मणिपुर में हत्याओं और जातीय संघर्ष के खिलाफ पांच जिलों में विरोध प्रदर्शन, इंफाल में भी निकाला गया मार्च
मणिपुर, 1 नवंबर 2026। मणिपुर में हत्याओं और लगातार जारी जातीय तनाव के विरोध में लोगों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। राज्य के पांच जिलों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर हिंसा की घटनाओं के प्रति नाराजगी जाहिर की। राजधानी इंफाल में भी प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकालकर शांति, सुरक्षा और न्याय की मांग उठाई। इन प्रदर्शनों के माध्यम से लोगों ने राज्य में सामान्य जनजीवन बहाल करने और हिंसा से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की अपील की।

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में हत्याओं की घटनाओं ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों का मुख्य संदेश था कि राज्य में हिंसा का सिलसिला रुकना चाहिए और आम नागरिकों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए।
पांच जिलों में एक साथ गूंजा विरोध का स्वर
मणिपुर के पांच घाटी जिलों में शुक्रवार शाम लोगों ने एक अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन में लोगों ने बर्तन बजाकर, ढोल पीटकर, बिजली के खंभों पर आवाज करके और वाहनों के हॉर्न बजाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। यह कार्यक्रम शाम 7:30 बजे से 8 बजे तक आयोजित किया गया।
प्रदर्शन का उद्देश्य राज्य में लगातार सामने आ रही हिंसा की घटनाओं, नागरिकों की हत्याओं और सरकार की ओर से सामान्य स्थिति बहाल करने में कथित नाकामी के प्रति नाराजगी जाहिर करना था। प्रदर्शनकारियों का मानना था कि लंबे समय से जारी संकट के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
इस सामूहिक विरोध का आह्वान सामाजिक संगठन फेडरेशन ऑफ हाओमी ने किया था। संगठन ने लोगों से अपील की थी कि वे निर्धारित समय पर अपने-अपने क्षेत्रों में एक साथ आवाज उठाकर सरकार तक अपनी नाराजगी पहुंचाएं। इस अपील पर अलग-अलग इलाकों में लोगों ने भागीदारी की। NDTV +1
इंफाल में कांगला की ओर निकाला गया मार्च
विरोध प्रदर्शन के दौरान इंफाल में भी लोगों ने मार्च निकालकर अपनी मांगें सामने रखीं। प्रदर्शनकारियों का रुख ऐतिहासिक कांगला किले की ओर था। कांगला मणिपुर के इतिहास, संस्कृति और राजनीतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। यह परिसर लोक भवन और मुख्यमंत्री सचिवालय के आसपास स्थित है।
मार्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पैलेस कंपाउंड, मोइरांगखोम और केइसामपट जंक्शन जैसे स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए। सुरक्षा बलों ने कई समूहों को आगे जाने से रोका। हालांकि, सैकड़ों प्रदर्शनकारी कांगला के प्रवेश द्वार तक पहुंचने में सफल रहे, लेकिन उन्हें परिसर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। प्रदर्शन के दौरान लोगों की आवाजाही और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी गई। NDTV +1
प्रदर्शनकारियों ने उठाईं कई महत्वपूर्ण मांगें
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने केवल हत्याओं और हिंसा का विरोध ही नहीं किया, बल्कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित विषय शामिल रहे:
- राज्य में जारी जातीय हिंसा पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
- हालिया हत्याओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
- नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) लागू करने की मांग पर विचार किया जाए।
- अवैध प्रवासियों की पहचान से जुड़े मुद्दों पर उचित कदम उठाए जाएं।
- सशस्त्र संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते की समीक्षा की जाए।
- विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और स्थायी शांति के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पर्याप्त प्रभावी कदम नहीं उठा पा रही है। हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों और आयोजकों की मांगें एवं आरोप हैं, जिन्हें सरकारी निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। NDTV +1
अक्टूबर में हुई हत्याओं के बाद बढ़ा आक्रोश
मणिपुर में हालिया विरोध प्रदर्शनों के पीछे अक्टूबर महीने में हुई हिंसक घटनाएं भी एक बड़ी वजह बनी हैं। 18 अक्टूबर को इम्फाल ईस्ट क्षेत्र में तीन नागरिकों की हत्या की घटना के बाद राज्य में नाराजगी बढ़ गई थी। इस घटना के बाद लोगों ने विरोध जताया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
