रेंढर पुलिस की सराहनीय पहल: नावली माता मंदिर मेले में बिछड़ी 20 माह की अदिति को मिशन शक्ति टीम ने सकुशल मां से मिलाया
रिपोर्ट: रोहित बोहरे, तहसील संवाददाता, कोच।
जालौन, उत्तर प्रदेश। जनपद जालौन के थाना रेंढर क्षेत्र में पुलिस का संवेदनशील और मानवीय चेहरा सामने आया है। नावली माता मंदिर में आयोजित मेले के दौरान अपने परिवार से बिछड़ी महज एक वर्ष आठ माह की मासूम बच्ची अदिति को मिशन शक्ति टीम ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित खोज निकाला और उसकी मां की गोद में पहुंचा दिया। बच्ची के सकुशल मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली और पुलिसकर्मियों के प्रति आभार जताया। मेले में मौजूद लोगों ने भी पुलिस टीम की कार्यशैली की सराहना की।

यह घटना बताती है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय आम नागरिकों की सहायता करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसके कर्तव्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नावली माता मंदिर मेले में परिवार से बिछड़ गई मासूम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नावली माता मंदिर में लगे मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। धार्मिक आयोजन और भारी भीड़ के बीच लोग मंदिर में दर्शन करने तथा मेले का आनंद लेने में व्यस्त थे। इसी दौरान ग्राम सर्र निवासी शशिकांत की छोटी बेटी अदिति अपने परिजनों से अलग हो गई।
अदिति की उम्र महज एक वर्ष आठ माह बताई गई है। इतनी कम उम्र में बच्ची का भीड़ के बीच परिवार से बिछड़ जाना परिजनों के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति थी। बच्ची अपने माता-पिता से दूर हो गई थी और मेले में रोते हुए इधर-उधर भटक रही थी।
मेले में मौजूद लोगों के बीच बच्ची को देखकर चिंता का माहौल बन सकता था, लेकिन इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात रेंढर पुलिस की मिशन शक्ति एवं एंटी रोमियो टीम की नजर उस पर पड़ी। टीम ने बिना देर किए बच्ची की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और उसे अपने संरक्षण में ले लिया।
पुलिस टीम ने दिखाई तत्परता और संवेदनशीलता
मासूम अदिति को रोता हुआ देखकर पुलिसकर्मियों ने सबसे पहले उसे सुरक्षित स्थान पर रखा। टीम के सदस्यों ने बच्ची को शांत कराने का प्रयास किया और उसे पानी पिलाया, ताकि वह सहज महसूस कर सके। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसके परिजनों का पता लगाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए।
भीड़भाड़ वाले मेले में किसी छोटे बच्चे के परिवार से बिछड़ने पर उसे सुरक्षित रखना और जल्द से जल्द उसके माता-पिता तक पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसी परिस्थितियों में पुलिस की सतर्कता और संवेदनशीलता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मिशन शक्ति टीम ने इसी जिम्मेदारी का परिचय दिया। बच्ची को अकेला छोड़ने के बजाय टीम ने उसकी देखभाल की और उसके परिवार की तलाश में जुट गई। पुलिसकर्मियों के इस प्रयास से बच्ची को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसके माता-पिता तक पहुंचने का रास्ता भी आसान हुआ।
कुछ ही देर में मां तक पहुंची अदिति
पुलिस टीम ने बच्ची के परिजनों की पहचान करने और उन्हें खोजने के लिए प्रयास किए। टीम की सक्रियता के चलते कुछ ही देर में अदिति की मां श्रीमती सीवी, पत्नी शशिकांत, का पता लगा लिया गया। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक पहचान सुनिश्चित करते हुए बच्ची को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया।
अपनी छोटी बेटी को सुरक्षित देखकर मां की भावनाएं छलक उठीं। बच्ची के मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक था, क्योंकि कुछ समय पहले तक उनकी मासूम बेटी भीड़ में उनसे बिछड़ी हुई थी और उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी।
