ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर, भूस्खलन में तीन लोगों की मौत; भारी बारिश और बाढ़ से जनजीवन प्रभावित
विशेष समाचार लेख | 31 अक्टूबर 2026
ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ से जुड़ी भारी बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। लगातार खराब मौसम के कारण भूस्खलन की घटना में तीन लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य तेज किए जाने की जानकारी दी गई है।

कंधमाल में भूस्खलन से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत
ओडिशा के कंधमाल जिले में चक्रवात के बाद हुई मूसलाधार बारिश ने एक परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। शुक्रवार को रायिकिया ब्लॉक के डांगेसी गांव में पहाड़ी का एक हिस्सा खिसककर घर पर गिर गया। इस हादसे में एक दंपती और उनके नौ महीने के बच्चे की मौत हो गई। मृतकों की पहचान अच्युत प्रधान (30), उनकी पत्नी अनीशा प्रधान (25) और उनके बच्चे के रूप में बताई गई है।
पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण घर पूरी तरह उसकी चपेट में आ गया। घटना की सूचना मिलने के बाद अग्निशमन विभाग और ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे दो अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें एक बुजुर्ग महिला भी शामिल थीं।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और खराब मौसम के कारण राहत दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी कठिनाई हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। India News – The Indian Express +1
गंजाम, गजपति और कंधमाल में बारिश से भारी तबाही
चक्रवात अर्नब का प्रभाव दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में देखने को मिला है। शुरुआत में मौसम विभाग और प्रशासन को आशंका थी कि चक्रवात का अधिक प्रभाव आंध्र प्रदेश में होगा, जबकि ओडिशा में नुकसान अपेक्षाकृत कम रह सकता है। हालांकि, मौसम की स्थिति बदलने के बाद गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में लगातार बारिश ने गंभीर हालात पैदा कर दिए।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी माना कि चक्रवात का प्रभाव अनुमान से अलग रहा। मलकानगिरी जिले में अधिक नुकसान की आशंका थी, लेकिन वास्तविक स्थिति में गंजाम, गजपति और कंधमाल सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हो गए।
लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई स्थानों पर पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर गया। पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी खिसकने की घटनाएं सामने आईं। इससे ग्रामीण संपर्क मार्गों, पुलों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा। ThePrint +1
सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में, हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
दक्षिणी ओडिशा में बाढ़ की स्थिति ने ग्रामीण आबादी के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। गंजाम जिले के लगभग 300 गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित होकर आसपास के इलाकों से कट गए। कई गांवों में लोगों को आवागमन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गंजाम जिले में लगभग 50 हजार, गजपति में 30 हजार और कंधमाल में 12 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।
कई इलाकों में सड़कें जलमग्न होने और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में भोजन, पीने के पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।
बाढ़ से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। The Week +1
राहत और बचाव अभियान में जुटीं कई एजेंसियां
प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF), अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।
जिन इलाकों में बाढ़ का पानी अधिक है और सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा, वहां लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए नौकाओं की मदद ली जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक पका हुआ भोजन, सूखा राशन और पीने का पानी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गंजाम जिले में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के चार हेलीकॉप्टरों की सहायता ली गई। इन हेलीकॉप्टरों के माध्यम से खाद्य पैकेट प्रभावित स्थानों पर गिराए गए। अधिकारियों के अनुसार, 21 चिन्हित स्थानों पर हवाई माध्यम से खाद्य सामग्री पहुंचाई गई।
राज्य सरकार ने राहत कार्यों को व्यवस्थित बनाने के लिए 313 बचाव दलों की तैनाती की है। इनमें से 100 से अधिक दल गंजाम और गजपति जिलों में काम कर रहे हैं। The Week +1
23 हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में पहुंचे
चक्रवात और बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। अधिकारियों के मुताबिक, 23 हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे थे।
