ओडिशा में विकास परियोजनाओं को लेकर मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन की बड़ी पहल, एकाम्र क्षेत्र के कार्य जनवरी 2027 तक पूरे करने के निर्देश

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सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

भुवनेश्वर, 31 अक्टूबर 2026।

ओडिशा में धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने विकास कार्यों में तेजी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कानून, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शनिवार को लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। इनमें भुवनेश्वर का ऐतिहासिक एकाम्र क्षेत्र, पिपिली का पारंपरिक चांदुआ हब और पुरी का ऐतिहासिक अन्नपूर्णा थिएटर शामिल हैं।

बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास योजनाओं को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि इनसे स्थानीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ इन स्थानों की मूल सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

एकाम्र क्षेत्र के विकास कार्यों पर विशेष जोर

भुवनेश्वर स्थित एकाम्र क्षेत्र ओडिशा की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां स्थित भगवान लिंगराज मंदिर में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र अपनी प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बैठक के दौरान श्री लिंगराज मंदिर के आसपास चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की। इसमें एकाम्र पार्किंग व्यवस्था, पर्यटक सम्मेलन केंद्र, सार्वजनिक शौचालय, भजन मंडप और अनंत वासुदेव प्लाजा के विकास से जुड़े कार्य शामिल रहे।

बैठक में बिंदुसागर तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग को अधिक चौड़ा और सुविधाजनक बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में आसानी प्रदान करना है।

मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि एकाम्र क्षेत्र को सुव्यवस्थित, स्वच्छ और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल और निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी आवश्यक है।

जनवरी 2027 तक पूरे करने होंगे प्रमुख कार्य

समीक्षा बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय एकाम्र क्षेत्र की विकास परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर रहा। मंत्री ने संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया कि यहां के सभी प्रमुख निर्माण एवं विकास कार्य जनवरी 2027 तक पूरे किए जाएं।

उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित समयसीमा और आम लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।

एकाम्र क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होने से श्रद्धालुओं को बेहतर पार्किंग, स्वच्छता, बैठने और आवागमन की सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही पर्यटकों को क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को समझने का बेहतर अवसर मिलेगा।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और पारंपरिक स्थापत्य को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए ही नई सुविधाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।

पिपिली चांदुआ हब से पारंपरिक हस्तशिल्प को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में पिपिली चांदुआ हब की प्रस्तावित परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पिपिली अपनी पारंपरिक एप्लिक कला और रंग-बिरंगे चांदुआ हस्तशिल्प के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर कपड़े पर अलग-अलग रंगों और आकृतियों के माध्यम से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करते हैं।

यह हस्तशिल्प ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि स्थानीय कारीगरों के सामने अपने उत्पादों के विपणन, बिक्री और बेहतर व्यावसायिक सुविधाओं से जुड़ी कई चुनौतियां रहती हैं। प्रस्तावित चांदुआ हब को इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

योजना के तहत एक बहुमंजिला भवन का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें स्थानीय हस्तशिल्पियों के लिए अलग-अलग दुकानें बनाई जाएंगी, जहां वे अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों और पर्यटकों तक पहुंचा सकेंगे।

इसके अतिरिक्त परिसर में फूड प्लाजा, ऑडियो-विजुअल हॉल और सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को एक ही परिसर में खरीदारी, खानपान और स्थानीय कला से संबंधित जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

मंत्री हरिचंदन ने ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (ओबीसीसी) और संबंधित निर्माण एजेंसी को परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि चांदुआ हब का निर्माण अगले दो वर्षों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।

स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की उम्मीद

पिपिली चांदुआ हब केवल एक भवन निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को नई पहचान देने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

यदि यहां व्यवस्थित बाजार और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध होती हैं तो स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अधिक अवसर मिल सकते हैं। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से हस्तनिर्मित वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि होने की संभावना है।

इससे पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

सरकार की योजना है कि पिपिली आने वाले पर्यटक केवल हस्तशिल्प खरीदकर ही वापस न जाएं, बल्कि यहां की पारंपरिक कला, कारीगरी और सांस्कृतिक इतिहास को भी करीब से समझें।

पुरी के ऐतिहासिक अन्नपूर्णा थिएटर के संरक्षण पर चर्चा

बैठक में पुरी स्थित ऐतिहासिक अन्नपूर्णा थिएटर के पुनरुद्धार का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। यह थिएटर ओडिशा की सांस्कृतिक गतिविधियों और रंगमंचीय परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

