उरई में नवरात्रि सिंधी महोत्सव का भव्य आयोजन, मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

पूजा सुमित रावलानी की पहल पर नौ दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, गरबा-डांडिया, सिंधी भाषा और पारंपरिक प्रतियोगिताओं के जरिए नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास

उरई, जालौन। नवरात्रि के पावन अवसर पर उरई में भारतीय सिंधु सभा महिला मंडल की ओर से आयोजित नवरात्रि सिंधी महोत्सव उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के बीच संपन्न हुआ। राजेंद्र नगर स्थित पूज्य श्री झूलेलाल भवन, गिरधरपुरी में आयोजित इस नौ दिवसीय महोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ सिंधी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को अपनी भाषा, परंपराओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना रहा।

इस महोत्सव की संयोजिका भारतीय सिंधु सभा महिला मंडल उत्तर प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष पूजा सुमित रावलानी रहीं। उनके नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। समारोह में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती शशि सोमेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में समाज के गणमान्य व्यक्तियों, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।

नौ दिनों तक सांस्कृतिक गतिविधियों की रही धूम

नवरात्रि सिंधी महोत्सव के दौरान लगातार नौ दिनों तक अलग-अलग सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। प्रतियोगिताओं के माध्यम से न केवल मनोरंजन को बढ़ावा दिया गया, बल्कि सिंधी समाज की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास भी किया गया।

महोत्सव में सिंधी समाज के पारंपरिक व्यंजनों, सिंधी भाषा, लोकनृत्य, त्योहारों और रीति-रिवाजों से संबंधित प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हुए अपनी कला और रचनात्मकता का परिचय दिया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, परंपराओं, खानपान और सांस्कृतिक मूल्यों से बनती है।

कार्यक्रम स्थल पर धार्मिक वातावरण के साथ उत्सव की रौनक बनी रही। गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियों ने महोत्सव में विशेष उत्साह भर दिया। पारंपरिक संगीत की धुनों पर प्रतिभागियों ने नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। गरबा-डांडिया की रंगीन प्रस्तुतियों ने नवरात्रि के उत्सवी माहौल को और आकर्षक बनाया।

पूजा सुमित रावलानी ने संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

महोत्सव की संयोजिका पूजा सुमित रावलानी ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को आधुनिक शिक्षा और नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर रखना भी आवश्यक है। यदि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, पारंपरिक रीति-रिवाजों और त्योहारों के महत्व को समझेगी, तभी सांस्कृतिक विरासत को आगे की पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को सीखने और अपनी प्रतिभा सामने लाने का बेहतर अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों के भीतर आत्मविश्वास विकसित होता है और वे अपने समाज की परंपराओं को करीब से समझ पाते हैं। नवरात्रि सिंधी महोत्सव के माध्यम से भी यही प्रयास किया गया कि बच्चे सिंधी समाज की सांस्कृतिक विशेषताओं को जानें और उन्हें अपने दैनिक जीवन में महत्व दें।

पूजा सुमित रावलानी के अनुसार, किसी भी समुदाय की परंपराएं केवल पुराने रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे उसकी पहचान और सामाजिक एकता का आधार भी होती हैं। इसलिए सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व कर सके।

मुख्य अतिथि शशि सोमेंद्र सिंह ने की पहल की सराहना

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती शशि सोमेंद्र सिंह ने महोत्सव के आयोजन को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज की परंपराओं, भाषा और त्योहारों की जानकारी मिलने से नई पीढ़ी अपनी विरासत को बेहतर तरीके से समझ सकती है।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का महत्व केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है। इनके माध्यम से समाज के लोगों के बीच आपसी मेलजोल बढ़ता है और बच्चों को सामूहिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है। जब परिवार और समाज मिलकर अपनी परंपराओं का उत्सव मनाते हैं, तो बच्चों में अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति स्वाभाविक लगाव विकसित होता है।

मुख्य अतिथि ने बच्चों की भागीदारी और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के लिए उपयोगी बताया।

बच्चों की प्रतिभा को मिला प्रोत्साहन

महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह रहा। शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। इस पहल के माध्यम से बच्चों को मेहनत, लगन और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।

आयोजकों का मानना रहा कि बच्चों की उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से उनमें आगे बढ़ने का उत्साह पैदा होता है। साथ ही दूसरे विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन करने और अपने लक्ष्य की दिशा में मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।

शिक्षा और संस्कृति को एक साथ प्रोत्साहित करने वाला यह आयोजन इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें विद्यार्थियों को केवल अकादमिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जानने और उनमें भाग लेने का अवसर भी दिया गया।

डॉ. ममता स्वर्णकार ने भाषा और विरासत के महत्व को बताया

कार्यक्रम में डॉ. ममता स्वर्णकार ने बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के साथ उन्हें अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक समझ और सामाजिक मूल्यों की भी अहम भूमिका होती है।

