जालौन में खाद की किल्लत से किसान परेशान, सहकारी दुकान पर लटका ताला; टोकन के लिए सुबह से कतार में खड़े अन्नदाता
देव पटेल
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन
जालौन (उत्तर प्रदेश)। जनपद जालौन में खाद की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रबी की फसलों की तैयारियों और खेती से जुड़े जरूरी कार्यों के बीच किसानों को सहकारी खाद की दुकानों से पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है। खाद प्राप्त करने के लिए किसान सुबह से ही दुकानों के बाहर कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। इसके बावजूद कई किसानों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। उरई में सहकारी खाद की एक दुकान बंद मिलने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। कोच स्टैंड स्थित सहकारी खाद की दुकान पर ताला लटका होने के कारण खाद लेने पहुंचे किसानों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

किसानों का कहना है कि खेती के इस महत्वपूर्ण समय में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। खाद के लिए किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कहीं दुकान बंद मिल रही है तो कहीं सीमित संख्या में टोकन वितरित किए जाने की शिकायत सामने आ रही है।
सुबह छह बजे से कतार में लग रहे किसान
उरई में खाद वितरण को लेकर किसानों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उन्हें खाद लेने के लिए सुबह बहुत जल्दी घर से निकलना पड़ता है। कई किसान सुबह करीब छह बजे ही सहकारी खाद केंद्रों के बाहर पहुंच जाते हैं, ताकि उन्हें समय पर टोकन मिल सके। इसके बावजूद खाद प्राप्त करने की उनकी उम्मीद पूरी नहीं हो पा रही है।
किसानों के अनुसार, एक दिन में करीब 150 किसान खाद लेने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से केवल 15 किसानों को ही टोकन दिए जाने का आरोप है। इस स्थिति के कारण बड़ी संख्या में किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद प्राप्त नहीं कर पाते। जिन किसानों को टोकन नहीं मिलता, उन्हें अगले दिन फिर से दुकान पर पहुंचने की मजबूरी होती है।
किसानों का कहना है कि लगातार कई दिनों तक खाद के लिए चक्कर लगाने से उनका समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों को आने-जाने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके अलावा खेती के दूसरे काम प्रभावित हो रहे हैं।
कोच स्टैंड स्थित दुकान पर लटका मिला ताला
उरई के कोच स्टैंड क्षेत्र में स्थित सहकारी खाद की दुकान पर ताला लटका मिलने से किसानों में नाराजगी देखने को मिली। खाद की उम्मीद लेकर पहुंचे किसान जब दुकान बंद देखकर वापस लौटने लगे तो उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाए।
किसानों का कहना है कि जब खाद की मांग अधिक है और बड़ी संख्या में किसान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, तब संबंधित दुकानों का नियमित रूप से खुलना जरूरी है। दुकान बंद रहने से किसानों को यह तक पता नहीं चल पाता कि खाद कब वितरित होगी और उन्हें किस दिन खाद मिल सकेगी।
किसानों ने मांग की है कि सहकारी खाद केंद्रों के खुलने और वितरण की समय-सारिणी सार्वजनिक की जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि खाद उपलब्ध होने के बावजूद वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
खाद की कालाबाजारी का भी लगाया आरोप
खाद की कमी के बीच उरई सहकारी मंडी समिति में कालाबाजारी किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। किसानों ने आरोप लगाया कि निर्धारित व्यवस्था के तहत खाद प्राप्त करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि बाजार में कथित तौर पर अधिक कीमत पर खाद बेचे जाने की बात कही जा रही है।
किसानों के मुताबिक, खाद की एक बोरी के लिए 1500 रुपये तक वसूले जाने का आरोप है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और प्रशासनिक जांच जरूरी है। यदि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेची जा रही है या सरकारी खाद की कालाबाजारी हो रही है तो यह गंभीर मामला है।
किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से कृषि कार्यों के लिए खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन वितरण में पारदर्शिता नहीं होने पर वास्तविक जरूरतमंद किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को खाद की आपूर्ति, स्टॉक और बिक्री के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।
खेती के जरूरी समय में बढ़ रही किसानों की चिंता
खाद की उपलब्धता खेती की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फसलों की जरूरत के अनुसार समय पर उर्वरक नहीं मिलने से किसानों को कृषि कार्यों की योजना बनाने में कठिनाई होती है। खेतों में बुवाई और फसल प्रबंधन से जुड़े कार्य समय पर पूरे करना किसानों के लिए जरूरी होता है।
ऐसे में खाद के लिए लंबा इंतजार करना किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। जिन किसानों के पास सीमित संसाधन हैं, उनके सामने परेशानी और अधिक है। उन्हें एक तरफ खेतों में काम पूरा करना है तो दूसरी तरफ खाद के लिए सहकारी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि खाद की कमी का असर केवल एक किसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे कृषि कार्य को प्रभावित कर सकता है। समय पर खाद नहीं मिलने से खेती का कार्यक्रम बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।
किसानों ने अधिकारियों से की कार्रवाई की मांग
लगातार हो रही परेशानी के बाद किसानों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सहकारी खाद केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए और वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
उन्होंने मांग की है कि खाद की दुकानों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए। टोकन वितरण में पारदर्शिता बरती जाए, ताकि सभी पात्र किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद मिल सके। साथ ही खाद की उपलब्धता और बिक्री से संबंधित जानकारी केंद्रों के बाहर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।
किसानों ने कथित कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने के आरोपों की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी दुकानदार या कर्मचारी की ओर से अनियमितता की जा रही है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन की निगरानी पर टिकी किसानों की उम्मीदें
उरई में खाद की कमी और सहकारी दुकानों के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब किसानों की निगाहें जिला प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि अधिकारी जल्द ही खाद वितरण व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित कराएंगे।
प्रशासन के लिए जरूरी है कि सहकारी समितियों में उपलब्ध खाद के स्टॉक का सत्यापन कराया जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि किसानों को टोकन किस आधार पर दिए जा रहे हैं और वितरण में किसी प्रकार का भेदभाव तो नहीं हो रहा है।
फिलहाल उरई में खाद के लिए किसानों की परेशानी और सहकारी दुकान बंद मिलने की शिकायत ने वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मांग साफ है कि उन्हें खाद के लिए सुबह से शाम तक कतारों में खड़ा न होना पड़े, बल्कि निर्धारित मूल्य पर समय से पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी किसानों की शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और उरई में खाद वितरण की व्यवस्था को कब तक सुचारु बनाया जाता है।