मोहाना नदी का बढ़ता कटान बना ग्रामीणों के लिए मुसीबत, लखीमपुर खीरी के जसनगर गांव में कई मकान नदी में समाए
कमलेश कुमार
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता ऐ
नदी के घटते जलस्तर के बीच भी जारी है जमीन का कटाव, घरों पर मंडरा रहा खतरा; ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल बचाव कार्य कराने की उठाई मांग

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद में मोहाना नदी का कटान जसनगर गांव के ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। तिकुनिया ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले इस गांव में नदी लगातार अपने किनारों की जमीन को निगल रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि नदी के आसपास रहने वाले परिवारों को अपने घर और जमीन बचाने की चिंता सताने लगी है। कटान की चपेट में आकर कई मकान नदी में समा चुके हैं, जबकि अनेक अन्य घरों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
गांव में तेजी से हो रहे भू-कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। जिन परिवारों ने वर्षों की मेहनत से अपने आशियाने बनाए थे, आज उन्हीं घरों को नदी की धारा के सामने असुरक्षित देखकर उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है।
जलस्तर कम, लेकिन कटान की रफ्तार तेज
ग्रामीणों के अनुसार, मोहाना नदी का जलस्तर फिलहाल कम हुआ है, लेकिन इसके बावजूद नदी के किनारों पर कटान की गति में कमी नहीं आई है। सामान्य तौर पर लोग नदी का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ और कटाव की आशंका जताते हैं, लेकिन जसनगर गांव में पानी कम होने के बाद भी जमीन का लगातार खिसकना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
नदी किनारे की मिट्टी लगातार कमजोर होकर धंस रही है। कई जगहों पर जमीन का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी की धारा में समा चुका है। इससे नदी के नजदीक बने मकानों की नींव और आसपास की जमीन को लेकर खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान की गति इतनी तेज है कि लोगों को अपने घरों की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है।
घाघरा बैराज के फाटकों को लेकर ग्रामीणों ने जताई चिंता
जसनगर गांव के लोगों ने नदी की मौजूदा स्थिति को लेकर कैलाशपुरी स्थित घाघरा बैराज के फाटकों और वहां चल रहे रखरखाव कार्य का भी उल्लेख किया है। ग्रामीणों के मुताबिक, बैराज के सभी फाटक उठाए जाने तथा मेंटेनेंस का काम चलने के दौरान नदी की धारा और स्थिति में बदलाव देखने को मिला है।
ग्रामीणों का मानना है कि इस बदलाव का असर जसनगर गांव के आसपास नदी के बहाव पर पड़ रहा है, जिसके कारण किनारों की मिट्टी तेजी से कट रही है। हालांकि, नदी के कटान और बैराज के रखरखाव कार्य के बीच वास्तविक संबंध की पुष्टि संबंधित तकनीकी विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीण चाहते हैं कि सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े अधिकारी मौके पर पहुंचकर नदी की धारा, जल प्रवाह और कटान के कारणों का तकनीकी निरीक्षण करें, ताकि समस्या की वास्तविक वजह सामने आ सके और उसके अनुसार बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
कई परिवारों के सिर से छिन गया छत का सहारा
मोहाना नदी के लगातार बढ़ते कटान का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिनके मकान नदी के बिल्कुल किनारे स्थित थे। कई घर पहले ही कटान की चपेट में आकर नदी में समा चुके हैं। इन परिवारों के सामने अब रहने और अपने सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
जमीन और मकान किसी भी परिवार की वर्षों की मेहनत और आर्थिक पूंजी का परिणाम होते हैं। ऐसे में जब नदी धीरे-धीरे पूरी जमीन को अपने भीतर समाहित करने लगती है तो प्रभावित परिवारों के सामने केवल मकान खोने का ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य को दोबारा व्यवस्थित करने का भी संकट पैदा हो जाता है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो नदी के किनारे स्थित दूसरे मकान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की व्यवस्था करना बेहद जरूरी हो गया है।
तस्वीरों में दिखाई दे रही कटान की भयावह स्थिति
जसनगर गांव से सामने आई तस्वीरों में मोहाना नदी के किनारों पर हुए कटाव की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है। कई स्थानों पर मिट्टी का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर चुका है। नदी के किनारे की जमीन असमान और कमजोर नजर आ रही है।
कुछ मकान ऐसे स्थानों पर बने हुए हैं, जहां तक नदी का कटाव पहुंचने की आशंका बनी हुई है। आसपास की मिट्टी लगातार खिसकने के कारण इन मकानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए हर दिन चिंता में गुजर रहा है। उन्हें आशंका है कि अचानक जमीन धंसने की स्थिति में घरों को खाली करने का पर्याप्त समय भी नहीं मिल पाएगा। इसलिए प्रशासन को इस समस्या को सामान्य मौसमी कटाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
लगातार बढ़ती समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और कटान से प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित करें।
ग्रामीणों की मांग है कि नदी के किनारे संवेदनशील स्थानों पर तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह से कटान रोकने के उपाय किए जाएं। इसके साथ ही जिन परिवारों के मकान खतरे की जद में हैं, उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
प्रशासन को प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर उनके नुकसान का आकलन भी कराना चाहिए, ताकि पात्र परिवारों को नियमानुसार राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। यदि किसी परिवार को अपना मकान छोड़ना पड़ता है तो उसके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
समय रहते बचाव कार्य नहीं हुआ तो बढ़ सकती है परेशानी
नदी कटान की समस्या केवल एक-दो मकानों तक सीमित नहीं रहती। लगातार जमीन कटने से गांव की बसावट, कृषि भूमि और आसपास के आवागमन के रास्ते भी प्रभावित हो सकते हैं। यदि कटान का दायरा बढ़ता है तो इसका असर गांव के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ने की आशंका है।
ऐसे में संबंधित विभागों के लिए जरूरी है कि वे केवल नुकसान होने के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित न रहें, बल्कि पहले से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करके बचाव की योजना तैयार करें।
इसके लिए नदी के प्रवाह का अध्ययन, किनारों की मिट्टी की स्थिति का परीक्षण और कटान प्रभावित हिस्सों का नियमित निरीक्षण महत्वपूर्ण होगा। बिना तकनीकी आकलन के किए गए अस्थायी उपाय लंबे समय तक प्रभावी साबित नहीं हो सकते। इसलिए विशेषज्ञों की निगरानी में स्थायी और व्यावहारिक समाधान तलाशना आवश्यक है।
ग्रामीणों को अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
जसनगर गांव में मोहाना नदी का कटान लगातार ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। कई मकानों के नदी में समा जाने के बाद अब बाकी परिवारों को अपने आशियाने बचाने की चिंता सता रही है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू कराए।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नदी के कटान को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना है। समय रहते कार्रवाई होने से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और संबंधित विभाग जसनगर गांव की इस गंभीर समस्या पर शीघ्र संज्ञान लेकर ग्रामीणों को राहत पहुंचाएंगे? क्या नदी के कटान से पहले ही प्रभावित परिवारों के मकानों और जमीन को बचाने के लिए ठोस योजना तैयार की जाएगी? गांव के लोगों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