उन्होंने बताया कि जब बच्चों को अपनी भाषा, लोककला, पारंपरिक खानपान और त्योहारों के बारे में जानने का अवसर मिलता है, तो वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को अधिक गहराई से समझ पाते हैं। ऐसे आयोजनों में सहभागिता से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सामूहिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाना सीखते हैं।

डॉ. ममता स्वर्णकार ने इस तरह के प्रयासों को सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में उपयोगी बताते हुए कहा कि समाज को बच्चों के भीतर अपनी विरासत के प्रति सम्मान और रुचि विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।

समाज के गणमान्य लोगों की रही सहभागिता

नवरात्रि सिंधी महोत्सव में सिंधी समाज के अनेक गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर आयोजन की शोभा बढ़ाई। समाज के मुखिया घनश्याम जैसवानी, लक्ष्मण दास बाबानी, चेतन दास बिंद्रानी, अजीत वलेचा, मोहन लाल रावलानी, दौलत राम दरयानी और जगदीश दरयानी सहित अन्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।

महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। दया आहूजा, मंजू माखीजा, जया लालवानी, मानसी कालरा, हर्षा लालवानी, मोना नेभवानी, इशिका आहूजा, भाग्या कारनानी, सौम्या लालवानी, मान्या लालवानी, पूजा वलेचा और दिव्या माखीजा सहित समाज की अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।

सभी ने सांस्कृतिक गतिविधियों और सम्मान समारोह में सहभागिता कर बच्चों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान समाज की एकजुटता और अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने की भावना दिखाई दी।

सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश

उरई में आयोजित नवरात्रि सिंधी महोत्सव ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बन सकते हैं। गरबा-डांडिया, सिंधी भाषा से जुड़ी गतिविधियों, पारंपरिक व्यंजनों और विद्यार्थियों के सम्मान के जरिए आयोजन ने शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया।

पूजा सुमित रावलानी की पहल पर आयोजित इस महोत्सव में बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने, समाज की परंपराओं को समझने और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। नौ दिनों तक चले इस आयोजन ने सिंधी समाज की सांस्कृतिक समृद्धि को सामने रखने के साथ परंपराओं के संरक्षण और अगली पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण का महत्व भी रेखांकित किया।

इस तरह नवरात्रि सिंधी महोत्सव धार्मिक उत्साह, सांस्कृतिक जागरूकता और प्रतिभा सम्मान का संगम बनकर सामने आया। आयोजन से जुड़ी गतिविधियों ने यह स्पष्ट किया कि समाज की विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए बच्चों और युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।

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उरई में नवरात्रि सिंधी महोत्सव का भव्य आयोजन, मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 22, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

पूजा सुमित रावलानी की पहल पर नौ दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, गरबा-डांडिया, सिंधी भाषा और पारंपरिक प्रतियोगिताओं के जरिए नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास

उरई, जालौन। नवरात्रि के पावन अवसर पर उरई में भारतीय सिंधु सभा महिला मंडल की ओर से आयोजित नवरात्रि सिंधी महोत्सव उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के बीच संपन्न हुआ। राजेंद्र नगर स्थित पूज्य श्री झूलेलाल भवन, गिरधरपुरी में आयोजित इस नौ दिवसीय महोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ सिंधी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को अपनी भाषा, परंपराओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना रहा।

इस महोत्सव की संयोजिका भारतीय सिंधु सभा महिला मंडल उत्तर प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष पूजा सुमित रावलानी रहीं। उनके नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। समारोह में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती शशि सोमेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में समाज के गणमान्य व्यक्तियों, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।

नौ दिनों तक सांस्कृतिक गतिविधियों की रही धूम

नवरात्रि सिंधी महोत्सव के दौरान लगातार नौ दिनों तक अलग-अलग सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। प्रतियोगिताओं के माध्यम से न केवल मनोरंजन को बढ़ावा दिया गया, बल्कि सिंधी समाज की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास भी किया गया।

महोत्सव में सिंधी समाज के पारंपरिक व्यंजनों, सिंधी भाषा, लोकनृत्य, त्योहारों और रीति-रिवाजों से संबंधित प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हुए अपनी कला और रचनात्मकता का परिचय दिया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, परंपराओं, खानपान और सांस्कृतिक मूल्यों से बनती है।

कार्यक्रम स्थल पर धार्मिक वातावरण के साथ उत्सव की रौनक बनी रही। गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियों ने महोत्सव में विशेष उत्साह भर दिया। पारंपरिक संगीत की धुनों पर प्रतिभागियों ने नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। गरबा-डांडिया की रंगीन प्रस्तुतियों ने नवरात्रि के उत्सवी माहौल को और आकर्षक बनाया।