अन्नपूर्णा थिएटर का स्थानीय लोगों के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। इस स्थान ने लंबे समय तक नाट्य प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से ओडिशा की कला परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि इस ऐतिहासिक संस्थान का संरक्षण केवल एक पुरानी इमारत को बचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ जुड़ी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को थिएटर के पुनरुद्धार से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता बताई। उद्देश्य यह है कि भविष्य में यह स्थान ओडिशा की सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए फिर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

बैठक में कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

लोक सेवा भवन में आयोजित इस समीक्षा बैठक में कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में एकाम्र क्षेत्र के विधायक बाबू सिंह, पिपिली के विधायक आश्रित पटनायक, ओबीसीसी के प्रबंध निदेशक अनुपम साहा, भुवनेश्वर नगर निगम के आयुक्त चंचल राणा और ओबीसीसी के सीजीएम श्रीधर राउत उपस्थित रहे।

इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। सभी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति, निर्माण संबंधी आवश्यकताओं और आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया।

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी, भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर और पिपिली की पारंपरिक हस्तशिल्प कला राज्य की सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख आधार हैं। इन तीनों क्षेत्रों का विकास धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ कला, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एकाम्र क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं विकसित होने से श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित वातावरण मिल सकता है। वहीं पिपिली चांदुआ हब स्थानीय हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने में सहायक हो सकता है। दूसरी ओर अन्नपूर्णा थिएटर का संरक्षण राज्य की रंगमंचीय विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

इन परियोजनाओं के माध्यम से सरकार का प्रयास आधुनिक बुनियादी ढांचे और ऐतिहासिक धरोहरों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

विरासत संरक्षण के साथ विकास सरकार की प्राथमिकता

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बैठक के अंत में दोहराया कि ओडिशा की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

एकाम्र क्षेत्र के प्रमुख कार्यों को जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि पिपिली चांदुआ हब को अगले दो वर्षों में तैयार करने की बात कही गई है।

अब इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। यदि निर्धारित योजना के अनुसार कार्य पूरे होते हैं तो भुवनेश्वर, पिपिली और पुरी को धार्मिक पर्यटन, पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है। इससे ओडिशा की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के साथ राज्य के पर्यटन विकास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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ओडिशा में विकास परियोजनाओं को लेकर मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन की बड़ी पहल, एकाम्र क्षेत्र के कार्य जनवरी 2027 तक पूरे करने के निर्देश

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 31, 2026

सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

भुवनेश्वर, 31 अक्टूबर 2026।

ओडिशा में धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने विकास कार्यों में तेजी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कानून, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शनिवार को लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। इनमें भुवनेश्वर का ऐतिहासिक एकाम्र क्षेत्र, पिपिली का पारंपरिक चांदुआ हब और पुरी का ऐतिहासिक अन्नपूर्णा थिएटर शामिल हैं।

बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास योजनाओं को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि इनसे स्थानीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ इन स्थानों की मूल सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

एकाम्र क्षेत्र के विकास कार्यों पर विशेष जोर

भुवनेश्वर स्थित एकाम्र क्षेत्र ओडिशा की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां स्थित भगवान लिंगराज मंदिर में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र अपनी प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बैठक के दौरान श्री लिंगराज मंदिर के आसपास चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की। इसमें एकाम्र पार्किंग व्यवस्था, पर्यटक सम्मेलन केंद्र, सार्वजनिक शौचालय, भजन मंडप और अनंत वासुदेव प्लाजा के विकास से जुड़े कार्य शामिल रहे।

बैठक में बिंदुसागर तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग को अधिक चौड़ा और सुविधाजनक बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में आसानी प्रदान करना है।

मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि एकाम्र क्षेत्र को सुव्यवस्थित, स्वच्छ और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल और निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी आवश्यक है।

जनवरी 2027 तक पूरे करने होंगे प्रमुख कार्य

समीक्षा बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय एकाम्र क्षेत्र की विकास परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर रहा। मंत्री ने संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया कि यहां के सभी प्रमुख निर्माण एवं विकास कार्य जनवरी 2027 तक पूरे किए जाएं।

उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित समयसीमा और आम लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।

एकाम्र क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होने से श्रद्धालुओं को बेहतर पार्किंग, स्वच्छता, बैठने और आवागमन की सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही पर्यटकों को क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को समझने का बेहतर अवसर मिलेगा।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और पारंपरिक स्थापत्य को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए ही नई सुविधाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।