इन शिविरों में लोगों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को जरूरी सुविधाओं के अभाव में परेशानी न हो। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रखा गया है, क्योंकि बाढ़ का पानी कम होने के बाद दूषित पेयजल और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की सलाह का पालन करें और बिना जरूरत बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाने से बचें। The Week +1
राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल सेवाओं पर भी पड़ा असर
चक्रवात के बाद हुई भारी बारिश का असर सड़क और रेल परिवहन पर भी देखने को मिला। ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के पास बहुदा नदी का जलस्तर बढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर पानी भर गया। इसके कारण कोलकाता और चेन्नई को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर कई घंटों तक यातायात बाधित रहा।
सड़क पर पानी भरने के कारण बसों, ट्रकों और निजी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई वाहन चालकों को रास्ते में ही रुकना पड़ा। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की।
जलस्तर कम होने के बाद शुक्रवार शाम राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दोबारा शुरू किया गया। रेल सेवाएं भी बहाल होने लगीं, हालांकि कुछ ट्रेनों को रद्द करना पड़ा और कुछ का संचालन सीमित मार्गों तक किया गया। The Times of India +1
गंजाम जिले के लिए अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये मंजूर
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से नुकसान, राहत कार्यों और प्रभावित परिवारों की स्थिति की जानकारी ली।
राज्य सरकार ने गंजाम जिले में राहत एवं बचाव कार्यों को गति देने के लिए अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल आपदा प्रभावित लोगों की सहायता, जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली में किया जाएगा।
इसके अलावा राज्य प्रशासन ने 30 से अधिक वरिष्ठ ओडिशा प्रशासनिक सेवा (OAS) अधिकारियों को गंजाम जिले में तैनात किया है। इन अधिकारियों को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत वितरण और पुनर्वास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य सरकार ने केंद्र से भी सहायता मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक, दो नवंबर को एक केंद्रीय दल ओडिशा पहुंचकर चक्रवात और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगा। The Week +1
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ओडिशा दौरा रद्द
ओडिशा में प्राकृतिक आपदा की गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपना प्रस्तावित तीन दिवसीय ओडिशा दौरा रद्द कर दिया। उनका यह दौरा तीन नवंबर से शुरू होना था।
राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बातचीत कर प्रभावित लोगों की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चक्रवात का असर केवल मौसम और जनजीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की प्रशासनिक गतिविधियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। The Week
विपक्ष ने सरकार की तैयारियों पर उठाए सवाल
ओडिशा में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। बीजू जनता दल (BJD), कांग्रेस और वामपंथी दलों ने राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मौसम विभाग की ओर से पहले ही चेतावनियां जारी किए जाने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त एहतियाती कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना है कि समय रहते बेहतर प्रबंधन किया जाता तो नुकसान को कम किया जा सकता था।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों तक भोजन, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं बिना किसी बाधा के पहुंचाई जाएं। The Week
आगे की सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास और सामान्य स्थिति बहाल करना
चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़ने के बाद भी ओडिशा के दक्षिणी जिलों में चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कई इलाकों में बाढ़ का पानी जमा है और कुछ गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूटा हुआ है। भूस्खलन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।
आने वाले दिनों में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों का पुनर्वास, सड़कों और पुलों की मरम्मत, बिजली आपूर्ति बहाल करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतना जरूरी है। क्षतिग्रस्त मकानों, कमजोर पहाड़ी ढलानों और जलभराव वाले स्थानों की जांच के बिना लोगों को वापस भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
निष्कर्ष
ओडिशा में चक्रवात अर्नब के बाद पैदा हुई स्थिति ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों की अहमियत को सामने ला दिया है। कंधमाल में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत और गंजाम, गजपति सहित कई जिलों में बाढ़ से हुई तबाही बेहद दुखद है।
फिलहाल राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने और क्षतिग्रस्त बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने की कोशिश जारी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कितनी तेजी से प्रभावित परिवारों को राहत देकर राज्य में सामान्य जनजीवन बहाल कर पाता है।