बच्ची के पिता शशिकांत पुत्र वीर सिंह, निवासी ग्राम सर्र, ने भी राहत की सांस ली। उन्होंने पुलिसकर्मियों के प्रयासों की सराहना करते हुए टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
परिवार के लिए अपनी बच्ची को दोबारा सुरक्षित गोद में पाना किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई ने इस चिंता को खुशी में बदल दिया।
मिशन शक्ति फेज 6.0 के तहत सामने आया सराहनीय कार्य
यह पूरा घटनाक्रम मिशन शक्ति फेज 6.0 के तहत पुलिस की सक्रियता और महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत पुलिसकर्मी विभिन्न स्तरों पर लोगों की सहायता करने और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए काम करते हैं।
नावली माता मंदिर मेले में बच्ची को सुरक्षित संरक्षण देकर उसके परिजनों तक पहुंचाने की कार्रवाई पुलिस की इसी जिम्मेदारी से जुड़ी है। हालांकि यह घटना एक मासूम बच्ची से संबंधित थी, लेकिन इसमें दिखाई गई तत्परता आम नागरिकों के प्रति पुलिस की संवेदनशील भूमिका को भी सामने लाती है।
ऐसे अवसरों पर पुलिसकर्मियों का धैर्य और जिम्मेदारी बहुत मायने रखती है। बच्ची को शांत कराना, उसकी सुरक्षा का ध्यान रखना और उसके माता-पिता को तलाशना ऐसे कदम थे, जिनसे परिवार को समय रहते राहत मिल सकी।
इन पुलिसकर्मियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मासूम अदिति को उसके परिवार से मिलाने में थाना रेंढर की मिशन शक्ति टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सराहनीय कार्य में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम इस प्रकार हैं:
- वरिष्ठ उप निरीक्षक राम शंकर कटियार — प्रभारी, मिशन शक्ति टीम।
- उप निरीक्षक विजय कुमार — टीम सदस्य।
- कांस्टेबल असद खान — टीम सदस्य।
- कांस्टेबल अनिकेत — टीम सदस्य।
- कांस्टेबल मोहम्मद साहिल — टीम सदस्य।
- महिला कांस्टेबल राखी — टीम सदस्य।
- महिला कांस्टेबल सरिता देवी — टीम सदस्य।
इन सभी पुलिसकर्मियों के सामूहिक प्रयास से बच्ची को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जा सका। मेले में ड्यूटी के दौरान ऐसी सतर्कता दिखाना पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
लोगों ने कहा—पुलिस का मानवीय चेहरा सराहनीय
अदिति के सुरक्षित मिलने के बाद मेले में मौजूद लोगों ने पुलिस टीम के कार्य की प्रशंसा की। लोगों का कहना था कि वर्दी का महत्व केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता करने और संकट की स्थिति में लोगों के साथ खड़े रहने में भी है।
मिशन शक्ति टीम ने जिस तरह एक छोटी बच्ची की परेशानी को गंभीरता से लिया, वह सराहनीय है। इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में पुलिस की मौजूदगी और सतर्कता लोगों की सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
हालांकि किसी भी मेले में भीड़ के कारण बच्चों के अपने परिवार से अलग होने की आशंका बनी रहती है, इसलिए श्रद्धालुओं को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। छोटे बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ना, उन्हें हमेशा अपने साथ रखना और उनके कपड़ों में अभिभावक का संपर्क नंबर रखना उपयोगी कदम हो सकते हैं।
यदि कोई बच्चा मेले में अकेला या परेशान दिखाई दे, तो उसे अनजान लोगों के हवाले करने के बजाय नजदीकी पुलिसकर्मी या आयोजन स्थल पर तैनात सुरक्षा दल को सूचना देनी चाहिए।
निष्कर्ष: संवेदनशील पुलिसिंग की एक सकारात्मक मिसाल
नावली माता मंदिर मेले में बिछड़ी मासूम अदिति को सुरक्षित उसकी मां से मिलाने की घटना रेंढर पुलिस की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण है। मिशन शक्ति टीम ने समय रहते बच्ची को संरक्षण दिया, उसके परिजनों की तलाश की और उसे सुरक्षित परिवार के सुपुर्द कर दिया।
पुलिसकर्मियों की इस पहल से एक परिवार की चिंता दूर हुई और लोगों के सामने पुलिस की सहायता करने वाली भूमिका भी उजागर हुई। ऐसे कार्य समाज में सुरक्षा की भावना को मजबूत करते हैं और नागरिकों तथा पुलिस के बीच विश्वास बढ़ाने में योगदान देते हैं।
रिपोर्ट: रोहित बोहरे, तहसील संवाददाता, कोच।