पिपिली चांदुआ हब से पारंपरिक हस्तशिल्प को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में पिपिली चांदुआ हब की प्रस्तावित परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पिपिली अपनी पारंपरिक एप्लिक कला और रंग-बिरंगे चांदुआ हस्तशिल्प के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर कपड़े पर अलग-अलग रंगों और आकृतियों के माध्यम से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करते हैं।

यह हस्तशिल्प ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि स्थानीय कारीगरों के सामने अपने उत्पादों के विपणन, बिक्री और बेहतर व्यावसायिक सुविधाओं से जुड़ी कई चुनौतियां रहती हैं। प्रस्तावित चांदुआ हब को इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

योजना के तहत एक बहुमंजिला भवन का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें स्थानीय हस्तशिल्पियों के लिए अलग-अलग दुकानें बनाई जाएंगी, जहां वे अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों और पर्यटकों तक पहुंचा सकेंगे।

इसके अतिरिक्त परिसर में फूड प्लाजा, ऑडियो-विजुअल हॉल और सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को एक ही परिसर में खरीदारी, खानपान और स्थानीय कला से संबंधित जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

मंत्री हरिचंदन ने ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (ओबीसीसी) और संबंधित निर्माण एजेंसी को परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि चांदुआ हब का निर्माण अगले दो वर्षों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।

स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की उम्मीद

पिपिली चांदुआ हब केवल एक भवन निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को नई पहचान देने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

यदि यहां व्यवस्थित बाजार और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध होती हैं तो स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अधिक अवसर मिल सकते हैं। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से हस्तनिर्मित वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि होने की संभावना है।

इससे पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

सरकार की योजना है कि पिपिली आने वाले पर्यटक केवल हस्तशिल्प खरीदकर ही वापस न जाएं, बल्कि यहां की पारंपरिक कला, कारीगरी और सांस्कृतिक इतिहास को भी करीब से समझें।

पुरी के ऐतिहासिक अन्नपूर्णा थिएटर के संरक्षण पर चर्चा

बैठक में पुरी स्थित ऐतिहासिक अन्नपूर्णा थिएटर के पुनरुद्धार का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। यह थिएटर ओडिशा की सांस्कृतिक गतिविधियों और रंगमंचीय परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

अन्नपूर्णा थिएटर का स्थानीय लोगों के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। इस स्थान ने लंबे समय तक नाट्य प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से ओडिशा की कला परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि इस ऐतिहासिक संस्थान का संरक्षण केवल एक पुरानी इमारत को बचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ जुड़ी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को थिएटर के पुनरुद्धार से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता बताई। उद्देश्य यह है कि भविष्य में यह स्थान ओडिशा की सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए फिर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

बैठक में कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

लोक सेवा भवन में आयोजित इस समीक्षा बैठक में कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में एकाम्र क्षेत्र के विधायक बाबू सिंह, पिपिली के विधायक आश्रित पटनायक, ओबीसीसी के प्रबंध निदेशक अनुपम साहा, भुवनेश्वर नगर निगम के आयुक्त चंचल राणा और ओबीसीसी के सीजीएम श्रीधर राउत उपस्थित रहे।

इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। सभी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति, निर्माण संबंधी आवश्यकताओं और आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया।

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी, भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर और पिपिली की पारंपरिक हस्तशिल्प कला राज्य की सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख आधार हैं। इन तीनों क्षेत्रों का विकास धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ कला, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एकाम्र क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं विकसित होने से श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित वातावरण मिल सकता है। वहीं पिपिली चांदुआ हब स्थानीय हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने में सहायक हो सकता है। दूसरी ओर अन्नपूर्णा थिएटर का संरक्षण राज्य की रंगमंचीय विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

इन परियोजनाओं के माध्यम से सरकार का प्रयास आधुनिक बुनियादी ढांचे और ऐतिहासिक धरोहरों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

विरासत संरक्षण के साथ विकास सरकार की प्राथमिकता

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बैठक के अंत में दोहराया कि ओडिशा की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

एकाम्र क्षेत्र के प्रमुख कार्यों को जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि पिपिली चांदुआ हब को अगले दो वर्षों में तैयार करने की बात कही गई है।

अब इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। यदि निर्धारित योजना के अनुसार कार्य पूरे होते हैं तो भुवनेश्वर, पिपिली और पुरी को धार्मिक पर्यटन, पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है। इससे ओडिशा की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के साथ राज्य के पर्यटन विकास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।