकलीं विसर्जन यात्राएं

कालपी नगर के विभिन्न मोहल्लों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं को भी धूमधाम के साथ विसर्जन के लिए ले जाया गया। पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर विसर्जन कार्यक्रम को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराया।

नवरात्रि के दौरान जिन पंडालों में श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर मां की आराधना की थी, वहां से प्रतिमाओं को शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। भक्तों ने मां के दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर विदाई दी। इसके बाद प्रतिमाओं को निर्धारित विसर्जन स्थल तक पहुंचाया गया।

इस आयोजन ने नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत किया। अलग-अलग मोहल्लों और गांवों से आए लोगों की सहभागिता से सामूहिक आस्था का दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पर्व के सफल समापन पर संतोष व्यक्त किया।

विसर्जन स्थल पर प्रशासन रहा सतर्क

देवी प्रतिमाओं के विसर्जन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। यमुना नदी के किनारे स्थित बिहारी जी घाट और विसर्जन के लिए बनाए गए अस्थायी सरोवर का अधिकारियों ने निरीक्षण किया।

उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य, क्षेत्राधिकारी राजेश कमल और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय ब्रह्म तिवारी सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने विसर्जन स्थल पर तैनात कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

अधिकारियों का उद्देश्य विसर्जन के दौरान भीड़ को व्यवस्थित रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। घाट पर आने वाले लोगों को निर्धारित स्थान पर ही प्रतिमाओं का विसर्जन करने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया।

नदी के तट पर आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में सावधानी बरतना आवश्यक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अमले ने विसर्जन स्थल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, ताकि धार्मिक आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।

पुलिस और अग्निशमन विभाग की रही तैनाती

विसर्जन कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मौके पर एडीशनल इंस्पेक्टर अवनीश कुमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक उदय प्रताप सिंह, चौकी प्रभारी दिलीप मिश्रा और महिला उपनिरीक्षक ममतेश कुमारी सहित पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

इसके अतिरिक्त अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को भी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तैनात किया गया। पुलिसकर्मियों ने विसर्जन स्थल पर व्यवस्थाओं की निगरानी की और आयोजन को शांतिपूर्ण बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और पुलिस बल की तैनाती से विसर्जन कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को सतर्क रहने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश

कालपी में देवी प्रतिमाओं का विसर्जन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक सहभागिता और सामूहिक आस्था की भावना को भी प्रदर्शित किया। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मिलकर मां दुर्गा को विदाई दी। विभिन्न पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना करने के बाद विसर्जन के साथ पर्व का समापन हुआ। भक्तों ने मां से प्रार्थना की कि आने वाला वर्ष सभी के लिए मंगलमय हो और समाज में शांति, सद्भाव तथा खुशहाली बनी रहे।

बिहारी जी घाट पर गूंजते जयकारों और श्रद्धालुओं की भावनाओं के बीच देवी प्रतिमाओं को विदाई दी गई। इस तरह कालपी में नवरात्रि उत्सव का समापन धार्मिक आस्था, परंपरा और उत्साह के वातावरण में हुआ।

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कालपी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का श्रद्धापूर्वक विसर्जन, जयकारों से गूंजा बिहारी जी घाट

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 22, 2026

देव पटेल

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन

गाजे-बाजे के साथ घाट पहुंचे श्रद्धालु, नम आंखों से दी मां दुर्गा को विदाई; पुलिस और प्रशासन ने संभाली सुरक्षा की कमान

कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश। शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ ही धर्मनगरी कालपी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के बीच संपन्न हुआ। नगर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक भक्तिमय माहौल देखने को मिला। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाकर श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ विसर्जन स्थल तक पहुंचे। इस दौरान पूरा क्षेत्र माता रानी के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद मां को भावभीनी विदाई दी और अगले वर्ष दोबारा आगमन की प्रार्थना की।

यमुना नदी के तट पर स्थित बिहारी जी घाट के समीप विसर्जन के लिए तैयार किए गए अस्थायी सरोवर में देवी प्रतिमाओं का धार्मिक परंपराओं के अनुसार विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। विसर्जन के दौरान श्रद्धा और भावुकता का अनूठा संगम दिखाई दिया।

नवरात्रि के दौरान सजे थे देवी पंडाल

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर कालपी नगर और आसपास के गांवों में जगह-जगह मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। विभिन्न पूजा समितियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में देवी पंडाल सजाकर नौ दिनों तक धार्मिक आयोजन किए। इन पंडालों में मां दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से भक्तों ने नवरात्रि पर्व मनाया।

