कानपुर देहात में सर्पदंश से किसान की मौत, झाड़-फूंक में बीता कीमती समय; परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश)। खेतों में मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले किसानों के सामने प्राकृतिक खतरों की चुनौती लगातार बनी रहती है। खेतों में काम करते समय जहरीले जीव-जंतुओं का सामना करना भी ग्रामीण क्षेत्रों में एक गंभीर समस्या है। इसी बीच कानपुर देहात के मूसानगर थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां खेत में काम करने गए 45 वर्षीय किसान की सांप के काटने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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खेत में काम करते समय किसान को सांप ने काटा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूसानगर थाना क्षेत्र के भरतौली गांव के मजरा भंडा निवासी शिव सिंह गुरुवार को अपने रोजमर्रा के काम के सिलसिले में खेत पर गए थे। वह खेती-किसानी के कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। घटना इतनी अचानक हुई कि उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिला।

सांप के काटने के बाद किसान की तबीयत बिगड़ने लगी। जब इस घटना की जानकारी परिवार के लोगों को मिली तो वे तुरंत खेत पर पहुंचे। किसान की हालत देखकर परिजन घबरा गए और उन्हें बचाने के लिए प्रयास करने लगे।

अस्पताल पहुंचने के बजाय झाड़-फूंक में उलझे रहे परिजन

घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि सर्पदंश के बाद किसान को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ गए। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कुछ लोग सांप के काटने की घटना होने पर पारंपरिक उपायों और अंधविश्वासों पर भरोसा करते हैं। इस वजह से कई बार मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती।

शिव सिंह के मामले में भी परिजन पहले झाड़-फूंक कराने में लगे रहे। इस दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। जब स्थिति गंभीर हो गई तो परिवार के लोगों ने उन्हें आनन-फानन में अकबरपुर स्थित मेडिकल कॉलेज पहुंचाया।

मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में डॉक्टरों ने किसान की जांच की, लेकिन तब तक उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की इस जानकारी के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

शिव सिंह की असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। परिवार के लिए यह घटना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी शीलू देवी बदहवास हो गईं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है।

वहीं बेटे पीयूष और बेटी साक्षी भी पिता को खोने के गम में लगातार रो रहे हैं। परिवार में मौजूद चार वर्षीय मासूम बच्ची बेबी को शायद इस घटना की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन घर में मौजूद लोगों को रोते-बिलखते देखकर वह भी परेशान होकर रोने लगी।

जिस घर में कुछ समय पहले तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अचानक चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया। परिवार के सदस्यों के साथ-साथ गांव के लोग भी इस घटना से दुखी हैं। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से किसान की मौत की सूचना संबंधित पुलिस को दी गई। जानकारी मिलने के बाद उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत कर घटना की परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई।

पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

इस मामले में मूसानगर थाना प्रभारी अमिता वर्मा ने बताया कि शुरुआती जानकारी में किसान की मौत सर्पदंश के कारण होने की बात सामने आई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं बनीं चिंता का विषय

बरसात और उसके बाद के मौसम में खेतों, झाड़ियों, घास और पानी भरे स्थानों पर सांपों की मौजूदगी बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों, खेतिहर मजदूरों और पशुपालकों को अक्सर ऐसे स्थानों पर काम करना पड़ता है, जहां सांपों का सामना होने की आशंका रहती है।

खेतों में फसल की देखभाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और अन्य कृषि कार्यों के दौरान सर्पदंश का खतरा बना रहता है। ऐसे में किसानों को सावधानी बरतने के साथ-साथ सांप के काटने की स्थिति में सही चिकित्सा प्रक्रिया की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने की आशंका होने पर मरीज को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है। हर सांप जहरीला नहीं होता, लेकिन यह तय करने में समय गंवाना भी उचित नहीं है कि सांप जहरीला था या नहीं।

सर्पदंश होने पर क्या करें?

सर्पदंश की घटना होने पर सबसे जरूरी है कि पीड़ित को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाया जाए, जहां उचित चिकित्सा और जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो।

ऐसी स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए:

  1. पीड़ित को शांत रखें और अनावश्यक शारीरिक गतिविधि न करने दें।
  2. काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें।
  3. मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या चिकित्सा केंद्र पहुंचाएं।
  4. घाव को काटने, चूसने या उस पर कोई घरेलू पदार्थ लगाने से बचें।
  5. कसकर रस्सी या कपड़ा बांधने की कोशिश न करें।
  6. झाड़-फूंक और अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों में समय बर्बाद न करें।

समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित उपचार मिलने से सर्पदंश के कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

किसानों की सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी

कानपुर देहात के भरतौली गांव की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

गांवों में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है, ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि सांप के काटने पर सबसे पहले अस्पताल पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

खेतों में काम करने वाले किसानों को भी आसपास की घास, झाड़ियों और फसल के बीच सावधानी बरतनी चाहिए। रात या कम रोशनी में खेतों में जाते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना और उचित जूते पहनना उपयोगी सावधानियां हैं।

एक परिवार ने खोया अपना सहारा

शिव सिंह की मौत ने उनके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। परिवार के सदस्यों के लिए इस दुखद घटना से उबरना आसान नहीं होगा। पत्नी शीलू देवी और बच्चों के सामने अब भविष्य की कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

इस घटना से एक बार फिर यह संदेश मिलता है कि सर्पदंश जैसी आपातकालीन स्थिति में अंधविश्वास के बजाय चिकित्सा विज्ञान पर भरोसा करना चाहिए। कुछ समय की देरी भी गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए सांप के काटने की किसी भी घटना को हल्के में न लें और बिना देर किए अस्पताल पहुंचें।

विशेष अपील: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी लोगों से अनुरोध है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। पीड़ित को तत्काल अस्पताल ले जाएं। समय पर सही चिकित्सा उपचार ही जीवन बचाने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।

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