इसके अतिरिक्त, 14 मैतेई पुरुषों पर घात लगाकर किए गए हमले में तीन लोगों की मौत की खबर ने भी राज्य के माहौल को प्रभावित किया। इन घटनाओं के बाद नागरिक संगठनों और स्थानीय समूहों ने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। आम नागरिक चाहते हैं कि उन्हें बिना किसी भय के अपने घरों, व्यवसायों और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिले। The New Indian Express +1
31 अक्टूबर को इंफाल में फिर उमड़ी हजारों लोगों की भीड़
मणिपुर में विरोध का सिलसिला अगले दिन भी जारी रहा। 31 अक्टूबर को इंफाल में विभिन्न सामाजिक संगठनों के नेतृत्व में एक बड़ा मार्च आयोजित किया गया। इस रैली में मैतेई और नागा समुदायों सहित अलग-अलग स्थानीय समूहों के हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम का आयोजन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने किया था। रैली की शुरुआत टिड्डिम ग्राउंड से हुई और इसका समापन थाउ ग्राउंड में एक सार्वजनिक सभा के साथ हुआ।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्थायी शांति, हिंसा के पीड़ितों को न्याय, विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी और SoO समझौते को समाप्त करने जैसी मांगें उठाईं। यूनाइटेड नागा काउंसिल ने भी इस रैली का समर्थन किया।
रैली को देखते हुए प्रशासन ने कई प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी। मुख्यमंत्री आवास और लोक भवन की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई। कई स्थानों पर यातायात को नियंत्रित किया गया। The Times of India +2
2023 से जारी जातीय संघर्ष ने बढ़ाई चुनौतियां
मणिपुर में मौजूदा संकट की पृष्ठभूमि मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष से जुड़ी है। उस समय मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव ने गंभीर रूप ले लिया था। आरक्षण, भूमि अधिकार, जनजातीय पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों ने विवाद को और जटिल बना दिया।
धीरे-धीरे यह तनाव राज्य के कई हिस्सों तक फैल गया। हिंसा के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। कई लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ और बच्चों की शिक्षा पर भी असर पड़ा। राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों के सामने भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित भविष्य जैसी चुनौतियां बनी रहीं।
इस संघर्ष ने मणिपुर की सामाजिक एकता को भी प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में अलग-अलग समुदायों के बीच दूरी बढ़ी है। ऐसे हालात में केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना भी जरूरी है। Al Jazeera +1
सरकार और प्रशासन के सामने शांति बहाली की चुनौती
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। लोगों की मांग है कि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए और हिंसा से जुड़ी घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
सरकार के लिए यह भी आवश्यक है कि विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। किसी भी विवाद का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए और विश्वास बहाली के प्रयास किए जाएं।
विस्थापित परिवारों की घर वापसी, प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और युवाओं के लिए शिक्षा तथा रोजगार के अवसर भी शांति प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
इसके अलावा, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी समुदाय के नागरिकों के साथ भेदभाव न हो और कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से किया जाए।
मणिपुर में स्थायी शांति की उम्मीद
मणिपुर में पांच जिलों में हुए विरोध प्रदर्शन और इंफाल में निकाले गए मार्च यह संकेत देते हैं कि राज्य के लोग लंबे समय से जारी संकट का समाधान चाहते हैं। लगातार हो रही हिंसा और हत्याओं ने आम नागरिकों की चिंताओं को बढ़ाया है।
राज्य में शांति बहाली के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक संवाद की आवश्यकता है। इसके साथ ही हिंसा से प्रभावित सभी समुदायों को सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिलाना भी जरूरी है।
मणिपुर की जनता अब ऐसी स्थिति चाहती है, जिसमें बच्चे बिना किसी डर के स्कूल जा सकें, व्यापारी अपने प्रतिष्ठान खोल सकें और परिवार सुरक्षित वातावरण में जीवन व्यतीत कर सकें।
फिलहाल, राज्य में हो रहे प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शांति और सुरक्षा का मुद्दा आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि मणिपुर में तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में कितनी प्रगति होती है।