नवरात्रि के अंतिम दिनों में देवी पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की खुशहाली, अच्छी सेहत और जीवन में सुख-शांति की कामना की। पर्व के समापन पर जब प्रतिमाओं को विदाई देने का समय आया तो श्रद्धालु भावुक नजर आए।

कालपी नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विसर्जन को लेकर विशेष उत्साह रहा। लोगों ने मिलकर देवी प्रतिमाओं को विदाई देने की तैयारियां कीं और पारंपरिक तरीके से शोभायात्राएं निकालीं।

गाजे-बाजे के साथ बिहारी जी घाट पहुंचे श्रद्धालु

उसरगांव, बैरई, जोल्हूपुर सहित आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु अपनी-अपनी टोलियों के साथ देवी प्रतिमाएं लेकर बिहारी जी घाट पहुंचे। शोभायात्राओं में ढोल-नगाड़ों और अन्य वाद्ययंत्रों की धुन के बीच माता रानी के जयकारे लगाए गए। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ विसर्जन यात्रा में भाग लिया।

शोभायात्रा के दौरान भक्त मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए आगे बढ़ते रहे। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने धार्मिक उल्लास के साथ इस आयोजन में सहभागिता की। प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले जाने के बाद पूजा-अर्चना की गई और परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उन्हें अस्थायी सरोवर में विसर्जित किया गया।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। माता रानी की विदाई के समय भक्तों ने अगले वर्ष फिर से आने के जयकारे लगाए। घाट पर मौजूद लोगों के चेहरों पर जहां पर्व के समापन की भावुकता थी, वहीं अगले वर्ष मां के आगमन की उम्मीद और उत्साह भी दिखाई दिया।

नगर के मोहल्लों से भी निकलीं विसर्जन यात्राएं

कालपी नगर के विभिन्न मोहल्लों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं को भी धूमधाम के साथ विसर्जन के लिए ले जाया गया। पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर विसर्जन कार्यक्रम को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराया।

नवरात्रि के दौरान जिन पंडालों में श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर मां की आराधना की थी, वहां से प्रतिमाओं को शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। भक्तों ने मां के दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर विदाई दी। इसके बाद प्रतिमाओं को निर्धारित विसर्जन स्थल तक पहुंचाया गया।

इस आयोजन ने नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत किया। अलग-अलग मोहल्लों और गांवों से आए लोगों की सहभागिता से सामूहिक आस्था का दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पर्व के सफल समापन पर संतोष व्यक्त किया।

विसर्जन स्थल पर प्रशासन रहा सतर्क

देवी प्रतिमाओं के विसर्जन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। यमुना नदी के किनारे स्थित बिहारी जी घाट और विसर्जन के लिए बनाए गए अस्थायी सरोवर का अधिकारियों ने निरीक्षण किया।

उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य, क्षेत्राधिकारी राजेश कमल और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय ब्रह्म तिवारी सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने विसर्जन स्थल पर तैनात कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

अधिकारियों का उद्देश्य विसर्जन के दौरान भीड़ को व्यवस्थित रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। घाट पर आने वाले लोगों को निर्धारित स्थान पर ही प्रतिमाओं का विसर्जन करने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया।

नदी के तट पर आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में सावधानी बरतना आवश्यक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अमले ने विसर्जन स्थल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, ताकि धार्मिक आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।

पुलिस और अग्निशमन विभाग की रही तैनाती

विसर्जन कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मौके पर एडीशनल इंस्पेक्टर अवनीश कुमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक उदय प्रताप सिंह, चौकी प्रभारी दिलीप मिश्रा और महिला उपनिरीक्षक ममतेश कुमारी सहित पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

इसके अतिरिक्त अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को भी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तैनात किया गया। पुलिसकर्मियों ने विसर्जन स्थल पर व्यवस्थाओं की निगरानी की और आयोजन को शांतिपूर्ण बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और पुलिस बल की तैनाती से विसर्जन कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को सतर्क रहने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश

कालपी में देवी प्रतिमाओं का विसर्जन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक सहभागिता और सामूहिक आस्था की भावना को भी प्रदर्शित किया। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मिलकर मां दुर्गा को विदाई दी। विभिन्न पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना करने के बाद विसर्जन के साथ पर्व का समापन हुआ। भक्तों ने मां से प्रार्थना की कि आने वाला वर्ष सभी के लिए मंगलमय हो और समाज में शांति, सद्भाव तथा खुशहाली बनी रहे।

बिहारी जी घाट पर गूंजते जयकारों और श्रद्धालुओं की भावनाओं के बीच देवी प्रतिमाओं को विदाई दी गई। इस तरह कालपी में नवरात्रि उत्सव का समापन धार्मिक आस्था, परंपरा और उत्साह के वातावरण में हुआ।