कालपी में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार हत्याकांड का पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा, 32 बीघा जमीन के विवाद में 10 लाख की सुपारी देने का आरोप
देव पटेल संवाददाता
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता कालपी जालौन
जालौन, 2 नवंबर 2026।
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी में बार एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करने का दावा किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि करीब 32 बीघा जमीन को लेकर चल रहे पुराने विवाद के कारण इस हत्याकांड की साजिश रची गई थी। पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता की हत्या कराने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कथित मुख्य साजिशकर्ता मोनू यादव अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

इस घटना ने कालपी के अधिवक्ता समुदाय के साथ-साथ पूरे जालौन जिले में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। एक वरिष्ठ अधिवक्ता की इस तरह हत्या किए जाने से कानून व्यवस्था और न्यायिक पेशे से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फाइल पर चर्चा के बहाने अधिवक्ता को ले गए थे आरोपी
पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, 31 अक्टूबर को गयादीन अहिरवार को एक व्यक्ति ने किसी फाइल से संबंधित बातचीत करने के बहाने अपने साथ चलने के लिए कहा था। अधिवक्ता को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत ले जाया जा रहा है।
बताया गया कि शुरुआत में बातचीत और कामकाज का बहाना बनाया गया। इसके बाद चाय पीने की बात कहकर उन्हें एक वाहन में बैठाया गया और दूसरे स्थान पर ले जाया गया। जब काफी समय बीतने के बाद भी गयादीन अहिरवार घर नहीं पहुंचे तो परिवार के लोगों को चिंता होने लगी।
उनके बेटे ने लगभग डेढ़ घंटे तक अपने स्तर पर तलाश की। परिचितों और संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाने के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खोजबीन शुरू कर दी।
पूरी रात चला पुलिस का तलाशी अभियान
अधिवक्ता के लापता होने की सूचना मिलने के बाद कालपी थाना पुलिस के साथ क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने भी मामले की निगरानी शुरू की। अलग-अलग पुलिस टीमों को संभावित स्थानों पर भेजा गया। पुलिस ने शाम से लेकर पूरी रात तक संदिग्ध ठिकानों पर तलाश और छापेमारी की।
जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने तीन संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआत में आरोपियों ने घटना से संबंधित जानकारी छिपाने और पुलिस को भ्रमित करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस की लगातार पूछताछ के बाद मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आने लगीं।
पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब नौ बजे आरोपियों से मिली जानकारी और उनकी निशानदेही के आधार पर अधिवक्ता के शव के संबंध में पता चला। इसके बाद पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में सर्वेश, आशीष और कटियार नाम के आरोपी शामिल बताए गए हैं।
जमीन की रंजिश को बताया गया हत्या की मुख्य वजह
पुलिस की जांच में इस हत्याकांड के पीछे करीब 32 बीघा जमीन का विवाद प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि गयादीन अहिरवार और इंद्रजीत यादव पक्ष के बीच इस संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों पक्षों के बीच जमीन के स्वामित्व और अधिकार को लेकर मुकदमेबाजी भी जारी थी।
जांच में सामने आया कि संबंधित जमीन का संबंध लखीराम की दत्तक पुत्री के नाम से बताया जा रहा है। इसी संपत्ति को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे और कानूनी विवाद लंबे समय से बने हुए थे।
पुलिस का आरोप है कि इसी पुरानी रंजिश ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया और अधिवक्ता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। पुलिस के अनुसार, जमीन विवाद से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर हत्या की साजिश तैयार की और इसके लिए बाहरी लोगों की मदद ली।
हालांकि, जमीन के वास्तविक स्वामित्व और विवाद से संबंधित सभी पहलुओं का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
10 लाख रुपये की सुपारी देने का पुलिस का दावा
पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, जांच में मोनू यादव की भूमिका मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आई है। उस पर आरोप है कि उसने गयादीन अहिरवार की हत्या कराने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी तय की थी।
इसके अलावा इंद्रजीत यादव पर भी हत्या की साजिश में शामिल होने और कथित तौर पर सुपारी देने में भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में मोनू यादव को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। हालांकि, वह अभी फरार है। उसकी तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस अधीक्षक ने उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
मोनू के पिता अजय यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस को आशंका है कि उन्होंने कथित योजना में सहयोग किया था। फिलहाल उनकी भूमिका से संबंधित साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस टीम पर फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में दो आरोपी घायल
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार बरामद करने के लिए पुलिस टीम कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान रास्ते में आरोपियों ने कथित तौर पर पहले से छिपाकर रखे गए तमंचों से पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी कर दी।
अचानक हुई इस घटना के बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान दो आरोपियों के पैर में गोली लगी। पुलिस ने दोनों घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।
इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी। मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश और साक्ष्य जुटाने का काम भी तेज कर दिया गया है।
आरोपियों के पास से कार और अन्य सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद करने का दावा किया है। इनमें वारदात में इस्तेमाल बताई जा रही स्विफ्ट डिजायर कार, खून लगा पाना रिंच, एक चेक, दो तमंचे और पांच कारतूस शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, बरामद चेक को अधिवक्ता पर हमले में इस्तेमाल किए गए सामान के रूप में जांच में शामिल किया गया है। सभी बरामद वस्तुओं को मामले से जुड़े साक्ष्यों के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस इन वस्तुओं की फॉरेंसिक जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
व्हाट्सएप चैट से साजिश की कड़ियां जोड़ रही पुलिस
हत्याकांड की जांच में डिजिटल साक्ष्य भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से घटना से पहले और बाद की व्हाट्सएप चैट मिलने की जानकारी दी गई है।
इन संदेशों के माध्यम से पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या की योजना कब बनाई गई, इसमें किन लोगों के बीच बातचीत हुई और वारदात के बाद आरोपियों ने आपस में क्या चर्चा की।
मोबाइल फोन और डिजिटल संवाद की जांच से कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि मामले में किसी भी व्यक्ति की भूमिका को बिना जांच के नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
छह लोगों की भूमिका सामने आने का दावा
पुलिस के मुताबिक, अभी तक की जांच में इस पूरे हत्याकांड से जुड़े छह लोगों की भूमिका सामने आई है। इनमें चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। तीन आरोपियों को शुरुआती कार्रवाई में पकड़ा गया था, जबकि इंद्रजीत यादव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत में आरोपियों की संख्या चार हो गई है।
मुख्य आरोपी मोनू यादव की गिरफ्तारी अभी बाकी है। वहीं, अजय यादव की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है।
अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
गयादीन अहिरवार की हत्या से कालपी के अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। अधिवक्ता समुदाय इस घटना को बेहद गंभीर मान रहा है और सभी आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
परिजनों की मांग है कि हत्या में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो। पुलिस अधिकारियों ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार मुख्य आरोपी मोनू यादव को गिरफ्तार करना और कथित साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाना है। साथ ही जमीन विवाद, आर्थिक लेनदेन, मोबाइल चैट और बरामद वस्तुओं की जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
निष्कर्ष: कालपी के अधिवक्ता गयादीन अहिरवार हत्याकांड में पुलिस के खुलासे ने जमीन विवाद और कथित सुपारी किलिंग की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी। अब सभी की नजर फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और मामले की आगे की जांच पर टिकी हुई है।
