चक्रवात अर्नब का ओडिशा में असर: नौ जिलों में राहत एवं बचाव अभियान तेज, 59 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

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भुवनेश्वर (ओडिशा), 30 अक्टूबर 2026।

ओडिशा में चक्रवात अर्नब के प्रभाव के बाद हालात सामान्य बनाने के लिए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। चक्रवात के बाद हुई लगातार भारी बारिश ने राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। निचले इलाकों में पानी भरने, गांवों का संपर्क टूटने और नदियों का जलस्तर बढ़ने से हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया है। ताजा सरकारी जानकारी के अनुसार, राज्य के नौ जिलों से 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

इस प्राकृतिक आपदा के बीच राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार काम कर रही हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना और सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द बहाल करना है।

नौ जिलों में चक्रवात के बाद बिगड़े हालात

चक्रवात अर्नब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हुई है। गंजाम और गजपति जिले सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, नबरंगपुर, कालाहांडी, नुआपाड़ा और कंधमाल जिलों में भी मौसम की मार देखने को मिली है।

कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण घरों और सड़कों पर पानी भर गया है। कुछ गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट गया है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचने की है, जो बाढ़ के पानी के कारण अपने घरों में या अन्य स्थानों पर फंसे हुए हैं।

गंजाम जिले में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है। यहां लगभग 300 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि करीब 70 गांवों का संपर्क बाधित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे क्षेत्रों में बचाव दलों को अतिरिक्त संसाधनों के साथ तैनात किया गया है।

59 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

राज्य सरकार की ओर से चलाए गए निकासी अभियान के तहत अब तक 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें गंजाम जिले के 11,882 लोग शामिल हैं। प्रभावित लोगों में 3,001 गर्भवती महिलाएं भी हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राहत शिविरों में ठहराया जा रहा है। इन शिविरों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

राहत और बचाव कार्य में 313 टीमें तैनात

चक्रवात के बाद पैदा हुए हालात से निपटने के लिए ओडिशा सरकार ने विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों की 313 टीमें तैनात की हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 9 टीमें, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल की 60 टीमें और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल हैं।

गंजाम जिले में सबसे अधिक बचाव दल लगाए गए हैं। यहां 45 ODRAF और 7 NDRF टीमें काम कर रही हैं। वहीं गजपति जिले में 12 ODRAF और एक NDRF टीम राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई है।

इन टीमों के माध्यम से प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने विशेष राहत आयुक्त कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक कर चक्रवात से हुए नुकसान, जारी बचाव अभियान और राहत वितरण की व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए। उन्होंने NDRF, ODRAF और अग्निशमन विभाग को पूरी सतर्कता के साथ काम करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

भारी बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ा

चक्रवात के बाद हुई भारी बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। गंजाम जिले के पात्रापुर क्षेत्र में 546 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि कंधमाल जिले के जी. उदयगिरि में 462.4 मिलीमीटर बारिश होने की जानकारी अधिकारियों ने दी है।

लगातार बारिश के कारण रुशिकुल्या नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। इससे आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन की ओर से नदी किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे बाढ़ प्रभावित स्थानों पर जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित

चक्रवात और उसके बाद हुई बारिश का असर परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा है। कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भरने और पुलिया तथा संपर्क मार्ग प्रभावित होने से आवागमन में परेशानी हो रही है।

रेलवे सेवाओं पर भी इसका असर देखने को मिला है। मौसम और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण कई ट्रेनों को रद्द या परिवर्तित मार्ग से संचालित करना पड़ा है। कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी पानी भरने की खबरें सामने आई हैं।

प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से प्रभावित मार्गों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले संबंधित परिवहन विभाग से नवीनतम जानकारी प्राप्त करें।

केंद्र सरकार ने भी दिया सहायता का भरोसा

चक्रवात अर्नब के प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी ओडिशा को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सहित प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर हालात की जानकारी ली।

उन्होंने आपदा से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। इसके साथ ही नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों को भेजने की बात भी कही गई है।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के माध्यम से राहत, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं की बहाली को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

31 अक्टूबर तक कुछ जिलों में शिक्षण संस्थान बंद

बाढ़ और लगातार खराब मौसम को देखते हुए गंजाम और गजपति जिलों में आंगनवाड़ी केंद्रों और शिक्षण संस्थानों को 31 अक्टूबर तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य बच्चों और कर्मचारियों को खराब मौसम तथा बाढ़ से जुड़ी संभावित परेशानियों से सुरक्षित रखना है।

प्रशासन की ओर से मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत शिविर और आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

पुनर्वास और जनजीवन सामान्य करना सरकार की चुनौती

चक्रवात अर्नब का प्रभाव कम होने के बाद भी ओडिशा के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने की है। जिन परिवारों के घरों में पानी भर गया है, उन्हें सुरक्षित आवास और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इसके अलावा बिजली आपूर्ति, पेयजल, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार व्यवस्था को बहाल करना भी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और अन्य आजीविका गतिविधियों पर पड़े प्रभाव का आकलन करना होगा।

निष्कर्ष: ओडिशा में चक्रवात अर्नब के बाद राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। नौ जिलों में 59 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना प्रशासन के व्यापक अभियान को दर्शाता है। 313 बचाव दलों की तैनाती और केंद्र सरकार की सहायता के आश्वासन से राहत कार्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए अभी पुनर्वास, बुनियादी सुविधाओं की बहाली और लगातार प्रशासनिक सहायता की आवश्यकता होगी।

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