जालौन में आतिशबाजी मार्केट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, पटाखों की दुकानों में दुकानदार ही उड़ा रहे नियमों की धज्जियां
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन
जालौन (उत्तर प्रदेश)। दीपावली और त्योहारों के मौसम में आतिशबाजी की दुकानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की ओर से लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इन नियमों का उद्देश्य किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकना और आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। लेकिन जालौन जिले के कोंच क्षेत्र में स्थित आतिशबाजी मार्केट से सामने आया एक वीडियो इन दावों और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां पटाखों की दुकानों में दुकानदारों के ही सिगरेट और बीड़ी पीने का मामला सामने आया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर आतिशबाजी की दुकानों के भीतर दुकानदार धूम्रपान करते दिखाई दे रहे हैं। जिस स्थान पर बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पटाखे और आतिशबाजी का सामान रखा जाता है, वहां इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और पुलिस-प्रशासन के साथ अग्निशमन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
धनुतालाब मैदान स्थित आतिशबाजी मार्केट का मामला
पूरा मामला कोंच कोतवाली क्षेत्र के धनुतालाब मैदान में लगने वाले आतिशबाजी मार्केट से जुड़ा बताया जा रहा है। त्योहारों के दौरान यहां बड़ी संख्या में पटाखों की दुकानें लगाई जाती हैं। इन दुकानों पर खरीदारी के लिए आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं। बाजार में ग्राहकों की भीड़ के बीच पटाखों का भंडारण और बिक्री होती है।
ऐसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा नियमों का पालन करना दुकानदारों के साथ-साथ संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद दुकानों के अंदर सिगरेट और बीड़ी पीने का वीडियो सामने आना व्यवस्था की गंभीर खामी की ओर संकेत करता है।
आतिशबाजी की दुकानों में ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण छोटी-सी चिंगारी भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में धूम्रपान जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में सामान्य लापरवाही मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दुकानदारों की लापरवाही से हादसे का खतरा
पटाखों और आतिशबाजी के सामान का कारोबार सामान्य दुकानों से अलग और अधिक संवेदनशील होता है। यहां सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। दुकानों के आसपास धूम्रपान, खुली आग या चिंगारी पैदा करने वाली गतिविधियों पर सख्ती से रोक होनी चाहिए।
इसके बावजूद यदि दुकानदार ही अपनी दुकानों के भीतर बीड़ी और सिगरेट का सेवन करते दिखाई दे रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। सवाल यह भी है कि जब दुकान संचालक स्वयं सुरक्षा नियमों को गंभीरता से नहीं लेंगे तो ग्राहकों और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
बाजार में आने वाले परिवारों, बच्चों और अन्य ग्राहकों की सुरक्षा भी इसी व्यवस्था पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है।
पहले भी आग की घटना से तबाह हो चुका है आतिशबाजी बाजार
इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि धनुतालाब मैदान के आतिशबाजी मार्केट में पहले भी भीषण अग्निकांड हो चुका है। कुछ वर्ष पूर्व लगी आग में पूरा आतिशबाजी बाजार जलकर राख हो गया था। उस घटना ने क्षेत्र में काफी चिंता पैदा की थी और आतिशबाजी की दुकानों में सुरक्षा इंतजामों की जरूरत को उजागर किया था।
पुराने अग्निकांड के बाद उम्मीद थी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। दुकानों की नियमित जांच, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और नियमों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लेकिन वर्तमान में वायरल हो रहे वीडियो ने एक बार फिर पुराने हादसे की याद ताजा कर दी है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब पहले इतना बड़ा अग्निकांड हो चुका है तो उसके बाद भी ऐसी लापरवाही कैसे जारी रह सकती है?
वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का सवाल है कि आतिशबाजी मार्केट जैसे संवेदनशील स्थान पर नियमित निगरानी क्यों नहीं की जा रही है? क्या दुकानों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है? क्या अग्निशमन विभाग की टीम सुरक्षा मानकों की जांच करती है?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल वायरल वीडियो ने बाजार की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकानों का निरीक्षण कराया जाए। यदि जांच में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अग्निशमन विभाग को करनी चाहिए सुरक्षा व्यवस्था की जांच
आतिशबाजी मार्केट में आग से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम होना बेहद जरूरी है। अग्निशमन विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दुकानों में निर्धारित अग्निशमन उपकरण उपलब्ध हों और आपातकालीन स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सके।
इसके अलावा दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था, निर्धारित स्थान पर पटाखों का भंडारण और आग बुझाने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की भी जांच होनी चाहिए।
धूम्रपान करने वालों के खिलाफ भी स्पष्ट कार्रवाई की जरूरत है। केवल दुकानदारों को मौखिक चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नियमों के उल्लंघन पर लागू कानून और लाइसेंस संबंधी शर्तों के अनुसार कदम उठाए जाने चाहिए।
आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
त्योहारों के दौरान आतिशबाजी की खरीदारी के लिए बाजार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। किसी भी अप्रिय घटना का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वहां मौजूद ग्राहकों, आसपास के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इसलिए प्रशासन को चाहिए कि बाजार में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था करे और दुकानदारों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दे। पुलिस की निगरानी के साथ अग्निशमन विभाग की सक्रिय मौजूदगी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब कार्रवाई का इंतजार
कोंच के धनुतालाब मैदान स्थित आतिशबाजी मार्केट से सामने आए इस वीडियो ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले हुए भीषण अग्निकांड के बावजूद यदि दुकानों के भीतर धूम्रपान जैसी गतिविधियां हो रही हैं तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।
अब देखना होगा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर स्थानीय पुलिस, प्रशासन और फायर सर्विस विभाग क्या कदम उठाते हैं। क्या बाजार में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल क्षेत्र के लोगों की मांग है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि त्योहारों की खुशियां किसी दुर्घटना में न बदलें।
रिपोर्ट: जालौन, उत्तर प्रदेश।