पूजा सुमित रावलानी ने संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

महोत्सव की संयोजिका पूजा सुमित रावलानी ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को आधुनिक शिक्षा और नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर रखना भी आवश्यक है। यदि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, पारंपरिक रीति-रिवाजों और त्योहारों के महत्व को समझेगी, तभी सांस्कृतिक विरासत को आगे की पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को सीखने और अपनी प्रतिभा सामने लाने का बेहतर अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों के भीतर आत्मविश्वास विकसित होता है और वे अपने समाज की परंपराओं को करीब से समझ पाते हैं। नवरात्रि सिंधी महोत्सव के माध्यम से भी यही प्रयास किया गया कि बच्चे सिंधी समाज की सांस्कृतिक विशेषताओं को जानें और उन्हें अपने दैनिक जीवन में महत्व दें।

पूजा सुमित रावलानी के अनुसार, किसी भी समुदाय की परंपराएं केवल पुराने रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे उसकी पहचान और सामाजिक एकता का आधार भी होती हैं। इसलिए सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व कर सके।

मुख्य अतिथि शशि सोमेंद्र सिंह ने की पहल की सराहना

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती शशि सोमेंद्र सिंह ने महोत्सव के आयोजन को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज की परंपराओं, भाषा और त्योहारों की जानकारी मिलने से नई पीढ़ी अपनी विरासत को बेहतर तरीके से समझ सकती है।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का महत्व केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है। इनके माध्यम से समाज के लोगों के बीच आपसी मेलजोल बढ़ता है और बच्चों को सामूहिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है। जब परिवार और समाज मिलकर अपनी परंपराओं का उत्सव मनाते हैं, तो बच्चों में अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति स्वाभाविक लगाव विकसित होता है।

मुख्य अतिथि ने बच्चों की भागीदारी और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के लिए उपयोगी बताया।

बच्चों की प्रतिभा को मिला प्रोत्साहन

महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह रहा। शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। इस पहल के माध्यम से बच्चों को मेहनत, लगन और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।

आयोजकों का मानना रहा कि बच्चों की उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से उनमें आगे बढ़ने का उत्साह पैदा होता है। साथ ही दूसरे विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन करने और अपने लक्ष्य की दिशा में मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।

शिक्षा और संस्कृति को एक साथ प्रोत्साहित करने वाला यह आयोजन इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें विद्यार्थियों को केवल अकादमिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जानने और उनमें भाग लेने का अवसर भी दिया गया।

डॉ. ममता स्वर्णकार ने भाषा और विरासत के महत्व को बताया

कार्यक्रम में डॉ. ममता स्वर्णकार ने बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के साथ उन्हें अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक समझ और सामाजिक मूल्यों की भी अहम भूमिका होती है।

उन्होंने बताया कि जब बच्चों को अपनी भाषा, लोककला, पारंपरिक खानपान और त्योहारों के बारे में जानने का अवसर मिलता है, तो वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को अधिक गहराई से समझ पाते हैं। ऐसे आयोजनों में सहभागिता से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सामूहिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाना सीखते हैं।

डॉ. ममता स्वर्णकार ने इस तरह के प्रयासों को सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में उपयोगी बताते हुए कहा कि समाज को बच्चों के भीतर अपनी विरासत के प्रति सम्मान और रुचि विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।

समाज के गणमान्य लोगों की रही सहभागिता

नवरात्रि सिंधी महोत्सव में सिंधी समाज के अनेक गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर आयोजन की शोभा बढ़ाई। समाज के मुखिया घनश्याम जैसवानी, लक्ष्मण दास बाबानी, चेतन दास बिंद्रानी, अजीत वलेचा, मोहन लाल रावलानी, दौलत राम दरयानी और जगदीश दरयानी सहित अन्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।

महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। दया आहूजा, मंजू माखीजा, जया लालवानी, मानसी कालरा, हर्षा लालवानी, मोना नेभवानी, इशिका आहूजा, भाग्या कारनानी, सौम्या लालवानी, मान्या लालवानी, पूजा वलेचा और दिव्या माखीजा सहित समाज की अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।

सभी ने सांस्कृतिक गतिविधियों और सम्मान समारोह में सहभागिता कर बच्चों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान समाज की एकजुटता और अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने की भावना दिखाई दी।

सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश

उरई में आयोजित नवरात्रि सिंधी महोत्सव ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बन सकते हैं। गरबा-डांडिया, सिंधी भाषा से जुड़ी गतिविधियों, पारंपरिक व्यंजनों और विद्यार्थियों के सम्मान के जरिए आयोजन ने शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया।

पूजा सुमित रावलानी की पहल पर आयोजित इस महोत्सव में बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने, समाज की परंपराओं को समझने और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। नौ दिनों तक चले इस आयोजन ने सिंधी समाज की सांस्कृतिक समृद्धि को सामने रखने के साथ परंपराओं के संरक्षण और अगली पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण का महत्व भी रेखांकित किया।

इस तरह नवरात्रि सिंधी महोत्सव धार्मिक उत्साह, सांस्कृतिक जागरूकता और प्रतिभा सम्मान का संगम बनकर सामने आया। आयोजन से जुड़ी गतिविधियों ने यह स्पष्ट किया कि समाज की विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए बच्चों और युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।